चीन की जिनपिंग सरकार ने कोरोना पर रिसर्च से यूनिवर्सिटीज को किया बैन, डिलीट किए गए पेज
बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कुछ और विेशेषज्ञ चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस को वुहान वायरस के तौर पर संबोधित कर रहे हैं। मगर चीन को इससे एतराज है। चीन को कोरोना वायरस को चीनी वायरस पर आपत्ति है लेकिन उसके कुछ फैसले ऐसे हैं, जिनसे षडयंत्र की तरफ इशारा मिलता है। चीन की सरकार के आदेशों के बाद अब दो यूनिवर्सिटीज में कोरोना वायरस की रिसर्च पर रोक लगा दी गई है। इस खबर के बाद लोग दबी जुबान से मानने लगे हैं कि कहीं न कहीं कुछ ऐसा है जो चीन दुनिया को पता नहीं लगने देना चाहता है।

सरकारी अधिकारी रख रहे हैं नजर
यूरोपियन मीडिया की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक चीन की दो लीडिंग यूनिवर्सिटीज शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी और चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ जियोसाइंसेज (वुहान) की तरफ से कोरोना वायरस पर हुई रिसर्च के पेपर्स को सरकारी अधिकारियों ने चेक किया। इसके बाद यूनिवर्सिटीज की वेबसाइट्स से इन्हें हटा दिया गया। हालांकि डिलीटेड पेज को ऑनलाइन कैश के जरिए से एक्सेस किया जा सकता था। कहा जा रहा है कि जो रिसर्च की गई थी उसमें कई संवेदनशील जानकारियां सामने आई थीं और इस वजह से शी जिनपिंग सरकार इसे सामने नहीं आने देना चाहती थी।

पहले सरकार की मंजूरी और फिर होगी रिसर्च
सिर्फ इतना ही नहीं चीन की सरकार ने अब रिसर्च के लिए कई कड़े नियम लागू कर दिए हैं। सरकार की तरफ से जो निर्देश दिए गए हैं, उसके तहत अब यूनिवर्सिटीज को वायरस कहां से आया इसकी स्टडी और रिसर्च के लिए जिनपिंग सरकार से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया है। चीन के रिसर्चर्स अब सरकार की इस नीति से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि चीनी सरकार महामारी को लेकर जो धारणा पूरी दुनिया में बन रही है, कहीं न कहीं उसे रोकने की कोशिशें की जा रही हैं। जो स्टडी इन दोनों यूनिवर्सिटीज की तरफ से हुई थी उसमें कुछ अहम बिंदु थे-जैसे कि जब वुहान में इंसान से इंसानों में वायरस पहुंचने का पहला मामला सामने आया तो सरकारी प्रतिक्रिया पर सवाल क्यों उठे थे।

25 मार्च को जारी हुए निर्देश
वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस सबसे पहले चमगादड़ में आया और फिर वह इंसानों में पहुंचा था। लेकिन चीनी अधिकारियों का कहना है कि अभी तक वायरस कहां से आया, इस पर कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है। चीन के शिक्षा मंत्रालय की तरफ से 25 मार्च को निर्देश जारी किए गए थे। इसमें कहा गया, 'वायरस के ओरिजन का पता लगाने के लिए जो एकेडमिक पेपर्स हैं उन्हें सख्ती के साथ आगे संचालित करना होगा।' शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन पेपर्स को जब तक सरकार के पास नहीं भेजा जाएगा जब तक किसी भी जर्नल के लिए हरगिज इन्हें नहीं भेजा जाना चाहिए।

यूनिवर्सिटीज ने हटाए डॉक्यूमेंट्स
जिनपिंग सरकार ने वायरस की स्टडी के लिए टास्क फोर्स भी तैयार की है। राज्यों की काउंसिल के तहत आने वाली टास्क फोर्स की तरफ से जब मंजूरी नहीं मिलेगी, तब तक वायरा पर स्टडी नहीं हो सकेगी। शंघाई की फुदान यूनिवर्सिटीज की तरफ से 11 अप्रैल को सबसे पहले फाइंडिंग्स को पब्लिश किया गया था। मगर कुछ ही मिनटों बाद इसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद वुहान स्थित चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ जियोसाइंसेज की तरफ से भी वेबसाइट पर जो डॉक्यूमेंट रिलीज किए गए थे, उन्हें भी हटा लिया गया। पिछले माह चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि वायरस अमेरिका से आया और अमेरिकी मिलिट्री इसे वुहान में लेकर आई थी।












Click it and Unblock the Notifications