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अमेरिका को बड़ा मिलिट्री और आर्थिक झटका देने की तैयारी में चीन, दुर्लभ मिनरल्स के एक्सपोर्ट पर लगाएगा प्रतिबंध

चीन उन क्रिटिकल प्राकृतिक खनिज उत्पादों को अमेरिका एक्सपोर्ट करने से मना कर सकता है, जिनके जरिए अमेरिका मिलिट्री उत्पाद तैयार करता है।

बीजिंग: विश्व की दो महाशक्तियों के बीच तकरार लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका अब तक कई चीनी उत्पादों को बैन कर चुका है तो अब चीन अमेरिका को सबसे बड़ा झटका देने वाला है। चीन अमेरिका कोर आर्थिक और मिलिट्री फ्रंट पर चोट देने की प्लानिंग कर रहा है। हालांकि, अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हालिया बयान में चीन को सख्त प्रतिद्वंदी बताया है लेकिन चीन अमेरिका को बड़ा मिलिट्री और इकोनॉमिक झटका देने जा रहा है।

US CHINA

अमेरिका को मिलिट्री झटका देगा चीन

फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन उन क्रिटिकल प्राकृतिक खनिज उत्पादों को अमेरिका एक्सपोर्ट करने से मना कर सकता है, जिनके जरिए अमेरिका मिलिट्री उत्पाद तैयार करता है। फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन उन दुर्लभ खनिज उत्पादों को लिस्ट तैयार कर रहा है, जिनसे डिफेंस सामान तैयार होते हैं और चीन विचार कर रहा है कि उन उत्पादों का एक्सपोर्ट अमेरिका को सीमित कर देगा ताकि अमेरिका को मिलिट्री फ्रंट के साथ साथ इकोनोमिक फ्रंट पर भी बड़ा झटका लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने चीनी मिनरल्स कंपनियों से इस बात की जानकारी मांगी है कि अगर चीन दुर्लभ खनिज उत्पादों को अमेरिका और इंग्लैंड को सप्लाई करना बंद कर दे तो इन दोनों देशों और उनकी डिफेंस कंपनियों को कितना फर्क पड़ेगा। मिलिट्री उपकरणों के साथ साथ स्मार्टफोन बनाने में भी कई खनिज उत्पादों की जरूरत पड़ती है और चीन चाहता है कि इस फ्रंट पर अमेरिका को ब्लैकमेल किया जा सके।

दरअसल, पूरी दुनिया में एशिया महाद्वीप में ही सबसे ज्यादा खनिज संपदाएं हैं और यूरोपीय देशों के साथ साथ अमेरिका को भी खनिज उत्पाद के लिए चीन, भारत समेत एशियन देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। खासकर खनिज उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक देश चीन है और चीन चाहता है कि अमेरिका को इस फ्रंट पर जोर का झटका दिया जाए ताकि दूसरे मुद्दो पर वो अमेरिका से निगोसिएशन की स्थिति में आ सके। अगर चीन खनिज मिनरल्स की सप्लाई अचानक से रोकता है या फिर उसपर प्रतिबंध लगाता है तो अमेरिका को जल्दबाजी में खनिज उत्पादों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर होना पड़ेगा मगर ज्यादा दिन तक के लिए नहीं और चीन अमेरिका की इसी कमजोरी का फायदा उठाने की फिराक में है।

JOE BIDEN

दुर्लभ मिनरल्स पर प्रतिबंध लगाएगा चीन!

फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने चीन ने मिनरल्स और दुर्लभ धातुओं को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार किया है। जिसमें दुर्लभ धातुओं को लेकर कई गाइडलाइंस बनाए गये हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चीन सरकार बहुत जल्द दुर्लभ खनिज संपदाओं के संरक्षण का हवाला देकर उन्हें अमेरिका और इंग्लैंड सप्लाई करने पर रोक लगा सकता है। वहीं, फाइनेंसियल टाइम्स ने जब इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्री से प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो उन्होंने स्प्रिंग फेस्टिवल में व्यस्त होने की बात कहकर रिप्लाई नहीं किया वहीं चीन के खनिज मंत्री ने भी कोई उत्तर नहीं दिया।

दरअसल, अमेरिका की पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने चीन के खिलाफ 2019 में ट्रेड वार की शुरूआती की थी जिसके बाद से चीन चाहता है कि अमेरिका को मुंहतोड़ जबाव दिया जाए लिहाजा अब जाकर अमेरिका उन दुर्लभ खनिज संपदाओं पर प्रतिबंध लगा सकता है, जिसे अमेरिका चीन से 80% से ज्यादा खरीदता है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बीजिंग बहुत जल्द उन जहाजों को रोकने वाला है, जो कुछ महीनों में चीन से दुर्लभ धातुओं को लेकर अमेरिका की तरफ जाने वाले हैं। चीन चाहता है कि अगर अमेरिका को दुर्भल धातुओं की बिक्री ना की जाए तो अमेरिका घुटनों पर आ सकता है।

XI JINPING

अमेरिका को एक और मौका!

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जान गये थे कि चीन उन्हें दुर्लभ धातुओं खासकर मैग्नेट के नाम पर पर ब्लैकमेल कर सकता है लिहाजा उन्होंने ट्रेड वार छेड़ने के बाद मैग्नेट समेत दुर्लभ खनिज संपदाओं का प्रोडक्शन बढ़ाने का निर्देश दिया था। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की सबसे बड़ी खनिज उत्पादक कंपनी लायंस रेयर अर्थ कंपनी को सम्मानित भी किया था ताकि दुर्लभ धातुओं की आयात बढ़ाई जाए मगर अब जब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और जो बाइडेन ने चीन के साथ अच्छे संबंध बनाने के संकेत दिए हैं ऐसे में माना जा रहा है कि चीन देखना चाहता है कि बीजिंग को लेकर वाशिंगटन का रवैया कैसा रहने वाला है। अगर बाइडेन भी चीन पर आक्रामक हुए तो फिर बीजिंग दुर्लभ धातुओं की सप्लाई रोकने से नहीं हिचकेगा।

दरअसल, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका के द्वारा छेड़े गये ट्रेड वार और शिनजियांग में मानवाधिकार का उल्लंघन करने पर किए गये आलोचना को लेकर अमेरिका को सबक सिखाना चाहते हैं लिहाजा चीन प्लान बना रहा है कि एक साथ अमेरिका को मिलिट्री और इकोनॉमिक फ्रंट पर जोरदार झटका दिया जाए।

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