Drone Aircraft Carrier: चीन ने दुनिया के पहले ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर को उतारा, भारत के लिए कितना खतरा?
Drone Aircraft Carrier: आक्रामक विस्तारवादी नीति के चलते दुनिया के लिए खतरा बन चुके चीन ने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण करने के बाद अब दुनिया का पहला ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर को भी लॉन्च कर दिया है, जो अमेरिका से नौसैनिक शक्ति में चीन के आगे निकलने की चाहत को दिखाता है।
इस महीने नेवल न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, कि चीन ने यांग्त्ज़ी नदी पर जियांग्सू दयांग समुद्री शिपयार्ड में दुनिया का पहला ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका डिजाइन नियमित एयरक्राफ्ट कैरियर्स की तुलना में छोटा है और द्वितीय विश्व युद्ध के एस्कॉर्ट कैरियर्स की तुलना में थोड़ा छोटा लेकिन चौड़ा है।

चीन का ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर कैसा है?
नेवल न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर, फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट को उड़ान भरने की अनुमति देता है, लेकिन इसकी सीधी डेक व्यवस्था पुरानी होगी और इसमें ले जाने वाले विमानों की संख्या भी सीमित होगी।
नौसैनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल काफी ज्यादा बढ़ गया है और आधुनिक युद्ध में ड्रोन, पारंपरिक हथियारों का स्थान लेने लगे हैं। दुनिया की प्रमुख नौसेनाएं पहले से ही नियमित एयरक्राफ्ट कैरियर से ड्रोनों का परीक्षण कर रही हैं।
जैसे ईरान का शाहिद महदवी ड्रोन कैरियर, एक पुनर्निर्मित वाणिज्यिक मालवाहक जहाज है। वहीं, जब 2019 में अमेरिका ने अपने F-35 प्रोग्राम से तुर्की को बाहर कर दिया, तो तुर्की ने अपने TCG अनादोलु उभयचर हमला जहाज को ड्रोन कैरियर में बदल दिया, जिसे पहले F-35 लड़ाकू विमानों को ले जाने के लिए बनाया गया था।
लेकिन, नेवल न्यूज ने कहा है, कि चीन का ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर का डिजाइन असामान्य है, जिसमें एक विस्तृत दूरी वाला कैटामरन पतवार और लो फ्लाइट डेस्क है, जिससे पता चलता है, कि सामान्य एयरक्राफ्ट भी इसपर उतर सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन के ड्रोन कैरियर का मकसद समुद्र में बड़े फिक्स्ड-विंग यूएवी के साथ यात्रा करना है। चीन के पास अपने हथियार परीक्षण कार्यक्रम में पश्चिमी और पश्चिमी झुकाव वाली नौसेनाओं के जहाजों को काउंटर करने का एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसमें अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर भी शामिल हैं, जो एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल को भी लॉंच करने में सक्षम हैं।
नेवल न्यूज का कहना है, कि शिपयार्ड में कई हाई-टेक टारगेट बार्ज और दो बड़े ड्रोन मदरशिप पहले ही बनाए जा चुके हैं, जिसे "इलेक्ट्रॉनिक ब्लू फोर्स" के रूप में जाना जाता है।
नेवल न्यूज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि चीन के ड्रोन कैरियर को काफी सस्ते में संचालित किया जा सकता है या समुद्र में ड्रोन संचालन के परीक्षण और विकास के लिए एक प्रयोगशाला मंच के रूप में भी काम में लिया जा सकता है।
ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर से क्या फायदे?
यूके डिफेंस जर्नल की अक्टूबर 2023 की एक रिपोर्ट में कहा गया था, ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर भी सामान्य एयरक्राफ्ट कैरियर की तरह ही किसी देश की नौसेना की ताकत बढ़ाने में सक्षम हैं, जो किसी नौसेना को अपने देश की सीमा से काफी दूर जाकर ड्रोनों को संचालन करने की सुविधा देते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि इससे उपलब्ध टेक्टिकल, ऑपरेशनल और रणनीतिक विकल्प बढ़ जाते हैं।
इसके अलावा, समुद्र में कहीं से भी मानवरहित विमानों यानि ड्रोनों के जरिए काफी कम लागत में समुद्र और जमीन, दोनों पर खुफिया, निगरानी, टोही और हल्के हमले के संचालन करने में सक्षम बनाती है। इसके अलावा, ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर होने से किसी देश की नौसेना को, अपने ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए किसी और देश में सैन्य ठिकाना बनाने की भी जरूरत नहीं होती है, क्योंकि इससे वो काम समुद्र में कहीं से किया जा सकता है।
हालांकि, अगर कोई देश मानव रहित मिशनों को अंजाम देने के लिए अपनी हवाई शक्ति को स्थापित नहीं कर लेता है, तब तक ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर उसके लिए 'क्रांतिकारी' साबित नहीं होगा। वहीं, मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध लड़ने की क्षमता रखने वाले देशों के सामने भी ये लाचार नजर आएगा।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
चीन अगर किसी तरह के हथियार का निर्माण करता है, तो उसके निशाने पर कहीं ना कहीं भारत भी होता है। लिहाजा, सवाल ये हैं, कि आखिर चीनी ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर से भारत को कितनी चिंता करने की जरूरत है?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है, कि ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर के जरिए चीन अपनी नौसेना की शक्ति तो बढ़ा रहा है, लेकिन भारत के सामने ये ज्यादा कारगर साबित नहीं होंगे, लेकिन इस टेक्नोलॉजी को हासिल करने के बाद चीन के लिए कम कीमत वाले हल्के एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण का रास्ता खुल जाएगा।
एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने में अरबों रुपये लगते हैं, लिहाजा ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर भी एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकता है। इसके अलावा, चीन के नजरिए से देखा जाए, तो जापान, ताइवान और फिलीपींस तक फैली फर्स्ट आइलैंड श्रृंखला में अमेरिका लगातार "मिसाइलों की दीवार" बना रहा है, जो उसकी नेवी के लिए खतरा है, लिहाजा वो इन्हें भेदने के लिए या फिर जासूसी के लिए ड्रोन एयरक्राफ्ट कैरियर को भेज सकता है।
लेकिन, ताइवान के खिलाफ संघर्ष में ये चीन का सबसे प्रभावी ड्रोन लॉन्च पैड बन सकता है। इसके जरिए, चीन ड्रोनों के एक बड़े झुंड को लॉन्च कर सकता है, जिसका मकसद हमला करने के साथ साथ इलाके में दुश्मनों का पता लगाना, खतरनाक क्षेत्रों की जानकारी देने और जासूसी के लिए किया जा सकता है। लेकिन, भारत के खिलाफ ये अप्रभावी साबित हो जाएगा, क्योंकि भारत भी एयरक्राफ्टर कैरियर्स का संचालन करने के साथ साथ मिसाइल सिस्टम्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की क्षमता से लैस है।
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