Climate Change: प्रचंड गर्मी से तड़प रहा है चीन, बेहोश हो रहे हैं लोग, फसलों के चौपट होने की आहट
बीजिंग, 28 जुलाई: जलवायु परिवर्तन की वजह से इस बार चीन के लोग तड़प रहे हैं। इतनी ज्यादा गर्मी पड़ रही है कि लोगों को बेहोशी आ जा रही है। खासकर जिन्हें कोविड महामारी की वजह से पीपीई किट पहने की मजबूरी है, उन्हें तो बर्फ के चट्टानों से चिपके रहना पड़ रहा है। दूसरी तरफ ज्यादा गर्मी के चलते बिजली संकट पैदा हो गया है। एक तरफ शी जिनपिंग की सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, दूसरी तरफ फैक्ट्रियों को मांग बढ़ने के चलते पर्याप्त बिजली देने में दिक्कत हो रही है। कई जगहों पर बिजली संयंत्रों में तकनीकी खराबी आ रही है। इसके साथ ही गर्मी की वजह से फसलों को भी दो तरफा मार पड़ रही है। धान की फसलें गर्मी से जल रही हैं तो कपास की फसलों को ग्लेशियर पिघलने से आने वाली बाढ़ की चपेट में आने का खतरा है।

प्रचंड गर्मी से तड़प रहा है चीन
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रचंड गर्मी ने पूरे चीन में बिजली ग्रिड को दबाव में ला दिया है। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उद्योगों को ज्यादा बिजली देने की कोशिश हो रही है, लेकिन किसानों ने धान और कपास जैसी फसलों को बचाने के लिए त्राहिमाम करना शुरू कर दिया है। कई इलाकों में बिजली की मांग बढ़ गई है और एयर कंडीशन चलाने के लिए फैक्ट्रियों की बिजली को काटने की मजबूरी आ चुकी है। गर्मी इतनी ज्यादा पड़ रही है कि दक्षिणी चीन में ज्यादा तापमान के चलते धान, फलों और सब्जियों की खेती चौपट होने का डर है। ऊपर से लोगों की जान पर भी बन आई है।

कहीं बाढ़, कहीं सूखा
दूसरी तरफ ज्यादा तापमान होने की वजह से ग्लेशियर पिघलने शुरू हो चुके हैं, जिसके चलते शिंजिआंग जैसे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पैदा हो रही है, जो कि कपास की खेती के लिए महशूर है। कुल मिलाकर चीन की सरकार के लिए यह बहुत ही मुश्किल वक्त है, जब एक तरफ फैक्ट्रियों को जारी रखने के लिए उन्हें बिजली उपलब्ध करवाना जरूरी है तो दूसरी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए उसकी निर्बाध सप्लाई बनाए रखनी है।

एक्स्ट्रीम वेदर की घटनाओं में बढ़ोतरी
आज की तारीख में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जलवायु परिवर्तन की वजह से पैदा हुए संकट का सामना करने को मजबूर है। इस संकट से इस बार की गर्मी में भारत, यूरोप और अमेरिकी कोई देश भी नहीं बचे हैं। हर जगह एक्स्ट्रीम वेदर इवेंट्स में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले साल कोयले की किल्लत और ज्यादा मांग की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था चौपट होते-होते बची थी। लेकिन, इस बार कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अधिकारियों के मुताबिक कोयले की कमी नहीं है, इसलिए उसके लिए हालात को काबू में रखने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

गर्मी की वजह से बिजली संयंत्र भी दबाव में
बुधवार को एक ब्रीफिंग में नेशनल एनर्जी एडमिनिस्ट्रेशन ने इस बात की ओर इशारा किया कि बिजली संयंत्रों में 52% इजाफे के साथ साल के पहले 6 महीने में 170 मिलियन टन कोयला था, जो कि साल के इस समय के लिए एक रिकॉर्ड है। लेकिन, पिछले कुछ हफ्तों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ कोयले की खपत भी काफी बढ़ी है। ब्लूमबर्ग एनईएफ एनालिस्ट हैनयांग वीने कहा, 'ज्यादर शहरों में अगस्त तक मांग में वृद्धि देखी जा सकती है, लेकिन हम इस वर्ष कम गंभीर बिजली संकट की आशा करते हैं।'

बिजली संयंत्रों के उपकरण खराब हो रहे हैं
चीन के मौसम विज्ञान प्रशासन के मुताबिक अब ध्यान दक्षिणी चीन और अगले 10 दिनों में बहुत ही गर्म मौसम के अनुमानों की ओर है। वैसे हैनयांग ने खुद ही ये भी कहा है कि गुआंगडोंग के मामले में जो कि दक्षिण का इकोनॉमिक पावरहाउस है, वहां बिजली की मांग इतनी बढ़ गई है, जो ग्रिड की सीमा तक पहुंच चुकी है। इसके चलते यहां कोयले का स्टॉक होने के बावजूद उपकरण खराब हो रहे हैं, जिससे बिजली संकट पैदा हुई है।

जलवायु संकट बहुत बड़ा खतरा बन चुका है
चीन के एनईए के एक अधिकारी ली फुलोंग ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि साल के दूसरे हिस्से में अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिशों की वजह से बिजली की मांग और ज्यादा बढ़ेगी, जिसके चलते ठंड के दिनों में फिर से कोयला, गैस और बिजली की मांग बढ़ने वाली है। जलवायु परिवर्तन ने भारत को भी मुश्किल में डाला हुआ है; और चीन की हालात देखने से पूरी दुनिया को समझदारी से काम लेने की आवश्यकता है। (चौथी और छठी तस्वीर के अलावा बाकी सौजन्य: ट्विटर वीडियो)












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