दुनिया में सबसे तेजी से गर्म हो रहा है चीन, ड्रैगन ने भी माना- भयानक ढंग से पिघलने लगे हैं ग्लेशियर
बीजिंग, 6 अगस्त: चीन पिछले कुछ दशकों से लगातार 0.26 डिग्री की रफ्तार से गर्म हो रहा है। दुनिया में ऐसी स्थिति कहीं भी नहीं है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये रिपोर्ट खुद चीन की सरकारी एजेंसी ने ही तैयार की है। इसमें भयानक रफ्तार से ग्लेशियर के पिघलने, समुद्र की सतह ऊपर उठने और एक्स्ट्रीम वेदर कंडीशनों को लेकर कई चेतावनी भरी जानकारी दी गई है। गौरतलब है कि चीन के कुछ इलाके ने इस साल 1,000 साल में सबसे भयानक बाढ़ और बारिश की त्रासदी झेली है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि यह सब पर्यावरण परिवर्तन की वजह से हो रहा है। हालांकि, यह विषय तो वैश्विक चिंता का मुद्दा है, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकारी एजेंसी ने यह रिपोर्ट बनाई है, इसलिए यह बहुत ही चौंकाने वाली है।

दुनिया में सबसे तेजी से गर्म हो रहा है चीन
चीन के नेशनल क्लाइमेट सेंटर ने एक किताब छापी है, जिसके मुताबिक चीन में 1901 से लेकर 2020 तक जो 10 सबसे गर्म साल रहे हैं, उनमें से 9 बीते 21 वर्षों में ही रहे हैं। पिछले हफ्ते जारी सरकार की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरण संकट के चलते चीन का तापमान वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते एक्सट्रीम वेदर की स्थिति बार-बार और लगातार बनने लगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1951 से लेकर 2020 तक चीन में सतह के औसत तापमान में महत्वपूर्ण रूप से बढ़त देखी गई है, जिसकी वजह से हर 10 वर्ष में यह देश 0.26 डिग्री की रफ्तार से गर्म हो रहा है। नेशनल क्लाइमेट सेंटर (एनसीसी) की ओर से दी ब्लू बुक ऑन क्लाइमट चेंज के नाम से प्रकाशित इस किताब के मुताबिक 20वीं सदी की शुरुआत से लेकर अबतक की बात करें तो पिछला 20 साल सबसे ज्यादा गर्म रहा है। एनसीसी चीन का टॉप क्लाइमेट रिसर्च सेंटर है और इसे चीन के मौसम प्रशासन से मान्यता मिली हुई है।

चीन में 60 वर्ष में दूसरा सबसे गर्म महीना रहा जुलाई
इस साल चीन में जुलाई के महीने में दिन के समय पिछले सालों के मुकाबले बहुत ज्यादा तापमान दर्ज किया है। यह 1961 के बाद दूसरा सबसे गर्म महीना रहा है। जबकि इसी महीने में पिछले वर्षों के मुकाबले बारिश में 3.2% की बढ़ोतरी हुई है। ये जानकारी ब्लू बुक के हवाले से सिक्स्थ टोन न्यूज वेवसाइट की ओर से दी गई है। रिपोर्ट में 1961 से 2020 तक चीन के क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स में इजाफे का ट्रेंड बताया गया है, जिसमें 1991 से लेकर 2020 के बीच औसत क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स (6.8) में 1961-90 के मुकाबले 58 फीसदी इजाफा हुआ है।

चीन में बहुत तेजी से पिघल रहे हैं ग्लेशियर, बढ़ रहा है समुद्र का स्तर
रिपोर्ट में जो एक और भयावह बात बताई गई है, वो ये है कि चीन में ग्लेशियर भी बहुत ज्यादा तेज गति से पिघलने लगे हैं, जो कि कई देशों की नदियों के भी स्रोत हैं। रिपोर्ट में चीन को 'संवेदनशील इलाका' बताया गया है जो कि पर्यावरण संकट की वजह से प्रभावित हो रहा है। इसका परिणाम चीन के तटीय इलाकों में दिखाई पड़ रहा है। समुद्र स्तर में भयानक ढंग से इजाफे होने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक '1980 से 2020 तक, चीन के तटीय इलाकों में समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर 3.4 मिमी प्रति वर्ष थी, जो कि इसी दौरान वैश्विक औसत से ज्यादा है। 2020 में, चीन के तटीय इलाकों में समुद्र का स्तर 1993-2011 के औसत से 73 मिमी अधिक रहा, जो कि 1980 के बाद से तीसरा उच्चतम स्तर है।'
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हेनान प्रांत में भारी बारिश और बाढ़ से हुई बड़ी तबाही
रिपोर्ट में यह बात स्वीकार की गई है कि बहुत ज्यादा तापमान और भारी बरसात जैसी घटनाओं में इजाफा हुआ है। 1990 के दशक के मध्य से बहुत ज्यादा तापमान के मामलों और 1990 के दशक के बाद के वर्षों से आंघी-तूफानों की औसत तीव्रता में उतार-चढ़ाव के साथ महत्वपूर्ण रूप से इजाफा हुआ है। चीन की यह सरकारी रिपोर्ट मध्य चीन के हेनान प्रांत में आई विनाशकारी बाढ़ के कुछ ही हफ्तों बाद सामने आई है, जिसमें 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। आलम ये था कि हेनाम प्रांत की राजधानी झेंगझोऊ में एक साल की बारिश एक ही दिन में हो गई और पूरा शहर बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गया। (तस्वीरें-फाइल)












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