धरती के भीतर दो जगहों पर 10 हजार मीटर की खुदाई क्यों कर रहा चीन? जानिए ड्रैगन का प्लान
चीन ने पृथ्वी के नीचे प्राकृतिक संसाधनों की खोज के लिए गुरुवार से एक नए सुपर डीप बोरहोल की खुदाई शुरू कर दी है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह खुदाई दक्षिण पश्चिम चीन के सिचुआन बेसिन में जमीन में 10,520 मीटर (34,514 फीट) तक होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र गैस उत्पादन के लिए एक प्रमुख क्षेत्र है और इंजीनियरों को वहां प्राकृतिक गैस का भंडार मिलने की उम्मीद है। हैरानी की बात ये है कि चीन ने कुछ ही हफ्ते पहले शिंजियांग प्रांत इलाके में 11,100 मीटर (36,417 फीट) की ड्रिलिंग शुरू की है।

चीन तेल संपदा से भरपूर शिंजियांग के उइगुर स्वायत्त प्रदेश के तारिमू बेसिन में ये खुदाई शुरू की है। इस कुएं का नाम शेंनडी थाख-1 रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इतना गहरा कुआं खोदना पृथ्वी के अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाने और मानवीय समझ की सीमाओं का विस्तार करने का एक साहसिक प्रयास है।
तारिमू बेसिन में हो रही ड्रिलिंग चीन द्वारा की जा रही अब तक की सबसे गहरी खुदाई है। यदि चीन के ये दोनों प्रोजेक्ट पूरे हो जाते हैं तो वे दुनिया के दो सबसे गहरे मानव निर्मित बोरहोल में से एक होंगे। यहां ध्यान देने वाली बात है कि वे सबसे गहरे नहीं होंगे।
यह रिकॉर्ड वर्तमान में उत्तर-पश्चिम रूस में बंद हो चुके कोला सुपरडीप बोरहोल के पास है। ये रूस-नॉर्वे बॉर्डर के पास है। जो एक सोवियत युग की वैज्ञानिक ड्रिलिंग परियोजना थी। इस गड्ढ़े को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने खोदना शुरू किया था।
रूसी वैज्ञानिक, अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा गहरा खोदना चाहते थे। इसे पूरा होने में 20 साल लग गए और 12,262 मीटर (40,229 फीट) तक पहुंच गई। रूस को इससे अधिक खुदाई करने पर रोक लगानी पड़ी क्योंकि उनके ड्रिलिंग मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त जमीन का तापमान 180 डिग्री सेलसियस से भी ज्यादा मापा गया।
वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक यहां का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। जमीन का तापमान लगातार बढ़ते देख वैज्ञानिकों ने तत्काल काम रोक दिया। सोवियत संघ के पतन के बाद इस होल पर वैज्ञानिक अधिक काम नहीं कर सके। दुनिया के इस सबसे बड़े गड्ढें को नर्क का द्वार कहा जाता है।
मनुष्य चंद्रमा तक पहुंच गया है, लेकिन जब हमारे पैरों के नीचे की जमीन तलाशने की बात आती है, तो हमने केवल अपने ग्रह की सतह को ही खंगाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती का तल 6371 किलोमीटर नीचे है, जहां तक पहुंचना असंभव है।
गहराई तक खुदाई करने से वैज्ञानिकों को इस बारे में और अधिक जानने में मदद मिलती है कि पृथ्वी का निर्माण किस प्रकार हुआ, भूगर्भिक परत दुनिया के गठन की भूवैज्ञानिक समयरेखा की तरह काम करती है।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक चीन को ऊर्जा की भारी जरूरत है। चीनी नेता शी जिनपिंग ने भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता घोषित किया है।












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