दूसरा नर्क का दरवाजा बनाने की कोशिश में जुटा चीन, धरती में खोदेगा 10 हजार मीटर गड्ढ़ा, क्या ढूंढ़ रहा ड्रैगन?
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देश पर चीनी वैज्ञानिक धरती के भीतर अनुसंधान में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में झिंजियांग प्रांत में एक रेगिस्तान में 10,000 मीटर की खुदाई की जा रही है।

अमेरिका, सोवियत संघ के बाद अब चीन भी धरती के अंदर पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हाल के वर्षों में चीन पृथ्वी की सतह में नई सीमाओं की खोज करने के कई प्रयास कर चुका है। इस बीच चीनी वैज्ञानिकों ने पृथ्वी में 11,100 मीटर (36,417 फीट) की ड्रिलिंग शुरू कर दी है।
सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार यह चीन द्वारा की जा रही अब तक की सबसे गहरी खुदाई है। चीन ने तेल संपदा से भरपूर झिंजियांग के उइगुर स्वायत्त प्रदेश के तारिमू बेसिन में 30 मई को 11 बज कर 46 मिनट पर ये खुदाई शुरू की।
इस कुएं का नाम शेंनडी थाख-1 रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ये गहरा कुआं खोदना पृथ्वी के अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाने और मानवीय समझ की सीमाओं का विस्तार करने का एक साहसिक प्रयास है।
रिपोर्ट के अनुसार खुदाई के दौरान उन्नत मशीन चट्टान की परतों में घुसकर पृथ्वी की परत में क्रेटेशियस सिस्टम तक पहुंच जाएगा। इस मशीन में लगभग 145 मिलियन वर्ष पुराने रॉक डेटिंग की सुविधा है।
चाइनीज एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के एक वैज्ञानिक सन जिनशेंग ने सिन्हुआ को बताया, "इस ड्रिलिंग प्रोजेक्ट का निर्माण करना बेहद मुश्किल था। इसकी तुलना दो पतले स्टील के केबलों पर चलने वाले बड़े ट्रक से की जा सकती है।"
आपको बता दें कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2021 में देश के कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए एक भाषण में पृथ्वी के गहराई का अनुसंधान करने का आह्वाहन किया था।
चीन का लक्ष्य पृथ्वी के भीतर पाए जाने वाले खनिज और ऊर्जा संसाधनों की पहचान करना और भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी पर्यावरणीय आपदाओं के जोखिमों का आकलन करना है।
आपको बता दें कि पृथ्वी पर मानवनिर्मित सबसे गहरा गड्ढा कोला सुपरडीप बोरहोल है। यह रूस-नॉर्वे बॉर्डर के पास है। इस गड्ढ़े को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने खोदना शुरू किया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा गहरा खोदना चाहते थे।
लगभग 20 साल की ड्रिलिंग के बाद 1989 में वे 12,262 मीटर (40,230 फीट) तक पहुंच पाए। रूस को इससे अधिक खुदाई करने पर रोक लगानी पड़ी क्योंकि उनके ड्रिलिंग मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त जमीन का तापमान 180 डिग्री सेलसियस से भी ज्यादा मापा गया।
वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक यहां का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। जमीन का तापमान लगातार बढ़ते देख वैज्ञानिकों ने तत्काल काम रोक दिया। सोवियत संघ के पतन के बाद इस होल पर वैज्ञानिक अधिक काम नहीं कर सके। दुनिया के इस सबसे बड़े गड्ढें को नर्क का द्वार कहा जाता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती का तल 6371 किलोमीटर नीचे है, जहां तक पहुंचना असंभव है।
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