चीन की दादागीरी का नया वीडियो, UNHRC में उइगर एक्टिविस्ट को बोलने से रोका, हंगामे में US भी कूदा
उइगर विवाद चीन के शिनजियांग प्रांत का बड़ा मुद्दा है, जो एक स्वायत्त क्षेत्र है। लेकिन, चीन यहां के मुस्लिमों को चीन की संस्कृति में ढालना चाहता है और उनके मूल को बदलने की कोशिश कर रहा है।

China Block Uyghur Activist at UNHRC: उइगर मुस्लिमों को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चीन और अमेरिका के बीच जमकर खटपट हुई है और चीन ने उइगर कार्यकर्ता को यूएनएचआरसी में बोलने से रोक दिया, जिसके बाद हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने उइगर मुस्लिमों के एक्टिविस्ट को उस वक्त बोलने से रोकने की कोशिश की, जब वो चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के साथ होने वाले अत्याचार को दुनिया के सामने ला रहे थे। उइगर कार्यकर्ता ने वैश्विक निकाय यूएनएचआरसी से फौरन हस्तक्षेप की मांग की, जिसके बाद चीन बौखला गया।
यूएनएचआरसी में उइगर मुस्लिमों पर हंगामा
यूएनएचआरसी के 52वें सत्र के दौरान जर्मनी में रहने वाले उइगर कांग्रेस के अध्यक्ष डोलकुन ईसा को बीच में ही रोक दिया गया, क्योंकि उन्होंने एक सामान्य बहस में बोलते हुए उइगर मुस्लिमों के खिलाफ होने वाले चीन के अत्याचार को दुनिया के सामने रखने की कोशिश की। जैसे ही डोलकुन ईसा ने बोलने की कोशिश की, ठीक वैसे ही चीन के एक डिप्लोमेट ने उनके भाषण को बाधित कर दिया और यूएनएचआरसी के फ्लोर पर आपत्ति उठा दी, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अध्यक्ष वैक्लेव बालेक ने चीन के प्रतिनिधि को बयान देने की अनुमति दी। चीनी राजनयिक ने कहा, कि डोल्कन ईसा "तथाकथित एनजीओ" का प्रतिनिधि नहीं है और चीनी प्रतिनिधि ने उन्हें "चीन विरोधी और अलगाववादी, हिंसक तत्व" कहकर संबोधित किया। लेकिन, जब चीनी डिप्लोमेट ने हस्तक्षेप किया, तो अमेरिका और इरिट्रिया के प्रतिनिधि भी बीच में कूद पड़े, जिसके बाद यूएनएचआरसी के मंच पर हंगामे के हालात बन गये।
उइगर मुस्लिमों पर चीन बनाम अमेरिका
जब अमेरिका और इरिट्रिया के प्रतिनिधियों ने उइगर कार्यकर्ता का समर्थन कर दिया, तो यूएनएचआरसी के अध्यक्ष ने फिर से उन्हें बोलने की इजाजत दे दी। वहीं, भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए डोल्कन ईसा ने कहा, कि 'चीन सच्चाई और न्याय से बहुत डरता है। आज, मैंने एक बयान दिया, और चीन ने मुझे रोकने की कोशिश की और मुझे अलगाववादी और चीन विरोधी कहा। मैं चीन से अलग होने की मांग नहीं कर रहा हूं। मैं शंघाई या बीजिंग को अपने हाथ में लेने की मांग नहीं कर रहा हूं। यह मेरा देश (शिनजियांग) है, यह एक अधिकृत क्षेत्र है और चीन को इसे स्वीकार करना चाहिए।" डोल्कन ईसा ने इस बात पर जोर दिया, कि संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद एक ऐसा मंच है, जहां सभी मानवाधिकार चिंताओं को उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं यहां मानवाधिकार का मुद्दा उठा रहा हूं और चीन सरकार उइगरों का नरसंहार कर रही है। लेकिन, चीनी सरकार नाखुश है और वे नहीं चाहते कि उइगर मुद्दा एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बने।" ईसा ने कहा, कि "चीनी सरकार मुझ पर हमला करने की कोशिश कर रही है, मुझे रोकने की कोशिश कर रही है और यह पहली बार नहीं है"।
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उइगर मुस्लिमों पर भारी अत्याचार
आपको बता दें, कि पिछले साल अगस्त में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने ही शिनजियांग प्रांत पर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था, कि चीन ने उइगर के खिलाफ "गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन" किया है। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के एडवोकेसी मैनेजर जुमरेते अर्किन ने वॉयस ऑफ अमेरिका को बताया था, कि "चीनी सरकार दशकों से एक ही तरह का झूठ बोलती रही है।" आपको बता दें, कि वर्ल्ड उइगर कांग्रेस को इस साल नोबल प्राइज के लिए भी नॉमिनेट किया गया है, जिसको लेकर भी चीन बौखलाया हुआ है। वहीं, जुमरेते अर्किन ने कहा था, कि "वर्ल्ड उइगर कांग्रेस को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है, जो यह इस बात का प्रमाण है, कि स्वतंत्र और लोकतांत्रिक दुनिया ने वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के काम को मूल्यवान और महत्वपूर्ण माना है। ऐसे संगठनों को बदनाम करने के बजाय, चीनी सरकार को लोकतांत्रिक दुनिया की बात सुननी चाहिए।" वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की वेबसाइट के मुताबिक, वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की स्थापना 2004 में, जर्मनी के म्यूनिख में, पूर्वी तुर्किस्तान राष्ट्रीय कांग्रेस और विश्व उइगर युवा कांग्रेस के एक संगठन में विलय के बाद हुई थी।












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