China In Bangladesh: बांग्लादेश में वर्ल्ड वॉर-2 के एयरबेस को एक्टिव कर रहा चीन, भारत के चिकन नेक को खतरा
China In Bangladesh: चिकन नेक, ये वो शब्द है जो अक्सर हमें तब सुनने को मिलता है जब-जब हमारी बातचीत में नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों का जिक्र हो, पश्चिम बंगाल का जिक्र हो या फिर भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर का जिक्र हो। चिकन नेक पर बहस तब-तब और तीखी हो जाती है जब चीन के साथ हमारी झड़प होती है। लेकिन अब इस पर एक बार फिर नए सिरे से बहस तेज हो गई है। ये चिकन नेक भारत वाला चिकन नेक नहीं बल्कि बांग्लादेश का चिकन नेक है, और एक नहीं दो-दो चिकन हैं बांग्लादेश के पास जिनके कारण बांग्लादेश असुरक्षित महसूस करता रहता है। इनमें से एक है बांग्लादेश का रंगपुर चिकन नेक प्वाइंट और दूसरा है बांग्लादेश का चटगांव चिकन नेक प्वॉइंट।

हिमंता की यूनुस को फटकार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की कमज़ोरियों के बारे में चेतावनी देते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि जो लोग भारत के चिकन नेक की तरफ आंख उठाने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें बता दूं कि बांग्लादेश में दो-दो चिकन नेक प्वॉइंट हैं। पहला रंगपुर और दूसरा चटगांव। इसमें से चटगांव कोरिडोर भारत के चिकन नेक से भी ज्यादा छोटा है और ये बांग्लादेश की आर्थिक और राजनीतिक राजधानी के बीच की इकलौती कड़ी है। मैं सिर्फ तथ्य पेश कर रहा हूं जो लोग अक्सर भूल जाते हैं।
चीन के साथ मिलकर क्या प्लान बना रहे यूनुस?
हिमंता को ये सब कहने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि यूनुस ने अपने चीन दौरे के दौरान भारत के नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र को 'भूमि से घिरा हुआ' बताया था और दावा किया था कि 'बांग्लादेश इस इलाके में समुद्र के एकमात्र संरक्षक के रूप में कार्य करता है। इसलिए चीन को बांग्लादेश में निवेश करना चाहिए'। यूनुस के इस बयान ने 'चिकन नेक' शब्द के इर्द-गिर्द चर्चाओं को फिर से हवा दे दी, जिससे हिमंता को बांग्लादेश की अपनी भौगोलिक कमज़ोरियों को गिनाना पड़ा।
बांग्लादेश में वर्ल्ड वॉर-2 के एयर बेस पर चीन
खबर ये भी है कि चीन बांग्लादेश में भारत के बॉर्डर के पास और वर्ल्ड वॉर टू के दौरान बने लालमोनिरहाट एयरबेस को फिर से एक्टिव करने में बांग्लादेश की मदद कर रहा है। यह एयरबेस भारत के चिकन नेक से मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर है। चीनी अधिकारी भी इस एयरबेस का दौरा कर रहे हैं और इसमें बांग्लादेश की भी रजामंदी है। शेख हसीना के दौर में ही चीन ये प्लान बना चुका था, लेकिन तब भारत-बांग्लादेश के रिश्ते चरम पर थे तो चीन को यहां से कुछ हासिल नहीं हुआ। लेकिन हसीना का तख्तापलट होते ही यूनुस ने खुद इसकी पेशकश चीन के सामने कर दी। कहा ये भी जा रहा है कि इसे एक आम हवाई अड्डे की तर्ज पर डिवेलप किया जा रहा है। लेकिन इसके मिलिट्री इस्तेमाल का डर हमेशा बना रहेगा। लिहाजा हिमंता को बांग्लादेश को उसके चिकन नेक प्वॉइंट की बात याद दिलाना पड़ी।
बांग्लादेश के दोनों चिकन नेक प्वॉइंट
बांग्लादेश के दोनों कॉरिडोर और उनकी संवेदनशीलता को भी समझ लेते हैं। बांग्लादेश का पहला कॉरिडोर यानि की रंगपुर कॉरिडोर सिर्फ 83 किलोमीटर का है। ये पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर जिले और मेघालय के साउथ वेस्ट गारो हिल्स से लगता है। और इसके दोनों तरफ भारत है और इसका पूर्वी छोर भी भारत में खुलता है। यानि चीन इसकी किसी भी सूरत में मदद नहीं कर पाएगा। साथ ही यह बांग्लादेश के 11 प्रतिशत हिस्से को बांग्लादेश से अलग करता है। वहीं दूसरा चिकन नेक प्वॉइंट चटगांव है। ये सिर्फ 28 किलोमीटर का है, जिसमें एक तरफ भारत का त्रिपुरा राज्य है और दूसरा सिर्फ बंगाल की खाड़ी यानी कि समुद्र में खुलता है। अगर भारत इस पर कब्जा कर लेता है तो बांग्लादेश के 9 जिले उससे कट जाएंगे। इसके अलावा बांग्लादेश का सबसे बड़ा पोर्ट चटगांव भी इसी इलाके में पड़ता है जिससे उसकी इकॉनोमी चलती है। बांग्लादेशी लोग इसे बांग्लादेश की आर्थिक लाइफ लाइन भी कहते हैं।
चीन का बांग्लादेश में निवेश
चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत चटगांव में इन्वेस्टमेंट कर रहा है। इसके अलावा ढाका-चटगांव हाईवे, ढाका पावर प्लांट और ढाका पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट के नाम पर चीन यहां अंधा पैसा बहा रहा है, ताकि उसका बांग्लादेश में दखल बढ़ सके और बांग्लादेश को भी उसके कर्ज के जाल में फंसाकर कुछ जरूरी इलाके हथिया सके।
चीन के लिए भारत का काट
भारत ने भी चीन की इस चाल के लिए काट ढूंढ लिया है। भारत K.M.M.T.T. प्रोजेक्ट (कलादान मल्टी मॉडल ट्रांसिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट) शुरू कर दिया है। ये प्रोजेक्ट भारत के मिजोरम को म्यांमार के सितवे से जोड़ता है। इससे नॉर्थ ईस्ट की चटगांव पर निर्भरता भी घटेगी और भारत को दूसरे बिजनेस पार्टनर भी मिलेंगे। तो भारत को बांग्लादेश में चीन के घुसने से कम खतरा है जबकि भारत ने जिस दिन मन बना लिया उस दिन बांग्लादेश को जरूर कई इलाकों से हाथ धोना पड़ सकता है।
तीन तरफ से सुरक्षित भारत का चिकन नेक प्वॉइंट
बांग्लादेश की कमज़ोरियों के उलट भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे भारत का एक चिकन नेक प्वॉइंट भी कहते हैं, उसे एक मज़बूती माना जाता है। ये कॉरिडोर नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों सिक्किम, असम, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मणिपुर को भारत के केंद्र से जोड़ता है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में कहा कि यह कॉरिडोर तीन तरफ़ से भारतीय सेना की रणनीतिक तैनाती के कारण भारत के लिए एक मज़बूत कड़ी के रूप में काम करता है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा रास्ता है, जिसकी वजह से चीन भी इस पर आंख गड़ाए हुए है। लेकिन भारत की चाक-चौबंद सुरक्षा के चलते उसके मंसूबे हर बार पस्त पड़ जाते हैं।
कभी भी ढह सकता है यूनुस का किला
इधर बांग्लादेश में उपजी राजनीतिक अस्थिरता के बीच तनाव बढ़ने के साथ ही ये भौगोलिक कमजोरियां बांग्लादेश की जियो पॉलिटिक्स में तेज़ी से बदल रही हैं. यह स्थिति बांग्लादेश की स्थिरता और सुरक्षा दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है यदि वह भारत से उलझने की कोशिश करता है तो। क्योंकि वर्तमान में बांग्लादेश की यूनुस की सरकार कभी भी ढह सकती है। आंतरिक मतभेद इतने ज्यादा बढ़ चुके हैं, कि बांग्लादेश की आर्मी और बांग्लादेश का विपक्ष दोनों ही यूनुस के खिलाफ जा चुके हैं।
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