China: 1.3 ट्रिलियन डॉलर देकर इन 16 मुस्लिम देशों को कैसे 'बंधक' बना चुका है ड्रैगन ? जानिए

नई दिल्ली, 9 जुलाई: अल्पसंख्यक मुसलमानों के साथ चीन के क्रूर बर्ताव पर मुसलमानों के ठेकेदोरों की बोलती क्यों बंद है, उस राज पर से पर्दा उठने लगा है। दुनिया के कई मुस्लिम देश तो अब उइगर मुसलमानों पर चीन की नीति की पैरवी करने लगे हैं, उसे सराहा जाने लगा है। पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की जैसे देश तो इनमें सबसे आगे हैं। यह सब उन पैसों का कमाल है, जो चीन ने इन देशों में लगा रखा है या भविष्य लगाने की तैयारी कर रहा है। इन देशों के मुंह पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना इतने पैसे फेंक रही है कि उनकी बोलती बंद हो चुकी है।

चीन के जुर्म पर क्यों चुप हैं मुस्लिम देश ?

चीन के जुर्म पर क्यों चुप हैं मुस्लिम देश ?

चीन के शिंजियांग प्रांत में तकरीबन 20 लाख अल्पसंख्यक उइगर मुसलमानों के साथ क्या सलूक हो रहा है, इसपर कई सारी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पड़तास कर चुकी हैं। चीन की सत्ताधारी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार उनका नरसंहार करती है, उनकी धार्मिक आजादी छिन चुकी है, कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर महिलाओं का जबरन नसबंदी करते हैं, उनका व्यवस्थित रूप से शारीरिक शोषण होता है, उनके मासूम बच्चों को उनसे छीनकर डिटेंशन कैंपों में ठूंस दिया जाता है। उइगर मुसलमानों को परिवार से दूर करके गुलाम बनाकर काम कराया जाता है। अमेरिका, यूरोपियन यूनियन यहां तक कि यूनाइटेड नेशन तक की कई रिपोर्ट चीन के इस अल्पसंख्यक समाज की हालात का पोल खोल चुकी हैं। उइगर मुसलमानों की मस्जिदों को तबाह करने की सैटेलाइट इमेज सामने आ चुकी हैं। चीन बर्बरता की सारी हदें पार कर चुका है, लेकिन यह सब करने के बावजूद वह एक ही रटी-रटाई बात करता है कि अल्पसंख्यकों को 'वोकेशनल एजुकेशन और ट्रेनिंग सेंटर' में रखा जाता है, ताकि वह मनुष्य कहलाने लायक बन सकें! यानी अल्पसंख्यकों को चीन में इंसान समझा ही नहीं जाता!

चीन की नीति की पाकिस्तान ने की तारीफ

चीन की नीति की पाकिस्तान ने की तारीफ

लेकिन, जब इस्लामोफोबिया के खिलाफ आवाजें उठाने वाले मुस्लिम देशों की भी चीन की इस हरकत के खिलाफ जुबान नहीं खुलती तो आशंका जरूर होती है। हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने उइगर मुसलमानों पर शी जिनपिंग की सरकार की थ्योरी पर मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा है कि चीन जो कुछ भी कर रहा है (उइगर मुसलमानों) वह 'समुदाय की बेहतरी के लिए' कर रहा है। यही नहीं उनका कहना है कि चीन का मॉडल पश्चिमी लोकतंत्र से कहीं ज्यादा अच्छा है। वास्तव में इमरान ने उइगर मुसलमानों के साथ चीन के बर्ताव के लिए कम्युनिस्ट पार्टी की तारीफ की है।

मुस्लिम देश ही उइगर मुसलमानों को कहने लगे आतंकी

मुस्लिम देश ही उइगर मुसलमानों को कहने लगे आतंकी

उइगर मुसलमानों के दर्द से नजरें फेंरने की मुस्लिम देशों की एक और बानगी देखिए। 2019 में करीब 37 देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें चीन की शिंजियांग नीति का बचाव किया गया था। इन देशों ने उइगर मुसलमानों पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि चीन इनके साथ जो कुछ करता है, वह आतंकवाद रोकने के लिए पूरी तरह से वाजिब है। दिलचस्प बात ये है कि इनमें से 16 देश मुस्लिम बहुल हैं, जिनमें सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, अल्जीरिया, बहरीन, तुर्कमेनिस्तान, ओमान, कतर, सीरिया, कुवैत, सोमालिया और सूडान शामिल हैं। ये सारे देश ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के भी सदस्य हैं, जो दुनिया की 190 मुस्लिम आबादा का प्रतिनिधित्व करता है। सवाल है कि मुस्लिमों के नाम पर पूरी दुनिया में बवाल काटने वाले ओआईसी को उइगर मुसलमानों के नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाने के वक्त सांप क्यों सूंघ जाता है?

मुस्लिमों के तुर्रम खां तुर्की का हाल जानिए

मुस्लिमों के तुर्रम खां तुर्की का हाल जानिए

पाकिस्तान या इमरान खान सरकार की तो इतनी हैसियत ही नहीं है कि वह उइगर मुसलमानों के बारे में शी जिनपिंग सरकार से चर्चा भी कर सके। लेकिन, जब बात ड्रैगन की आती है तो मलेशिया और तुर्की जैसे मुसलमानों के तुर्रम खांओं की भी हालत पतली हो जाती है। इस मुद्दे पर मलेशिया कुछ भी बोलने से परहेज करता है तो हाल के वर्षों में मुसलमानों का ठेकेदार बन रहे तुर्की ने भी अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के आगे हथियार डाल दिए हैं। कई वर्षों से तुर्की में करीब 50,000 उइगर शरणार्थी पहुंचे थे। स्टॉकहोम सेंटर फॉर फ्रीडम के मुताबिक पहले भले ही उइगर मुसलमानों के लिए तुर्की सुरक्षित पनाहगार रहा हो, लेकिन अब नहीं है। जानकारी तो यहां तक है कि उसने गोपनीय तौर पर उइगर शरणार्थियों को ताजिकिस्तान के रास्ते वापस चीन
भेजना भी शुरू कर दिया है।

1.3 ट्रिलियन डॉलर लगाकर ड्रैगन ने कर दी बोलती बंद

1.3 ट्रिलियन डॉलर लगाकर ड्रैगन ने कर दी बोलती बंद

सवाल है कि दुनियाभर के मुसलमानों के ठेकेदार बनने वाले मुस्लिम देशों ने ड्रैगन के सामने घुटने क्यों टेक रखे हैं। इसकी वजह ये हो सकती है कि चीन ने पिछले 15 वर्षों और मौजूदा और भविष्य के लिए जो इन देशों के साथ करार कर रखे हैं, उसके हिसाब से उसने इन मुस्लिम देशों में करीब 1,300 अरब डॉलर का या तो निवेश कर रखा है या कर्ज के रूप में दिया हुआ है। अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट एंड द हेरिटेज फाउंडेशन के आंकड़ों के मुताबिक 2005 से लेकर 2020 के बीच में चीन ने पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब, यूएई, कजाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, अल्जीरिया, मिस्र और तुर्की में कुल 421.59 अरब डॉलर के निवेश कर रखे हैं या करार किया हुआ है। जबकि, ईरान, पाकिस्तान, मलेशिया, सऊदी अरब, बांग्लादेश और मिस्र के साथ उसने मौजूदा समय में भी और भविष्य के लिए भी अरबों डॉलर की डील की हुई है। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 1.3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का है। इसलिए चीन में रह रहे मुसलमानों के हित में आवाज उठाने के मामले में ये तमाम मुस्लिम देश चीन के 'बंधक' के रोल में आ चुके हैं और उनकी बोलती बंद हो चुकी है।

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