China Marine Corps: द्वीपों पर कब्जा करने वाली स्पेशल सेना, एक लाख सैनिकों वाले चीनी मरीन कॉर्प्स में कितना दम
China Marine Corps: पीएलए मरीन कॉर्प्स (PLANMC) शी जिनपिंग के चीन-केंद्रित वर्ल्ड ऑर्डर की स्थापना के सपने को हकीकत में बदलने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दल करार दिया गया है, क्योंकि चीन का दावा है, कि चायनीज मरीन कॉर्प्स, दुनिया की सबसे मजबूत सेना बन गई है।
चीन का दावा रहा है, कि वह एक विश्व स्तरीय मरीन कोर विकसित कर रहा है, जो किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम होगा और सभी आयामों में पूर्ण स्पेक्ट्रम मल्टीडोमेन ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एक ताकतवर फोर्स होगी।

चीन की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की कामयाबी या नाकामी, काफी हद तक इस ताकत के विकास पर निर्भर करती है। चीन ने लगातार अपने PLANMC फोर्स का विस्तार किया है और ऐसी रिपोर्ट है, कि अलग अलग देशों के द्वीपों पर कब्जा करने के लिए इस फोर्स को बनाया गया है।
हम अपनी इस स्टोरी में आपको बताने वाले हैं, कि चायनीज मरीन कॉर्प्स क्या है और इसे बनाने के पीछे क्या मकसद है?
चायनीज मरीन कॉर्प्स को जानिए
चीन की पहली समुद्री ब्रिगेड की स्थापना 5 मई 1980 को हुई थी। बाद में 1998 में PLAA के 164वें डिवीजन को दूसरी समुद्री ब्रिगेड में पुनर्गठित किया गया, जिससे PLA नौसेना के हिस्से के रूप में दक्षिण सागर बेड़े के तहत दो ब्रिगेड और लगभग 10,000 कर्मियों के साथ PLANMC का गठन किया गया।
शुरुआती चरणों में, PLANMC का प्राथमिक मिशन दक्षिण चीन सागर में द्वीपों और चट्टानों तक ही सीमित था। उन दिनों, PLANMC मुख्य रूप से खाली पड़े द्वीपों पर कब्ज़ा करके या कब्ज़े वाले द्वीपों पर हमला करके और कब्ज़ा करके दक्षिण चीन सागर पर चीनी नियंत्रण स्थापित करने और उसका विस्तार करने का काम करती थी। लेकिन, उसके बाद, इन द्वीपों को उन देशों से बचाने के लिए नौसैनिकों का इस्तेमाल किया गया, जिनके साथ चीन का दक्षिण चीन सागर में विवाद चल रहा था, जैसे फिलीपींस, इंडोनेशिया, ब्रूनई।
शी जिनपिंग के शासनकाल में ही, अप्रैल 2017 में, PLA ने मरीन कॉर्प्स का विस्तार किया, जिससे चार अतिरिक्त ब्रिगेडों के साथ इसकी ताकत मूल ब्रिगेड से बढ़कर छह हो गई। इन नई ब्रिगेडों को पीएलएए के तटीय रक्षा बल, मोटर चालित पैदल सेना और कुछ अन्य बलों से ट्रांसफर किया था।
इसके अलावा, एक स्पेशल ऑपरेशंस ब्रिगेड का भी गठन किया गया। यह PLAN की मौजूदा विशेष बल इकाई जियाओलोंग कमांडो यूनिट पर आधारित था। परिवहन हेलीकाप्टरों का संचालन करने वाली एक एविएशन ब्रिगेड को भी बल में ट्रांसफर कर दिया गया। जिससे मरीन कॉर्प्स में सैनिकों की संख्या 40 हजार तक पहुंच गई और कुल आठ ब्रिगेड बन गये।
चीन की योजना मरीन कॉर्प्स में सैनिकों की संख्या बढ़ाकर एक लाख तक करने की है। आपको बता दें, कि चीन की नेवी, जिसे PLAN कहा जाता है, उसमें शामिल पांच शाखाओं में - सतह बल, पनडुब्बी बल, नौसेना वायु सेना, तटीय रक्षा बल और समुद्री कोर हैं।

चायनीज मरीन कॉर्प्स को क्यों बनाया गया?
चायनीज मरीन कॉर्प्स, यानि PLANMC को रणनीतिक युद्धाभ्यास संचालन के लिए पहली पसंद बल के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। इससे विदेशी और क्षेत्र से बाहर की आकस्मिक घटनाओं या फिर युद्ध की स्थिति में फौरन हमला करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसके युद्धभ्यास में, हर तरह के हथियार शामिल किए जाते हैं, ताकि इसके सैनिक, जरूरत पड़ने पर हर तरह के हथियार चला सकें।
इसे PLASF और PLARF की संयुक्त सटीक जानकारी और गोलाबारी आक्रामक क्षमताओं से भी लैस किया जाएगा। PLANMC फोर्स से उम्मीद की जाती है, कि वो दुश्मन को उनके इलाकों को मात दे और प्रतिद्वंद्वी की डिफेंस सिस्टम को नाकाम करे, ताकि दुश्मन का क्षेत्र कमजोर है और फिर दूसरी बलें वहां पहुंच सके। ऐसा लगता है, कि इसका मकसद दुश्मन को पंगु बनाना है, ताकि पीएलए कम से कम नुकसान पर अपने मकसद को हासिल कर सके।
रोल और टास्क क्या हैं?
PLANMC की स्थापना का प्रमुख मकसद उन क्षेत्रों को फिर से हासिल करना है, जिसे चीन अपना 'खोया हुआ क्षेत्र' मानता है, जैसे ताइवान, जापान नियंत्रित सेनकाकू द्वीप और स्प्रैटली द्वीप।
जैसे ताइवान में, अगर जरूरत पड़ी और मौका मिला तो चीन हमला करने से भी नहीं हिचकेगा। यह पहले ही प्रदर्शित हो चुका है, कि जब चीन ने दक्षिण चीन सागर पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए चट्टानों पर कब्ज़ा कर लिया और उन्हें कृत्रिम द्वीपों में बदल दिया, तो फिर चीन का मकसद क्या है, ये साफ हो चुका है।

PLANMC का अगला मकसद, दक्षिण चीन सागर में उन द्वीपों की रक्षा करना होगा, जिन पर उसने कब्ज़ा कर लिया है और उन पर कब्ज़ा करना है, जिन पर चीन, दक्षिण चीन सागर में अपना दावा करता है। इसके नए मानक मानचित्र, जिसमें नई 'टेन डैश' लाइन के अंदर पूरे दक्षिण चीन सागर को चीनी बताया गया है, वो बताता है, कि चीनी मरीन कॉर्प्स का टास्क क्या है।
आपको बता दें, कि चीन पहले ही 2012 में फिलीपींस से स्कारबोरो शोल का नियंत्रण छीन छुका है और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर चुका है। 2014 के बाद से, चीन ने कृत्रिम द्वीपों के निर्माण और सैन्यीकरण के लिए दक्षिण चीन सागर में सात चट्टानों और द्वीपों में ड्रेजिंग का काम किया है। इसने अमेरिकी सेनाओं को भी रोक रखा है।
फिलीपींस के साथ चल रही तनातनी से संकेत मिलता है, कि चीन आने वाले समय में अन्य देशों द्वारा नियंत्रित द्वीपों और चट्टानों पर नियंत्रण हासिल करने का इरादा रखता है। इसमें ताइवान-नियंत्रित द्वीप इतु अबा और प्रतास द्वीप समूह शामिल हैं।
PLA दुनिया भर में चीन के "विदेशी हितों" की रक्षा के लिए अपनी अभियान क्षमता को मजबूत कर रहा है। उस उद्देश्य के लिए, मुख्य भूमि चीन से दूर के क्षेत्रों में अभियान संचालन और मिशनों को अंजाम देने के लिए PLANMC को प्रशिक्षित और संगठित किया जा रहा है। लिहाजा, भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इसका आखिरी मकसद भारत की ही तरफ मुड़ना होगा।
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