चीन के नए मैप में रूसी इलाके भी शामिल, भारत के उलट रूस ने नहीं किया विरोध, क्या इतने कमजोर हो गए पुतिन?
चीन ने 28 अगस्त को अपना ऑफिशियल मैप जारी किया था। इस मैप में चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चीन, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर सहित कुछ रूसी क्षेत्रों को अपना बताया था। चीन के सरकारी न्यूज पेपर ने एक्स एप पर इसे पोस्ट भी किया था।
ऐसा कहा जाता है कि यह नक्शा बीजिंग द्वारा एप्रूव्ड था और चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया था। चीन ने यह मैप तब जारी किया है जब पश्चिमी पर्यवेक्षकों ने अनुमान लगाया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।

चीन और रूस ने 2022 की शुरुआत में पुतिन द्वारा यूक्रेन में हजारों सैनिकों को भेजने से कुछ हफ्ते पहले 'नो लिमिट्स' पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया था। हालांकि इसके बाद भी चीनी अधिकारियों ने हमेशा ही सार्वजनिक रूप से युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया है।
इस महीने की शुरुआत में, इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर थिंक टैंक ने लिखा था कि यूक्रेन के संबंध में चीन की तटस्थता का सार्वजनिक रुख बीजिंग और क्रेमलिन के बीच दरार पैदा कर रहा है।
जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी शार स्कूल ऑफ पॉलिसी और सरकारी प्रोफेसर मार्क काट्ज़ ने न्यूजवीक को बताया कि नया चीनी मैप संभवतः रूस-चीन संबंधों में मददगार साबित नहीं होगा।
प्रोफेसर ने कहा कि क्रेमलिन निश्चित तौर पर चीनी मैप पर ध्यान देता रहा है। खासकर ऑफिशियल मानचित्र जो दावा करते हैं कि रूसी क्षेत्र वास्तव में चीन का है।"
उन्होंने आगे कहा कि अगर पुतिन नए मैप को लेकर परेशान हैं भी, तो भी वह चीन से शिकायत करने की स्थिति में नहीं हैं। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस हद दर्जे तक आर्थिक संबंधों को लेकर चीन पर निर्भर हो चुका है।
चीना ने नए 2023 के मैप में बताया है कि अमूर नदी पर बोल्शॉय उस्सुरीस्की द्वीप चीन का हिस्सा है। यह द्वीप व्लादिवोस्तोक शहर के समीप है। चीन पहले भी व्लादिवोस्तोक पर अपना दावा जता चुका है।
चीन यह दावा करता रहा है कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर 1860 से पहले चीन का हिस्सा था। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इस शहर को पहले हैशेनवाई के नाम से जाना जाता था जिसे रूस से एकतरफा संधि के तहत चीन से छीन लिया था।
दोनों देशों के बीच ये विवाद तब तक चला जब तक कि दोनों देश 2008 की संधि में क्षेत्र को विभाजित करने पर सहमत नहीं हो गए।
कॉर्नेल में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर और वाशिंगटन में कॉर्नेल में शिक्षण और सीखने के निदेशक डेविड सिल्बे ने न्यूजवीक को बताया, "चीनी मानचित्रों को अपने अधिकार और शक्ति के दावे के रूप में उपयोग करना पसंद करते हैं।
इसमें सबसे हालिया प्रसिद्ध उदाहरण नौ-डैश लाइन मानचित्र हैं जिसमें उन्होंने दक्षिण चीन सागर में भूमि के बड़े हिस्से पर दावा करते हुए पेश किया है।"
सिल्बे ने कहा कि नया नक्शा 2008 के समझौते का बिल्कुल भी उल्लंघन नहीं करता है, लेकिन यह रूसियों पर एक छोटा सा प्रहार है। यह कुछ ऐसा है जैसे किसी की थाली से भोजन का एक छोटा सा टुकड़ा चुरा लिया गया हो।
वहीं, प्रोफेसर काट्ज ने कहा कि नया चीनी मैप फिर से रूसी जमीन पर जबरदस्ती कोशिश करने जैसा नहीं है, जैसा कि रूस ने यूक्रेन में करने की कोशिश की है। न ही बीजिंग फिलहाल ऐसा कुछ करने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन फिर भी, मॉस्को को चिंतित होना चाहिए कि पिछले समझौते के बावजूद, चीन ऐसी हरकत कर रहा है और भविष्य में चीन का दावा और बड़ा भी हो सकता है।
भले ही रूस ने अभी तक चीन के नए मैप को लेकर कोई भी बयान नहीं दिया है लेकिन भारत और ताइवान ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम इन नए नामों को सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का आतंरिक हिस्सा था, हिस्सा है और रहेगा। इस तरह से नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी।
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत के इलाकों को अपना बताने के चीन के दावे को सिरे से खारिज कर दिया था। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि चीन ने नक्शे में जिन इलाकों को अपना बताया है, वो उनके नहीं हैं। ऐसा करना चीन की पुरानी आदत है।
इसके साथ ही ताइवान ने भी इसका विरोध किया था। ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा था कि चीन का विस्तारवाद ताइवान तक नहीं रुकता। वह पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में अपनी शक्ति का विस्तार कर रहा है।
विदेश मंत्री वू ने कहा कि चीन अपने बंदरगाहों को सुरक्षित कर रहा है ताकि भविष्य में हिंद महासागर में सेना का इस्तेमाल किया जा सके।












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