चीन ने अमेरिकी Warships पर 151 बार बमबारी की, US के परमाणु ठिकाने तक पहुंचे चीनी जासूस
अमेरिका के पर्ल हार्बर में एक चीनी नागरिक को गिरफ्तार भी किया गया, जो कथित पर बीजिंग की तरफ से जासूसी के लिए भेजा गया था।
China bombarded US warships: द वॉर जोन ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि, हाल ही में जारी अमेरिकी नौसेना के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले पांच सालों में संदिग्ध चीनी जासूसों ने 151 बार अमेरिकी युद्धपोतों पर बमबारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध चीनी जासूसों ने अमेरिकी युद्धपोतों पर बमबारी की है। द वॉर जोन ने फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत जो सूचनाएं निकाली हैं, उसके मुताबिक, बिना सील किए गए दस्तावेज दिखाते हैं कि, अमेरिकी बेड़ों को अज्ञात ड्रोन ने काफी ज्यादा परेशान किए हैं और प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की सेना को काफी नुकसान पहुंचाया है।

अमेरिकी वारशिप्स पर ड्रोन हमले
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हांगकांग में अमेरिकी जहाज पर ड्रोन लैंडिंग किया गया, जबकि पर्ल हार्बर में एक चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया गया, जो ड्रोन उड़ा रहा था। वहीं, अमेरिकी परमाणु भंडार के आसपास के क्षेत्र में उड़ान भरने वाले ड्रोन के एक सेट को भी अमेरिका ने पकड़ा है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक,साल 2017 तक चीन ने करीब 35 बार अमेरिकी वॉरशिप्स पर हमले किए। जबकि, अमेरिकी नौसेना ने बाकी के 116 हमलों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी, क्योंकि वो जानकारियां सीक्रेट थीं। वारजोन, जिसने इस तरह की घटनाओं का लंबे समय से दस्तावेजीकरण किया है, उसने चेतावनी दी है, कि ये रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करने के लिए काफी है, कि ड्रोन मुठभेड़ अब आम हो गए हैं और उनमें से कुछ वास्तव में विरोधियों या संभावित विरोधियों द्वारा जासूसी, सर्वेक्षण, या अमेरिकी सेना को परेशान करने के प्रयास हो सकते हैं।

सैन डिएगो में सबसे ज्यादा हमले
नौसेना के रिकॉर्ड में सबसे अधिक संबंधित घटनाओं में यूएसएस पॉल हैमिल्टन शामिल है, जो जुलाई 2019 में सैन डिएगो में तैनात था। रिपोर्ट के अनुसार, 30 और 31 जुलाई को ड्रोन की एक सीरिज ने अमेरिकी जहाज के चालक दल को जहाज पर 'एक सर्चलाइट या फोटोग्राफिक डिवाइस' चमकते हुए विमानों के साथ झुका दिया था। जहाज के कैमरे पहली रात के दौरान ओवरहेड उड़ने वाले ड्रोनों में से एक को पकड़ने में सक्षम थे। इस घटना से ठीक दो हफ्ते पहले डिस्ट्रॉयर-श्रेणी के जहाज को ड्रोन के एक और सेट द्वारा परेशान किया गया था, जो हांगकांग के पास बास स्ट्रेट क्षेत्र में तैनात था। इसके साथ ही हांगकांग से जुड़ी चार और घटनाएं और घटी हैं, जब विध्वंसक श्रेणी के यूएसएस चाफी ने अक्टूबर 2017 में जहाज के ऊपर से उड़ते हुए दो ड्रोन पकड़े थे। नौसेना की रिपोर्ट के अनुसार, एक ड्रोन अमेरिकी जहाज पर गिर गया था, जहां चालक दल ने ड्रोन को पकड़कर नौसेना आपराधिक जांच दल को सौंप दिया था। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है, कि इस ड्रोन का इस्तेमाल क्यों किया गया था।

पर्ल हार्बर में चीनी नागरिक गिरफ्तार
इसके अलावा अमेरिका के पर्ल हार्बर में एक चीनी नागरिक को गिरफ्तार भी किया गया, जो कथित पर बीजिंग की तरफ से जासूसी के लिए भेजा गया था। नौसेना अधिकारियों ने ओहू के हवाई द्वीप पर रेनबो बे मरीना में एक छोटा ड्रोन उड़ाने के लिए उस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। उस 'ड्रोन ऑपरेटर ... ने कहा कि उसने (यूएसएस) एरिज़ोना मेमोरियल का दौरा (आईएनजी) खत्म किया था और अपने नए ड्रोन का परीक्षण करने का फैसला किया। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि घटना में जासूसी के कोई संकेत नहीं थे, लेकिन यह भी पता चला कि 2018 और 2020 के बीच कई चीनी पर्यटकों को नौसेना के प्रतिष्ठानों पर अतिक्रमण करने और उनकी तस्वीरें लेने के लिए गिरफ्तार किया गया था। पर्ल हार्बर पर ऐसी घटनाओं की कम से कम तीन और रिपोर्टें भी दर्ज की गईं, जिनके लिए एफबीआई ने मामला दर्ज किया था।

अमेरिका के परमाणु ठिकाने तक पहुंचा चीन
इसके साथ ही वारजोन की रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीनी जासूस ड्रोन उड़ाते हुए अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में स्थिति बांगोर नेवल बेस तक पहुंच गये थे, जहां अमेरिका ने अपने सबसे ज्यादा शक्तिशाली परमाणु बमों को रखा हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, जनवरी 2017 में जब एक ड्रोन को बेस के चारों ओर उड़ते हुए देखा गया था, तो उस वक्त सर्विस के सदस्य विस्फोटक-हैंडलिंग ऑपरेशन कर रहे थे और फिर उस ड्रोन को पकड़ा गया था। बांगोर में सवार एक गनर ने ड्रोन को नाइट विजन गॉगल्स के साथ देखा था और इस घटना का जिक्र सर्विलांस के तौर पर किया था। यानि, उस ड्रोन के जरिए अमेरिकी नेवल बेस की निगरानी की जा रही थी। वहीं, पास के ही दूसरे नेवल बेस किट्सप में कई अन्य सर्विलांस ड्रोन को पकड़ा गया था, जिनमें से एक के लिए एफबीआई ने रिपोर्ट भी दर्ज की थी। (सभी तस्वीर फाइल)
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