Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग से ठीक पहले चीन ने की नये Moon मिशन की घोषणा, चंद्रमा पर भेजेगा इंसान
Chandrayaan-3: भारत आज अपने ऐतिहासिक मून मिशन चंद्रयान-3 को लॉन्च करने वाला है और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो, आज दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 को भेजेगा। लेकिन, उससे पहले चीन ने अपने नये चंद्रमा मिशन की घोषणा कर दी है। चीन ने कहा है, कि वो साल 2030 में चंद्रमा पर इंसानों को भेजने की योजना पर काम कर रहा है।
चीनी अधिकारियों ने बुधवार को मानवयुक्त चंद्र मिशन के लिए अपनी योजनाओं के बारे में नए विवरणों का खुलासा किया है और अगर चीन अपने मिशन में कामयाब होता है, को अमेरिका के बाद चंद्रमा पर इंसानों को भेजने वाला दूसरा देश बन जाएगा।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी (सीएमएसए) के उप मुख्य अभियंता झांग हैलियन ने बुधवार को वुहान शहर में एक एयरोस्पेस शिखर सम्मेलन में प्रारंभिक योजना का खुलासा किया है।
चीन ने कहा है, कि उसे साल 2030 के पहले इस मिशन के फाइनल होने की उम्मीद है और चीन का ये मिशन, चंद्रमा पर रिसर्च स्टेशन बनाने की परियोजना का एक हिस्सा है। आपको बता दें, कि चीन की कोशिश चंद्रमा पर एक रिसर्च स्टेशन बनाने की है और उसी योजना के तहत, चीन पहले अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की योजना बना रहा है।
चंद्रमा पर इंसानों को भेजेगा चीन
चीन की सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चंद्रमा की सतह पर दो लॉन्च वाहन भेजे जाएंगे, जिसमें लैंडर और मानवयुक्त अंतरिक्ष यान शामिल होगा। डॉकिंग के बाद, अंतरिक्ष यान पर सवार चीनी अंतरिक्ष यात्री लैंडर में प्रवेश करेंगे, जिसका उपयोग चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए किया जाता है।
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रमा पर जाने के बाद अंतरिक्षयात्री नमूनों को एकत्र करेंगे और लैंडर पर जाने से पहले और कक्षा में प्रतीक्षा कर रहे अंतरिक्ष यान के साथ फिर से जुड़ने से पहले "वैज्ञानिक अन्वेषण" करेंगे, जो उन्हें पृथ्वी पर वापस ले जाएगा।
सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, मिशन की तैयारी के लिए, चीनी शोधकर्ता मून सूट, मानवयुक्त चंद्र रोवर्स, मानवयुक्त अंतरिक्ष यान और मून लैंडर सहित सभी आवश्यक उपकरण विकसित करने का काम कर रहे हैं।
हालांकि, सरकारी मीडिया रिपोर्टों में यह नहीं बताया गया है, कि चीन कितने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की योजना बना रहा है।
चंद्र मिशन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए चीन की कोशिशों का लेटेस्ट हिस्सा है और चीन ने पिछले कुछ सालों में अंतरिक्ष में कई सफलताएं हासिल की हैं।
अंतरिक्ष की रेस में पिछड़ा था चीन
चीन काफी देरी के साथ अंतरिक्ष कार्यक्रमों की रेस में शामिल हुआ था और उसने 1970 तक अपना पहला उपग्रह भी कक्षा में नहीं भेजा था, उस समय तक संयुक्त राज्य अमेरिका पहले ही चंद्रमा पर एक अंतरिक्ष यात्री उतार चुका था, लेकिन अब बीजिंग तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बीजिंग ने अंतरिक्ष मिशनों में अरबों डॉलर का निवेश किया है और वो इस साल अपना खुद को स्पेस स्टेशन भी बना चुका है।
2013 में, चीन ने चंद्रमा पर सफलतापूर्वक एक रोवर उतारा था और ऐसा करने वाला वह दुनिया का तीसरा देश बन गया था। उस समय, चीनी नेता शी जिनपिंग ने कहा था, कि "अंतरिक्ष सपना चीन को मजबूत बनाने के सपने का हिस्सा है।"
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। हालांकि, अंतरिक्ष रिसर्च में बीजिंग के निवेश पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक आंकड़े नहीं हैं, लेकिन परामर्श फर्म यूरोकंसल्ट ने अनुमान लगाया है, कि 2019 में यह लगभग 5.8 अरब डॉलर के करीब था।
उस साल, चीन ने चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर एक रोवर भेजा था, जो उसका एक ऐतिहासिक मिशन था। फिर साल 2020 में चीन, चंद्रमा से चट्टान के नमूने सफलतापूर्वक एकत्र करने वाला तीसरा देश बन गया। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपना खुद का तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन भी बनाया है, जिसका काम पिछले साल नवंबर में पूरा हो गया था।












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