F-16, Eurofighter: पाकिस्तान की मदद से फाइटर जेट्स की टेक्नोलॉजी चुरा रहा चीन, ऐसे झोंक रहा आंखों में धूल
F-16, Eurofighter News: जुलाई 2024 में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) वायु सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) ने अपना दूसरा संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसे 'फाल्कन शील्ड' के नाम से जाना जाता है। इस सैन्य अभ्यास ने वाशिंगटन को टेंशन में डाल दिया और चिंता खासकर इस बात को लेकर है, कि चीन कहीं इस फाइटर जेट की खुफिया जानकारियां ना जुटा ले।
हाल ही में, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है, कि चीन शिनजियांग के रेगिस्तान में नकली अमेरिकी विमानों और एयरक्राफ्टर कैरियर पर नकली हमले कर रहा है।

29 मई की तारीख वाली इन तस्वीरों में एक मॉडल एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिकी स्टील्थ लड़ाकू विमानों से मिलते-जुलते जेट विमानों की 20 से ज्यादा तस्वीरें सामने आईं थी। जिसको लेकर सैन्य विशेषज्ञों ने संकेत दिया, कि चीनी पीएलए वायु सेना के पायलट, कथित तौर पर अमेरिकी F-35 और F-22 विमानों की प्रतिकृतियों पर हवाई हमले का अभ्यास कर रहे हैं।
लंदन स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने बताया है, कि "हालांकि मंत्रालय ने सटीक एयर बेस का नाम नहीं बताया, लेकिन सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है, कि शिनजियांग में होटन एयरपोर्ट अभ्यास का स्थान है। इसी साइट पर 2023 में भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।"
यूएई-चीन की सैन्य भागीदारी
IISS के मुताबिक, फाल्कन शील्ड के 2023 और 2024 युद्धाभ्यास में यूएई ने कम से कम छह डसॉल्ट मिराज 2000-9डीएडी/ईएडी ग्राउंड-अटैक एयरक्राफ्ट तैनात किए हैं, जिन्हें एयरबस एमआरटीटी टैंकर/ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट द्वारा सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, 2023 सैन्य अभ्यास के बाद दो बोइंग सी-17ए ग्लोबमास्टर हेवी ट्रांसपोर्ट सैटेलाइट इमेज में थोड़े समय के लिए दिखाई दिए, जिनका उपयोग शायद सहायक उपकरण और कर्मियों के परिवहन के लिए किया गया था।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पश्चिमी देशों की आधुनिक लड़ाकू विमानों की चीनी लड़ाकू विमानों के साथ सैन्य अभ्यास काफी बढ़ गये हैं, लेकिन क्यों?
फाल्कन शील्ड अभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, चीन में इसका स्थान और पश्चिमी विमानों के खिलाफ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) की सीधी भागीदारी है। यह संभवतः पहली बार है, जब चीन ने पश्चिमी लड़ाकू विमानों को शामिल करते हुए प्रत्यक्ष सैन्य अभ्यास किया है। यानि, वो पश्चिमी देशों के फाइटर जेट्स की ताकत को आजमा रहा है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है, कि चीनी और पश्चिमी विमानों ने कभी एक-दूसरे का सामना नहीं किया है। पाकिस्तान द्वारा संचालित चीनी जेट विमानों ने पिछले सैन्य अभ्यासों में पश्चिमी विमानों का सामना किया है।
पाकिस्तान के साथ चीन के सैन्य अभ्यास भी रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। पाकिस्तान, अमेरिकी एफ-16 के साथ-साथ चीनी निर्मित जेट विमानों को भी ऑपरेट करता है, जो पूर्वी और पश्चिमी सैन्य टेक्नोलॉजी के मिश्रण को दर्शाता है। यह सहयोग, पश्चिमी देशों की वायु सेनाओं के साथ तकनीकी अंतर को पाटने के चीन की कोशिशों को दर्शाता है।
वहीं, फाल्कन शील्ड सैन्य अभ्यास से पहले, चीन ने पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था। सितंबर 2023 में, दोनों सहयोगियों ने उत्तर-पश्चिम चीन में शाहीन-एक्स संयुक्त हवाई अभ्यास किया था, जिसमें पाकिस्तान वायु सेना ने अपने जे-10सी और जेएफ-17 लड़ाकू जेट का प्रदर्शन किया था।
जून 2024 में, US एयर फोर्स सेंट्रल कमांड (AFCENT) और पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) ने फाल्कन टैलोन 2024 का आयोजन किया, जो पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पाकिस्तानी F-16 और JF-17 थंडर जेट की तैनाती वाला एक द्विपक्षीय अभ्यास था।
हाल ही में स्पीयर्स ऑफ विक्ट्री में बहरीन, फ्रांस, ग्रीस, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, यूएई, यूके और यूएस के प्रतिभागी शामिल हुए। पाकिस्तान और कतर के बीच द्विपक्षीय आयोजन ज़ेलज़ल सीरीज़ पश्चिमी विमानों को चीनी जेट के साथ प्रशिक्षण लेने की इजाजत देता है। जनवरी 2024 में, पाकिस्तान के नए J-10C लड़ाकू विमान कतर में यूरोफाइटर टाइफून के साथ 'ज़िलज़ल-II' अभ्यास में शामिल हुए, जो J-10C के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण था।
लिहाजा, यह आश्चर्य की बात नहीं है, कि यूरोफाइटर्स के साथ अभ्यास से पाकिस्तान को जो भी जानकारी मिली होगी, उसे उसने तत्काल चीन को भेजा होगा। J-10 PLAAF के साथ-साथ पाकिस्तान वायु सेना के लिए भी अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान बना हुआ है।
पाकिस्तान का चीन से J-10C का खरीदना, भारत के राफेल जेट के लिए एक रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जाता है।

पश्चिमी देशों के एयरक्राफ्ट की टेक्नोलॉजी को चुरा रहा चीन?
IISS के मुताबिक, चीन के पास खुले तौर पर या गुप्त तौर पर पश्चिमी देशों की इन हवाई संपत्तियों की जानकारी जुटाने का बड़ा मौका है। उदाहरण के लिए, अल सैन्य अभ्यास की देखरेख के लिए PLAAF के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग (AEW) विमान का उपयोग किया जा सकता है, जिससे संभावित रूप से मिराज 2000 विमानों का पता लगाने में चीनी AEW रडार की क्षमताओं के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हो सकती है।
संयुक्त अभ्यास की जानकारियों के आधार पर, यह चीनी लड़ाकू रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और रेडियो-फ्रीक्वेंसी मिसाइल सीकर्स की जानकारियां भी चीन हासिल कर सकता है।
चीन एयरबोर्न मिसाइल अकादमी PL-10 (CH-AA-9) इमेजिंग इंफ्रारेड शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें कितनी कारगर हैं, और एयर-टू-एर लड़ाई के दौरान इनका कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, चीन ऐसे युद्धाभ्यासों से इन जानकारियों का भी पता लगा सकता है।
ताइवान को क्यों डर लग रहा है?
फाल्कन शील्ड अभ्यास में मिराज 2000 को शामिल किए जाने से ताइवान के लिए चिंता की स्थिति पैदा हो गई है। चीन, ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और इन अभ्यासों को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा सकता है। यह स्थिति चीन और ताइवान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बढ़ा देती है।
यूएई और चीन के बीच मजबूत होते रिश्ते वाशिंगटन में भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। यूएई द्वारा अपने 5जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हुवावे को चुनने के फैसले ने खास तौर पर लोगों को चौंका दिया है, खास तौर पर तब, जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीक और सुरक्षा मुद्दों पर तनाव चल रहा है।
चीन, पश्चिमी वायु सेनाओं के साथ तकनीकी अंतर को कम करने के लिए सैन्य अभ्यास और गठबंधन का लाभ उठा रहा है। ये कोशिशें, संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौतियां पेश करते हैं, जिन्हें अब तकनीकी रूप से ज्यादा एडवांस चीनी सेना से मुकाबला करना होगा।
फाल्कन शील्ड अभ्यास चीन की अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यास का उपयोग करने की रणनीति का उदाहरण है। यूएई और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ सहयोग करके, चीन पूर्वी और पश्चिमी दोनों सैन्य टेक्नोलॉजी में मूल्यवान जानकारी हासिल कर रहा है।












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