कुछ बड़ा करने वाला है चीन! तिब्बत में परमाणु-जैविक और रासायनिक हमले का एकसाथ युद्धाभ्यास
बीजिंग, 16 दिसंबर: चीन की मिलिट्री (पीएलए) ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उसपार तिब्बत मिलिट्री रीजन में असली परिस्थितियों के लायक बहुत बड़े युद्धाभ्यास को अंजाम दिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस युद्धाभ्यास को परमाणु, जैविक और रासायनिक सभी तरह की जंग के मुताबिक अंजाम दिया गया है। खास बात यह है कि ये खुलासा किसी खुफिया सूत्रों के जरिए नहीं हुआ है बल्कि, पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने खुद अपने आधिकारिक न्यूज पोर्टल पर अपने कारनामों का खुलासा किया है। कुछ दिन पहले अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस तरह के संकेत दिए थे कि चीन कुछ बहुत बड़े खुराफात को अंजाम देने में लगा हुआ है। ऐसे समय में जब पिछले करीब डेढ़ साल से भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी के कई बिंदुओं पर अभी भी टकराव की स्थिति बनी हुई है, चीन का तिब्बत में इतना बड़ा वास्तविक युद्धाभ्यास और वह भी परमाण, जैविक और रासायनिक जंग लायक परिस्थितियों के अनुसार, उसकी शैतानी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

कुछ बड़ा करने वाला है चीन!
चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के आधिकारिक न्यूज पोर्टल पर छपी एक रिपोर्ट से पता चला है कि नवंबर के आखिर में उसकी मिलिट्री ने तिब्बत मिलिट्री रीजन (टीएमआर) में बहुत बड़ा और वास्तविक युद्धाभ्यास किया है। तिब्बत मिलिट्री रीजन चीन के पांच सैन्य कमांड में सबसे विशाल वेस्टर्न थियेटर कमांड के जिम्मे आता है, जिसपर भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश तक के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) भी आते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब पूर्वी लद्दाख में एलएसी के कुछ बिंदुओं को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध की स्थिति अभी तक खत्म नहीं हुई है और चीन लगातार अपने पैंतरे बदलता जा रहा है। जो आर्टिकल छपी है, उसके मुताबिक, 'नवंबर के अंत में, तिब्बत मिलिट्री रीजन के सिंथेटिक ब्रिगेड का बर्फ से ढके पठार पर एक वास्तविक युद्धाभ्यास शुरू हुआ।' इसकी हेडलाइन कुछ इस प्रकार से थी- 'तिब्बत मिलिट्री रीजन की एक सिंथेटिक ब्रिगेड ने एक पूरे दिन और रात में मोबाइल मल्टी-आर्म कोऑर्डिनेटेड वास्तविक युद्धाभ्यास में भाग लिया।'

परमाणु-जैविक और रासायनिक हमले का एकसाथ युद्धाभ्यास
यह आर्टिकल सिर्फ चाइनीज में छपा है, जिसमें युद्धाभ्यास के समय के माहौल, कमांड, विभिन्न विंग की भूमिका और इसमें हिस्सा लेने वाले सैनिकों के बारे में बताया गया है। इस आर्टिकल में जगह और युद्धाभ्यास को पूरा करने में लगे समय के बारे में कुछ भी खास नहीं बताया गया है। मोटे तौर पर जो अनुवाद किया गया है, उसके मुताबिक 'रॉकेट लॉन्च किए जाने और आर्मर्ड असॉल्ट ग्रुप को तैनात किए जाने के बाद, टारगेट "बाधा" पर विस्फोटक स्थापित करने के लिए सेना के इंजीनियरों को बुलाया गया। इसके बाद, कमांडिंग ऑफिसर की ओर से "परमाणु, जैविक और रासायनिक हमले" की चेतावनी दी गई। एक परमाणु, जैविक और रासायनिक हमले का सामना करना पड़ा! तुरंत ही एक गाइडेंस कमांड आया। तीसरी बटालियन के कमांडर ली क्वांगफेंग ने तुरंत गैस मास्क लगाया, जल्दी से प्वाइजन जोन से होकर गुजरे और फिर कमांड पोस्ट को हालात की सूचनाी दी, और केमिकल डिफेंस से मदद मांगी।'

चीन का 'दुश्मन' कौन ?
रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्धाभ्यास को पूरी तरह से 'दुश्मन' की परिस्थितियों पर फोकस रखा गया था। जिसमें दिन और रात के समय लड़ाई, मल्टी-आर्म्स कोऑर्डिनेशन और बहुत ही जटिल माहौल में उनकी मारक क्षमता को कम किया गया। रिपोर्ट में युद्धाभ्यास की तस्वीरें शामिल की गई हैं, जिनमें सैनिक गैस मास्क पहने हुए थे और जिसमें एक प्वाइजन जोन में लड़ाई के दृश्य को दिखाया गया है।

अमेरिका भी चीन के मंसूबे पर कर चुका है आगाह
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा विभाग ने नवंबर में यह कहा भी था कि चीन रासायनिक और जैविक हथियारों के दोहरे इस्तेमाल की तकनीक पर रिसर्च को आजमा रहा है। यह भारत-चीन सीमा पर जंग के लिए तैयार रहने के लिए चीन की मिलिट्री के निरंतर कोशिशों का एक हिस्सा है, जहां जानकारी के मुताबिक उसने बड़ी तादाद में सैनिकों और अत्याधुनिक हथियारों के भारी जखीरे तैनात कर रखे हैं। चीन की मीडिया की रिपोर्ट है कि उसने तिब्बत और शिंजियांग के ऊंचाई वाले इलाकों में सीमावर्ती सैनिकों के लिए बेहतर सुविधाएं और रहने लायक व्यवस्था कर ली है, जिसके हिसाब से वह लंबी लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर चुका है। दूसरी ओर भारत के साथ पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर कई बिंदुओं पर अभी भी उसके साथ बातचीत से कोई हल नहीं निकला है। (तस्वीरें- फाइल)
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