US के साथ मिलकर कनाडा ने की है खालिस्तानी आतंकी की हत्या की जांच, फिर बाइडेन प्रशासन से क्यों नहीं मिला साथ?
India-Canada News: समाचार एजेंसी रायटर्स ने कनाडा सरकार के सूत्रों के हवाले से खबर दी है, कि कनाडा सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने मंगलवार को कहा है, कि कनाडा ने इस खुफिया जानकारी पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ 'बहुत निकटता से' काम किया है, कि इस साल की शुरुआत में ब्रिटिश कोलंबिया में एक सिख व्यक्ति की हत्या में, भारतीय एजेंट संभावित रूप से शामिल थे।
प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को घोषणा की है, कि घरेलू खुफिया एजेंसियां जून में ब्रिटिश कोलंबिया में 45 वर्षीय हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या के लिए, नई दिल्ली के एजेंटों को जिम्मेदार ठहराने वाले विश्वसनीय आरोपों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

कनाडा सरकार के सूत्रों ने क्या कहा?
कनाडा सरकार के सूत्र ने कहा, कि "हम अमेरिका के साथ बहुत करीब से काम कर रहे हैं, जिसमें कल सार्वजनिक खुलासा भी शामिल है।" जानकारी की संवेदनशीलता के कारण नाम नहीं बताने वाले अधिकारी ने कहा, कनाडा के पास मौजूद सबूत "उचित समय पर" शेयर किए जाएंगे।
कूटनीतिक तनाव पैदा करने वाले इस मुद्दे का असर व्यापार पर भी पड़ा है। कनाडा और भारत ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी है, और कनाडा ने अक्टूबर के लिए योजनाबद्ध व्यापार मिशन को स्थगित कर दिया है।
अमेरिका का क्यों नहीं मिला है साथ?
हालांकि, कनाडाई सूत्र ने कहा है, कि कनाडा ने अमेरिका के साथ मिलकर जांच को आगे बढ़ाया है, लेकिन अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका की तरफ से जो प्रतिक्रिया दी गई है, वो कनाडा के लिए काफी ठंडा है।
अमेरिका इंटरप्राइजेज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकर रूबिन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है, कि "मैंने जस्टिन ट्रूडो के आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं देखा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, अपनी चुप्पी के माध्यम से यह दर्शा रहा है, कि वह ओटावा के साथ समान पृष्ठ पर नहीं है।"
उन्होंने कहा, कि "मुझे इस बात का डर है, कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस मामले पर शायद अकेले आगे बढ़ रहे हैं और वो शायद एक कनाडा की अंदरूनी राजनीति के लिए एक लोकप्रिय कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि जब 2020 में कनाडा में एक महिला बलूच एक्टिविस्ट की हत्या की गई थी, तो वो मुद्दा कनाडा के प्रधानमंत्री दफ्तर तक भी नहीं पहुंचा था। एक प्रेस रिलीज तक जारी नहीं किया गया, लिहाजा मुझे लगता है, कि वो एक खतरनाक कदम उठा रहे हैं।"
वहीं, स्थिति से परिचित एक दूसरे कनाडाई सूत्र ने कहा कि व्यापार वार्ता में रुकावट और व्यापार मिशन में देरी दोनों कनाडाई की हत्या से जुड़ी चिंताओं के कारण थे।
दूसरी तरफ, कनाडा की सरकार ने अपने देश के नागरिकों के लिए एक एडवायजरी जारी की है। जिसमें कहा गया है, कि भारत की यात्रा के दौरान वह जम्मू कश्मीर ना जाएं। जिसके बाद एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जस्टिन ट्रूडो ने अब भारत के साथ कश्मीर कार्ड खेलना शुरू किया है, क्योंकि ट्रूडो इससे भारत को असहज करना चाहते हैं।
एडवाइजरी में कनाडा सरकार की तरफ से नागरिकों को सलाह दी गई है, कि वह उन क्षेत्रों जाने से बचें क्योंकि यहां पर आतंकवाद, उग्रवाद, अशांति और अपहरण का खतरा है। हालांकि एडवायजरी में लद्दाख को लेकर ऐसा कुछ नहीं कहा गया है।












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