भारतीय अधिकारियों की जासूसी कर कनाडा ने जुटाई जानकारियां.. जस्टिन ट्रूडो ने किया वियना कन्वेंशन का उल्लंघन?
Canada Surveillance Indian Officials: कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा, कि खालिस्तानी चरमपंथी नेता की हत्या में भारत सरकार पर शामिल होने का सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने का निर्णय "हल्के ढंग से" नहीं लिया गया था।
हालांकि, भारत ने जस्टिन ट्रूडो के आरोपों को "निरर्थक", "बेतुका" और "प्रेरित" कहकर खारिज कर दिया है और कहा है, कि वे "खालिस्तानी आतंकवादियों और चरमपंथियों से ध्यान हटाना चाहते हैं, जिन्हें कनाडा में आश्रय प्रदान किया गया है।"
इस बीच, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है, कि ट्रूडो के आरोप कनाडा में भारतीय राजनयिकों की सर्विलांस पर आधारित हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अन्य विश्व नेताओं ने इससे पहले जी20 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ कनाडा की धरती पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा की चिंताओं को उठाया था।

क्या भारतीय अधिकारियों का किया गया सर्विलांस?
कनाडाई मीडिया हाउस सीबीसी न्यूज ने बताया है, कि उनकी सरकार ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की "महीने तक चली लंबी जांच" में "मानवीय और कम्युनिकेशन संबंधी खुफिया जानकारी" एकत्र की थी।
कनाडाई अखबार ने अज्ञात कनाडाई सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में कहा है, कि खुफिया जानकारी में कनाडा में मौजूद भारतीय राजनयिकों सहित भारतीय अधिकारियों से जुड़े संचार शामिल हैं। जिसका मतलब ये है, कि कनाडा ने भारतीय राजनयिकों की निजता का उल्लंघन किया है।
सीबीसी न्यूज ने कहा है, कि खुफिया जानकारी सिर्फ कनाडा से नहीं आई है। बल्कि, 'फाइव आइज़' देश, जिसमें कनाडा के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड शामिल हैं, उनमें से किसी एक देश ने कनाडा के साथ खुफिया जानकारियां साक्षा की हैं।
हालांकि, वो कौन देश है, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
इसके अलावा, इन बातों का भी खुलासा नहीं किया गया है, कि किस तरह के कम्युनिकेशन जुटाए गये हैं, किस तरह से जुटाए गये हैं, उस कम्युनिकेशन में क्या है, उन्हें कैसे हासिल किया गया... इन बातों का जिक्र नहीं किया गया है।
कनाडा में निज्जर की हत्या की अभी भी जांच चल रही है। कनाडा के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत, बॉब रे ने संवाददाताओं से कहा, कि ये जांच के "बहुत शुरुआती दिन" के हैं और जब तथ्य सामने आएंगे, तो उन्हें "न्याय की खोज के दौरान सामने लाया जाएगा।"
लेकिन, सवाल उठ रहे हैं, कि क्या भारतीय अधिकारियों की जासूसी करना, उन्हें ट्रैक करना, उनका सर्विलांस करना कानूनी तौर पर जायज है? क्या ऐसा करते हुए कनाडा ने विएना समझौते का उल्लंघन तो नहीं किया है?
कनाडा ने किया विएना कन्वेंशन का उल्लंघन?
कनाडाई मीडिया का कहना है, कि कनाडाई सरकार के पास सबूत के तौर पर भारतीय अधिकारियों के कम्युनिकेशंस हैं, तो फिर सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या ये वियना कन्वेंशन का उल्लंघन है?
भारत के पूर्व डिप्लोमेट जेके त्रिपाठी ने वन इंडिया हिन्दी से बात करते हुए साफ शब्दों में कहा, कि "अगर कनाडा ने भारतीय डिप्लोमेट्स की जासूसी की है, तो ये स्पष्ट शब्दों में वियना समझौते का उल्लंघन है।"
उन्होंने कहा, कि "ऐसा मामला होने पर सवाल पूछा जाएगा। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया, कि भारत, कनाडा को पाकिस्तान की तरह डील करने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा, कि "कनाडा का मामला पूरी तरह से डिप्लोमेटिक तरीके से ही सुलझाया जाएगा।"
वहीं, इंटरनेशनल रिलेशन एंड इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन (IIPA) के फैकल्टी डॉ. मनन द्विवेदी का कहना है, कि "अगर कनाडा ने भारतीय डिप्लोमेट्स का सर्विलांस किया है, जिसका मतलब एक तरफ से जासूसी करना है, तो ये वियना कन्वेंशन का साफ तौर पर उल्लंघन है।"
उन्होंने कहा, कि "आप डिप्लोमेट्स का फोन टैप नहीं कर सकते हैं, ये स्वतंत्रता उसे हासिल होती है।"
डॉ. मनन द्विवेदी का कहना है, कि "भारत को डिप्लोमेटिक स्तर पर इस तनाव को संबोधित करना चाहिए, क्योंकि भारत भी पश्चिमी से पंगा लेने की स्थिति में नहीं है, इसके अलावा, अमेरिका भी भारत जैसे साथी को खोने के हालात में नहीं है, लिहाजा भारत और कनाडा, जिनमें सालों से दोस्ती रही है, उन्हें डिप्लोमेसी के जरिए ही इस स्थिति को सुलझाना चाहिए।
कई और एक्सपर्ट्स का मानना है, कि हो सकता है, कि कनाडा सिर्फ इसलिए सबूतों को सार्वजनिक नहीं कर रहा है, क्योंकि वो सबूत भारतीय डिप्लोमेट्स के फोन टैपिंग या फिर उनकी जासूसी से जुटाए गये होंगे, और ऐसी स्थिति में भारत कनाडा पर वियना संधि का उल्लंघन का आरोप लगा सकता है और इस स्थिति में दोनों देशों के संबंध पूरी तरह से टूट सकते हैं।












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