कनाडा के पास सबूत के तौर पर हैं भारतीय अधिकारियों के कम्युनिकेशन... कनाडाई अखबार का दावा, कितना सच?

Canada India Conflict: पश्चिमी देश प्रोपेगेंडा चलाने में माहिर रहे हैं और पश्चिमी देशों के कथित फ्री प्रेस, दुनियाभर के देशों को बदनाम करने के लिए कुख्यात रहे हैं। इस वक्त जब कनाडा और भारत के बीच खालिस्तानियों को लेकर काफी ज्यादा तनाव है, उस वक्त कनाडाई अखबर सीबीसी न्यूज ने कथित सूत्रों के हवाले से दावा किया है, कि कनाडाई सरकार के पास सबूत के तौर पर भारतीय अधिकारियों के कम्युनिकेश हैं।

कथित सूत्रों के हवाले से सीबीसी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि कनाडाई सरकार ने एक "सिख कार्यकर्ता" की मौत की महीनों तक चली जांच में इंसानी स्तर पर और सिग्नल, दोनों तरह की खुफिया जानकारी एकत्र की है, जिसके बाद भारत के साथ संबंध खराब हो गए हैं।

Canada communications evidence against india

कनाडा के पास क्या हैं सबूत?

अखबार के मुताबिक, कनाडाई सरकार के सूत्रों का कहना है, कि उस खुफिया जानकारी में कनाडा में मौजूद भारतीय राजनयिकों सहित स्वयं भारतीय अधिकारियों से जुड़े कम्युनिकेश लिंक शामिल हैं।

अखबार ने लिखा है, कि "ख़ुफ़िया जानकारी सिर्फ कनाडा से नहीं आई है, बल्कि कुछ फ़ाइव आइज़ ख़ुफ़िया गठबंधन में एक अनाम सहयोगी ने भी जानकारियां प्रदान की हैं।"

आपको बता दें, कि फाइज आइज़ में कनाडा के अवाला अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड हैं, जो आपस में इंटेलिजेंस जानकारियां साझा करते हैं।

लेकिन,सवाल ये उठ रहे हैं, कि जब कनाडा के पास इतने ही पुख्ता सबूत हैं, तो फिर वो उन सब सबूतो को जस्टिन ट्रूडो दुनिया के सामने क्यों नहीं रख रहे हैं?

ये प्रोपेगेंडा इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी मीडिया ने रूस के खिलाफ प्रोपेगेंडा भरी खबरों को लेकर सारी रिकॉर्ड तोड़ चुका है। यहां तक की, कई बड़े अखबारों ने पुतिन को कैंसर बीमारी और उनकी मौत तक होने की घोषणा कर दी है।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बार फिर से भारत से खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की मौत को लेकर भारत से सहयोग मांगा है।

आपको बता दें, कि हरदीप सिंह निज्जर की इस साल 18 जून को सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और कथित तौर पर कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा ने उसे चेतावनी दी थी, कि उसकी जान को खतरा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सलाहकार जोडी थॉमस ने अगस्त के मध्य में चार दिनों के लिए और इस महीने पांच दिनों के लिए भारत की यात्रा की थी।

वह अंतिम यात्रा प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो और भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक तनावपूर्ण बैठक के साथ ओवरलैप हुई।

भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश

अखबार के मुताबिक, कनाडाई सूत्रों का कहना है कि, जब बंद दरवाजों के पीछे दबाव डाला गया, तो किसी भी भारतीय अधिकारी ने इस मामले के मूल में आरोपों से इनकार नहीं किया, कि कनाडा की धरती पर एक कनाडाई नागरिक की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता का सुझाव देने के लिए सबूत हैं।

ट्रूडो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के बाद गुरुवार को न्यूयॉर्क में कहा, "मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं, कि इन आरोपों को हाउस ऑफ कॉमन्स के पटल पर साझा करने का फैसला हल्के में नहीं लिया गया है।"

उन्होंने कहा, कि "यह अत्यंत गंभीरता से किया गया था।"

कनाडाई सरकार ने अपनी तरफ से साक्ष्य जारी नहीं किए हैं और सुझाव दिया है कि यह अंततः कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आ सकता है।

भारत का क्या कहना है?

जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद भारत और कनाडा के संबंध खराब हो गये हैं और भारत सरकार, निज्जर सहित सिख अलगाववादियों और आतंकवादियों को पनाह देने के लिए कनाडा पर नाराज है।

बढ़ते झगड़े के परिणामस्वरूप पहले ही कनाडा और भारत दोनों से राजनयिकों को निष्कासित कर चुके हैं और गुरुवार को यह तनाव और तब बढ़ गया, जब भारत ने कनाडा में विजिटर वीजा की प्रक्रिया बंद कर दी।

ओटावा में सरकारी सूत्रों ने कहा, कि कनाडा जवाबी कार्रवाई कर रहा है लेकिन उसने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को उस सवाल को टाल दिया था।

वहीं, खुफिया रिपोर्टों के बारे में पूछे जाने पर, उप प्रधान मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने कहा, कि वह जांच और अपने फाइव आईज भागीदारों के प्रति कनाडा के दायित्वों को जोखिम में डाले बिना, टिप्पणी नहीं कर सकती हैं।

उन्होंने सीबीसी न्यूज नेटवर्क के पावर एंड पॉलिटिक्स होस्ट डेविड कोचरन से कहा, कि "यह साझेदारी काफी हद तक उन पर निर्भर करती है... खुफिया बातचीत को विश्वास में लिया जाता है।"

यह पूछे जाने पर, कि क्या ओटावा भारतीय विजिटर्स के लिए वीजा प्रक्रिया रोककर जवाबी कार्रवाई के बारे में सोच रहा है, फ्रीलैंड ने कहा कि "सरकार हत्यारों को न्याय के दायरे में लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।"

उन्होंने कहा, "यह जियो-पॉलिटिक्स के बारे में नहीं है। यह कनाडा के बारे में है, कनाडा में कनाडाई लोगों की सुरक्षा के बारे में है। यह कानून के शासन के बारे में है।"

इस तरह की कार्रवाइयों' पर सहयोगियों को कोई छूट नही- अमेरिका

कनाडा की ये कहानी वाशिंगटन सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंज उठी है। व्हाइट हाउस की दैनिक ब्रीफिंग के दौरान इस बारे में कई सवाल पूछे गए हैं।

अमेरिकी सरकार ने इस बात की पुष्टि या खंडन नहीं किया है, कि यह फाइव आईज़ सहयोगी था जो कुछ सिग्नल खुफिया जानकारी प्रदान कर रहा था।

लेकिन अमेरिकी सरकार के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक ने पुष्टि की है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका इस मुद्दे पर कनाडा के साथ लगातार संपर्क में है। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने खुलासा किया है, कि अमेरिका ने इस मामले पर भारत सरकार के उच्चतम स्तर के साथ भी चर्चा की है।

उन्होंने कहा, कि अमेरिका बेहद चिंतित है और चाहता है कि जांच जारी रहे और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा, कि इस मामले में अमेरिका की रुचि केवल इसलिए खत्म नहीं होगी, क्योंकि इसमें भारत, एक शक्तिशाली लोकतंत्र शामिल है, जिसके साथ वह घनिष्ठ संबंधों की इच्छा रखता है।

सुलिवन ने कहा, "यह कुछ ऐसा है जिसे हम गंभीरता से लेते हैं। यह कुछ ऐसा है, जिस पर हम काम करना जारी रखेंगे। और हम किसी देश की परवाह किए बिना ऐसा करेंगे।"

उन्होंने कहा, कि "इस तरह के कार्यों के लिए आपको कोई विशेष छूट नहीं मिलती है। देश की परवाह किए बिना, हम खड़े होंगे और अपने बुनियादी सिद्धांतों की रक्षा करेंगे।"

उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को भी आक्रामक तरीके से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने इस मामले पर कनाडा का बचाव करने से इनकार कर दिया है।

उन्होंने कहा, "मैंने प्रेस में इस मुद्दे पर अमेरिका और कनाडा के बीच दरार पैदा करने की कोशिशों के कुछ प्रयास देखे हैं। मैं इस बात को दृढ़ता से खारिज करता हूं, कि अमेरिका और कनाडा के बीच कोई दरार है।"

फाइनेंशियल टाइम्स ने गुरुवार देर रात रिपोर्ट दी थी, कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अन्य फाइव आईज़ सदस्यों ने हालिया जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान सीधे मोदी के साथ हत्या का मुद्दा उठाया। रिपोर्ट में चर्चा से परिचित तीन स्रोतों का हवाला दिया गया है।

कनाडाई सरकार ने इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की जागरूकता या भागीदारी पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है।

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