Burkina Faso: बुर्किना फासो में आतंकवादियों ने मचाया कोहराम, दो गांवों में 44 लोगों को उतारा मौत के घाट
बुर्किना फासो एक काफी गरीब देश है और 2015 के बाद से देश में माली के रास्ते अलकायदा और इस्लामिक स्टेट के आतंकी घुसे। आतंकियों का मकसद जिहाद करना है।

Burkina Faso Terrorist Attack: इस्लामिक चरमपंथियों ने एक बार फिर से अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में कोहराम मचाया है और दो गावों पर हमला कर, कम के कम 44 लोगों की हत्या कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय गवर्नर ने शनिवार को कहा, कि नाइजर सीमा के पास उत्तर-पूर्वी बुर्किना फासो के दो गांवों पर हथियारों से लैस आतंकियों ने हमला किया था 24 लोगों की हत्या कर दी।
सहेल क्षेत्र के लेफ्टिनेंट-गवर्नर रोडोलफे सोरघो ने कहा, कि "इस घृणित और बर्बर हमले" में मौत की संख्या में भारी इजाफा हुआ है और कौरकौ और टोंडोबी के गांवों को निशाना बनाया गया है, जिसमें 44 नागरिक मारे गये हैं और कई अन्य घायल हो गये हैं।
सोरघो ने कहा, कि कोराकौ में 31 और तोंडोबी में 13 लोगों की हत्या कर दी गई है।

इस्लामिक स्टेट और अलकायदा की करतूत
उन्होंने कहा, कि आतंकियों के हमले के बाद सेना ने भी कार्रवाई की है और आतंकियों को क्षेत्र से बाहर खदेड़ दिया गया है। उन्होंने कहा, कि हमला करने वाले आतंकियों को भी मार दिया गया है।
लेफ्टिनेंट-गवर्नर रोडोलफे सोरघो ने आश्वासन दिया है, कि क्षेत्र को स्थिर करने की कार्रवाई चल रही है। आपको बता दें, कि साहेल क्षेत्र काफी गरीब इलाका है और इस क्षेत्र में अलकायदा और इस्लामिक स्टेट के आतंकी जिहादी अभियान चला रहे हैं। ये अभियान पिछले सात सालों से चल रहा है और सैकड़ों लोगों की हत्या की जा चुकी है।
कौरकौ के एक निवासी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, कि गुरुवार देर रात बड़ी संख्या में आतंकवादी गांव में घुस आए थे। उसने कहा, कि "गुरुवार को पूरी रात हमने गोलियों की आवाज़ सुनी। शुक्रवार की सुबह हमने देखा कि कई दर्जन लोग मारे गए थे।"
स्थानीय लोगों ने कहा, कि कुछ दिन पहले मवेशी चुराने की कोशिश करने वाले दो जिहादियों को पकड़ा गया था और उसकी पिटाई की गई थी, जिसके जवाब में गांवों पर हमला किया गया है।
पिछले साल सितंबर में बुर्किना फासो में सैन्य तख्तापलट के बाद कैप्टन इब्राहिम ट्रैरे ने सत्ता पर कब्जा जमा लिया है और उनके शासन में आने के बाद ये सबसे घातक आतंकी हमला है। इससे पहले पिछले ही साल फरवरी महीने में बुर्किना फासो के सुदूर उत्तर में देउ पर आतंकी हमला किया गया था, जिसमें 51 सैनिक मारे गए थे।

आतंकी हमलों से कांपता है देश
इन दोनों गांवों पर दो दिनों तक लगातार दो भीषण हमले किए गये हैं। पहली बार हमला सेतेंगा गांव के करीब किया गया, जहां पिछले साल जून के बाद से ही आतंकवादियों ने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं। सेतेंगा गांव में पिछले जून में हुए हमले में 86 नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।
इस सप्ताह बुर्किना फ़ासो के नए सैन्य प्रमुख ने वर्ष की शुरुआत से विद्रोही हमलों की एक श्रृंखला के बाद जिहादियों के खिलाफ "आक्रामक" कदम उठाने की कसम खाई है।
कर्नल सेलेस्टिन सिम्पोरे ने पिछले सप्ताह अपनी नियुक्ति के बाद हैंडओवर समारोह में कहा, कि "पिछले कुछ हफ्तों में चल रहे आक्रमण को तेज किया जाएगा और सशस्त्र समूहों को हथियार डालने के लिए मजबूर किया जाएगा।"
पड़ोसी देश माली से शुरू हुआ था अभियान
इस्लामिक जिहादियों ने 2015 में पड़ोसी देश माली से अपना अभियान शुरू किया था और एक एनजीओ के अनुमान के मुताबिकर, साल 2015 के बाद से अभी तक 10,000 से ज्यादा आम नागरिक, सैनिक और पुलिस के जवान मारे गए हैं, और कम से कम 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।
आधिकारिक आंकड़े कहते हैं, कि जिहादी प्रभावी रूप से देश के लगभग 40% हिस्से को नियंत्रित करते हैं।

सेना के भीतर निराशा के कारण पिछले साल दो बार सैन्य तख्तापलट हुए हैं। सितंबर में सत्ता में आए ट्रैरे ने वापस लड़ने और जीत कर हारे हुए क्षेत्रों को फिर से जीतने की कसम खाई है।
वहीं, जिहादियों ने साल की शुरुआत से लगातार छापेमारी और घात लगाकर हमले किए हैं, जिसमें नागरिकों और सेना की सुरक्षा में काफिलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
बुर्किना की संकटग्रस्त सेना ने हाल ही में विदेशी निर्मित ड्रोन खरीदे हैं, और आतंकियों पर नजर रखनी शुरू की है। लेकिन, सेना के पास संसाधन इतने कम हैं, कि उनके लिए आतंकियों पर जीत हासिल करना काफी मुश्किल है।
देश में भयानक स्तर पर गरीबी है, जिससे सेना के लिए चुनौती और बढ़ती है। फिर भी सेना, आतंकियों के कब्जे से क्षेत्र को छुड़ाने के लिए लड़ाई करती है। इस साल सेना पर हुए कई हमलों के वीडियो भी जारी किए गये हैं।
वहीं, पिछले साल देश की सत्ता पर कब्जा करने वाले सैन्य शासक ट्रोरे ने देश में सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों की गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है।












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