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भीषण आर्थिक मंदी में फंसा ब्रिटेन, 8 सालों की फैमिली इनकम ग्रोथ का सफाया, स्थिति देख डरी दुनिया

ब्रिटिश सरकार की ऑफिस फॉर बजट रिस्पॉन्सिबिलिटी ने कहा है कि, 100 बिलियन पाउंड की सरकारी सहायता के बावजूद वास्तविक घरेलू आय दो वर्षों से लगातार कम हो रही है और यह अप्रैल 2024 तक 7% कम हो जाएगी।

Britain in recession: पिछली सरकारों द्वारा लिए गये खराब आर्थिक फैसलों, यूरोपीय यूनियन से बाहर आना, कोविड संकट और फिर यूक्रेन युद्ध ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को भीषण संकट में धकेल दिया है और अब ये कहा जा सकता है, कि ब्रिटेन आर्थिक मंदी के भंवर में फंसते हुए आर्थिक संकट की तरफ तेजी से बढ़ चला है। ब्रिटिश सरकार के इंडिपेंडेंट फोरकास्टर ने कहा है कि, ब्रिटेन में पिछले आठ सालों में लोगों की जो इनकम बढ़ी थी, उसका पिछले दो सालों से चल रही आर्थिक मंदी में सफाया हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि ब्रिटेन में 'जीवन जीने के खर्च' में जो इजाफा हुआ है, उसकी वजह से लोगों की जो इनकम बढ़ी है, उससे ज्यादा हो गया है।

भारी वित्तीय संकट में फंसा ब्रिटेन

भारी वित्तीय संकट में फंसा ब्रिटेन

ब्रिटिश सरकार की ऑफिस फॉर बजट रिस्पॉन्सिबिलिटी ने कहा है कि, 100 बिलियन पाउंड की सरकारी सहायता के बावजूद वास्तविक घरेलू आय दो वर्षों से लगातार कम हो रही है और यह अप्रैल 2024 तक 7% कम हो जाएगी। अर्थव्यवस्था पहले से ही आर्थिक मंदी की चपेट में है, जो प्रोडक्शन को 2 प्रतिशत तक कम कर देगा और इस संकट में फंसकर पांच लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां चली जाएंगी। ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को लेकर ये अनुमान ब्रिटेन सरकार के वित्तमंत्री जेरेमी हंट ने जारी किए हैं, और उन्होंने आर्थिक मंदी और ऊर्जा संकट के दौरान ब्रिटिश नागरिकों का समर्थन करने का वादा किया है और उन्होंने कहा है कि, सरकार ने साल 2027-28 तक कर्ज को नियंत्रण में लाने का संकल्प लिया है।

ब्रिटेन में टैक्स में भारी इजाफा

ब्रिटेन में टैक्स में भारी इजाफा

आपको बता दें कि, ब्रिटिश सरकार ने अपने इतिहास में पहली बार टैक्स में ऐतिहासिक इजाफा करते हुए सरकारी खर्च में कटौती का ऐलान किया है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब ब्रिटेन सरकार ने अपनी जीडीपी का 37.1 प्रतिशत टैक्स बोझ जनता पर डाल दिया है और एक कार्यक्रम में बोलते हुए ब्रिटिश वित्तमंत्री ने कहा है कि, सरकार का ये फैसला "स्थिरता, विकास और सार्वजनिक सेवाओं" को प्राथमिकता देने के लिए डिजाइन किया गया था। आपको बता दें कि, ब्रिटेन पिछले कुछ महीनों से गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रहा था और बोरिस जॉनसन की जगह प्रधानमंत्री बनी लिज ट्रस ने टैक्स में कटौती कर दी थी, जिससे अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा और अब प्रधानमंत्री बने ऋषि सुनक ने आने वाले वक्त में अत्यधिक कठोर फैसले लेने की बात कही है।

65 अरब डॉलर बचाने का लक्ष्य

65 अरब डॉलर बचाने का लक्ष्य

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश वित्तमंत्री ने ये फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि अपने 44 दिनों के शासनकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री ने टैक्स में भारी कटौती कर दी थी, जिसमें लोगों को 45 अरब डॉलर छूट देने का लक्ष्य रखा गया था और लिज ट्रस के इस फैसले ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को हिला कर रखा दिया और ब्रिटिश करेंसी रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया था। लिहाजा, अब वित्तमंत्री हंट ने साल 2027-28 तक सार्वजनिक वित्त व्यवस्था को संभालने के लिए 55 अरब पाउंड यानि 65 अरब डॉलर बचाने का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब ये हुआ, कि पिछले 100 दिनों के अंदर ही कंजरवेटिव पार्टी के दो अलग अलग प्रधानमंत्रियों ने 100 अरब पाउंड का परिवर्तन कर दिया है। ब्रिटिश वित्तमंत्री ने कहा कि, 'स्थिरता, डेवलपमेंट और पब्लिक सर्विस के के साथ हम आर्थिक मंदी का सामना करेंगे।'

चरम पर ब्रिटेन में महंगाई

चरम पर ब्रिटेन में महंगाई

आपको बता दें कि, ब्रिटिश वित्तमंत्री जेरेमी हंट ने ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ कॉमन्स में ऑटम स्टेटमेंट पेश किया है, जिसका समर्थन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी किया है। ऑटम स्टेटमेंट पेश करने का मकसद महंगाई दर को काबू में करने के साथ साथ आर्थिक मंदी से निकलना है। भीषण आर्थिक मंदी में फंस चुकी ब्रिटिशि अर्थव्यवस्था गंभीर महंगाई का सामना कर रही है और महंगाई ने पिछले 41 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। ब्रिटेन में महंगाई दर अक्टूबर महीने में 11.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो साल 1981 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है, जबकि सितंबर महीने में ब्रिटेन में महंगाई दर 10.1 प्रतिशत पर थी। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि, यूक्रेन संकट के बाद देश गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है और गैस के साथ साथ पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा इजाफा हुआ है, जिससे ब्रिटिश अर्थव्यवस्था गंभीर तौर पर प्रभावित हुई है।

बड़ी ब्रिटिश अर्थव्यवस्था का होगा पतन?

बड़ी ब्रिटिश अर्थव्यवस्था का होगा पतन?

स्थायी रूप से उच्च ब्याज दर, कल्याणकारी खर्च में भारी इजाफा और अपेक्षा के मुताबिक छोटी अर्थव्यवस्था, यानि इसका मतलब ये होगा, कि यूनाइटेड किंगडम का शीर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में बने रहने का स्टेटस अब खत्म हो जाएगी और ब्रिटिश अर्थव्यवस्था अब और कमजोर हो जाएगी और इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय ऋण को ऊपर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए टैक्स में वृद्धि की आवश्यकता है, जो इस वक्त ब्रिटिश वित्तमंत्री ने किया है। वहीं, ब्रिटेन का राष्ट्रीय ऋण पिछले साल की जीडीपी के 84.3% से बढ़कर 2026-27 में 97.6% हो गया है, जो पिछले 63 सालों में अपने उच्चतम स्तर पहुंच गया है, हालांकि अब इसमें थोड़ी गिरावट आई है और ऋण में गिरावट कमजोर वृद्धि को दर्शाती है, जिसका मतसलब ये होता है, कि सरकार संकट में परिवारों के लिए समर्थन प्रदान कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार ने कोविड संकट के बाद से अभी तक 170 अरब पाउंड अलग अलग बाजारों से उधार लिए हैं।

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