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हावर्ड से 187 साल पुरानी खोपड़ी मांग रहे ब्राजील के मुस्लिम, कौन है वह शख्स जो कहलाता है इस्लाम का ‘रक्षक’?

ब्राजील के बाहिया राज्य में सल्वाडोर के इस्लामी समुदाय ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एक शख्स की 187 साल पुरानी खोपड़ी को वापस करने मांग की है। यह खोपड़ी एक अफ्रीकी मुसलमान की है।

ब्राजील (Brazil) के बाहिया राज्य में सल्वाडोर के इस्लामी समुदाय ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard university) से एक शख्स की 187 साल पुरानी खोपड़ी को वापस करने मांग की है। यह खोपड़ी एक अफ्रीकी मुसलमान योद्धा की है। उसने 1835 में सल्वाडोर शहर में आजादी को लेकर हुए एक विश्व चर्चित विद्रोह का नेतृत्व किया था। यह खोपड़ी अफ्रीका के उन 19 लोगों के अवशेषों में से एक है जिसे हावर्ड ने संभाल कर रखा हुआ है। इस साल की शुरुआत में, हार्वर्ड ने इन लोगों के अवशेषों को लौटाने के लिए एक समिति की भी स्थापना की थी।

सितंबर में शुरू हुई खोपड़ी को लाने की मुहिम

सितंबर में शुरू हुई खोपड़ी को लाने की मुहिम

विश्वविद्याल में छात्रों का समाचार पत्र द हार्वर्ड क्रिमसन के अनुसार, हावर्ड ने सितंबर में अवशेषों को वापस देने के लिए सहमत हो गया था, हालांकि इससे जुड़ी कोई विशेष जानकारी नहीं मिल पायी है। बाहिया के मुस्लिम समुदाय ने इस खोपड़ी वापस लाने की मुहिम बीते महीने सितंबर में शुरू की है। अब यह समुदाय सल्वाडोर में स्थित इस्लामिक सेंटर और हाउस ऑफ नाइजीरिया के माध्यम से हार्वर्ड से सीधे संपर्क करने की योजना बना रहा है।

600 अफ्रीकी मुस्लिमों ने छेड़ी जंग

600 अफ्रीकी मुस्लिमों ने छेड़ी जंग

वर्ष 1835 में साल्वाडोर में 600 अफ्रीकी मुसलमानों ने दासता के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। इसे मेल रिवोल्ट कहा गया। इस दौरान करीब 70 लोगों की मौत हो गई थी। बाकी बचे 500 से अधिक बहिया लोगों को जेल में डाल दिया गया। ऐसा माना जाता है कि वह शख्स जिसकी खोपड़ी हावर्ड के पास है इन्हीं लोगों में से एक था। इस जंग में वह शख्स घायल हो गया था जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। संभवतः यही वह शख्स था जिसने इस गुलामी का विरोध किया था और क्रांति का नेतृत्व किया था।

खोपड़ी को मेडिकल शिक्षा के लिए हावर्ड को किया दान

खोपड़ी को मेडिकल शिक्षा के लिए हावर्ड को किया दान

ब्राजील के एक प्रमुख इतिहासकार जोआओ जोस रीस को सबसे पहले इस साल की शुरुआत में इस खोपड़ी के बारे में पता चला। जोस रीस ने मिडिल ईस्ट आई को बताया कि जिसकी यह खोपड़ी है उसने इस क्रांति का नेतृत्व किया था और अपना शौर्य दिखाया था। संघर्ष में घायल हो जाने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। हावर्ड के मुताबिक 19वीं शताब्दी में ब्राजील में रहने वाले अमेरिकी नागरिक गिदोन टी स्नो ने खोपड़ी को बोस्टन भेजा, जहां मेडिकल शिक्षा के लिए दान कर दिया गया था।

इस्लाम में गुलामी की नहीं है मंजूरी

इस्लाम में गुलामी की नहीं है मंजूरी

प्रोफेसर रीस का तर्क है कि हार्वर्ड को खोपड़ी के डीएनए का उपयोग करके आदमी की जातीय उत्पत्ति की पहचान करने की कोशिश करनी चाहिए। उनके मुताबिक 1835 तक साल्वाडोर में अफ्रीकियों की कुल संख्या सिर्फ 22,000 से कम थी, जबकि इनमें से 3,300-4,400 अफ्रीकी मुसलमान थे। ये सारे लोग गुलाम थे। ब्राजील में 1888 तक गुलामी को समाप्त नहीं किया था। चूंकि इस्लाम में गुलामी को मंजूरी नहीं दी गई है। इसके अलावा उनके साथ भी बेहद बुरा सुलूक किया जाता था ऐसे में एक दिन इनके सब्र का बांध टूट गया और इन्होंने विद्रोह की योजना बनानी शुरू कर दी।

187 साल पहले हुई थी गुलामी के खिलाफ जंग

187 साल पहले हुई थी गुलामी के खिलाफ जंग

विद्रोह की योजना बननी शुरू हो गई लेकिन जब अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली तो इसे उम्मीद से पहले शुरू करना पड़ा। 24 जनवरी 1835 ब्राजील के सल्वाडोर में मेल रिवोल्ट यानी कि गुलामों की जंग शुरू हुई। इसमें 600 विद्रोहियों ने शहर भर में मौजूद सैनिकों लोहा लिया। सैनिकों को पास उस वक्त के अत्याधुनिक हथियार थे जबकि ये विद्रोही चाकू और भाले के सहारे लड़ रहे थे। इनका विद्रोह पूरे एक दिन चला। 70 लोग मारे गए, कई विद्रोही युद्ध में घायल हुए। अन्य को जेल में डाल दिया गया या ब्राजील से निष्कासित कर दिया गया।

फिर से कराया जाएगा अंतिम संस्कार

फिर से कराया जाएगा अंतिम संस्कार

इसके बाद ब्राजील में तत्कालीन सत्ता का उद्देश्य किसी भी नए विद्रोह को कुचलना और बाहिया में इस्लाम को मिटा देना था। अश्वेत लोगों की सभाओं को अपराध घोषित कर दिया गया। साल्वाडोर के इस्लामी समुदाय का अध्ययन करने वाले यूएफबीए में पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता हन्ना बेलिनी के अनुसार, मुस्लिम पुरुष विद्रोहियों का 1835 में उचित अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। नाइजिरियन मूल के स्थानीय शेख मोहम्मद अबदुल्ला ने कहा कि जैसे ही वह खोपड़ी ब्राजील में आती है, हमें उचित अंतिम संस्कार प्रदान करना होगा और उसे दफनाना होगा। वह केवल एक वस्तु नहीं है जिसे संग्रहालय में प्रदर्शित किया जा सकता है।

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