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धरती से हमेशा के लिए विलुप्त हो गई ये जनजाति, आखिरी सदस्य की भी मौत, इंसानों की लालच से मिटा अस्तित्व

आदिवासी जनजाति के आखिरी बचे उस व्यक्ति का शव 23 अगस्त को फुनाई अधिकारियों द्वारा एक झोपड़ी में झूले पर पड़ा मिला।

ब्रासीलिया, अगस्त 29: ब्राजील की स्वदेशी सुरक्षा एजेंसी 'फुनाई' ने इस बात की आधिकारिक घोषणा कर दी है, कि ब्राजील की स्वदेशी जनजाति के अंतिम जिंदा सदस्य की भी मृत्यु हो गई है और इसके साथ ही ब्राजील का ये मूल आदिवासी समाज हमेशा के लिए अपना अस्तित्व खो बैठा। एनजीओ सर्वाइवल इंटरनेशनल के अनुसार, "मैन ऑफ द होल" के रूप में पहचान रखने वाला आदिवासी समाज का ये व्यक्ति पिछले 26 सालों से ब्राजील के सबसे बड़े और घने जंगल अमेजन में तनारू नाम की भूमि पर अकेलेपन की जिंदगी जी रहा था, जिसका अब देहांत हो गया है।

अकेलेपन की जीते थे जिंदगी

अकेलेपन की जीते थे जिंदगी

ब्राजील के मूल आदिवासी समाज से आने वाले इस शख्स का असली नाम क्या था, ये किसी को नहीं पता था, लेकिन एनजीओ ने कहा कि, उनकी जानवरों को बहुत सावधानी से फंसाने की आदत, गहरे छेद बनाने की आदत की वजह से उन्हें "मैन ऑफ द होल" उपनाम दिया गया था। हालांकि, ऐसा नहीं था कि, आदिवासी समाज के अंतिम बचे उस व्यक्ति से संपर्क करने की कोशिश नहीं की गई, बल्कि उन्होंने हर संपर्क करने का विरोध किया। जिसके बाद ब्राजील के अधिकारी दूर से उनकी निगरानी किया करते थे और उनके आसपास भोजन और जरूरी सामान छोड़ दिया करते थे, ताकि उन्हें मदद मिल सके।

हमलों में खत्म हो गई जनजाति

हमलों में खत्म हो गई जनजाति

सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा कि 1970 के दशक के बाद से कई हमलों से उनकी जनजाति के बचे हुए लोगों का सफाया हो गया, खासकर पशुपालकों और भूमि हथियाने वालों लोगों ने इस जनजाति को काफी नुकसान पहुंचाया और जिन जगहों पर वो रहते थे, उनकी जमीने हड़प लीं और उन्हें भगाना शुरू कर दिया। जिसमें इस जनजाति के ज्यादातर लोग मार दिए गये। वहीं, इस जनजाति समूह पर रिसर्च करने वाले वकील फियोना वाटसन ने कहा कि, "कोई भी बाहरी व्यक्ति इस आदमी का नाम नहीं जानता था, या यहां तक ​​कि उनकी जनजाति के बारे में भी ज्यादा जानकारी लोगों के पास नहीं है और उनकी मृत्यु के बाद इस पूरी जनजाति का पूरा नरसंहार हो गया है। उन्होंने कहा कि, "यह वास्तव में एक नरसंहार था और भूमि और धन के भूखे पशुपालकों ने जानबूझकर पूरे समुदाय का सफाया कर दिया।''

23 अगस्त को मिला शव

23 अगस्त को मिला शव

रिपोर्ट के मुताबिक, आदिवासी जनजाति के आखिरी बचे उस व्यक्ति का शव 23 अगस्त को फुनाई अधिकारियों द्वारा एक झोपड़ी में झूले पर पड़ा मिला। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि, उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से ही हुई है, क्योंकि आसपास किसी भी तरह के कोई संघर्ष, हिंसा या अन्य लोगों की मौजूदगी के कोई संकेत नहीं मिले हैं। जांच एजेंसी फुनाई के अनुसार, प्राकृतिक कारणों से उनकी मृत्यु हो गई, और उनके शरीर की संघीय पुलिस द्वारा फोरेंसिक जांच की जाएगी।

2018 में आया था अंतिम वीडियो

2018 में आया था अंतिम वीडियो

"मैन ऑफ़ द होल" नाम के इस व्यक्ति का अंतिम ज्ञात वीडियो जांच एजेंसी द्वारा साल 2018 में जारी किया गया था, जिसमें उन्हें एक कुल्हाड़ी जैसे उपकरण के साथ एक पेड़ पर की तरफ जाते हुए दिखाया गया था। सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा कि, वो जहां रहते थे, वहां पर झोपड़ी हैं, अब उनकी जांच की जाएगी और उस आदिवासी समाज के बारे में ज्यादा जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जाएंगी। उनकी झोपड़ी में उनके द्वारा इस्तेमाल की गई काफी चीजें हैं और उनकी जीवन शैली के सुराग हैं। एनजीओ ने कहा कि, उन्होंने मकई और पपीता सहित कई फसलें लगाईं थीं और पुआल और फूस के घर बनाए थे।

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