• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

लूला डा सिल्वाः जूता चमकाने वाला बना ब्राजील का राष्ट्रपति, फिदेल कास्त्रो की एक फटकार ने बदली जिंदगी

राष्ट्रपति पद के लिए हुआ यह चुनाव बेहद करीबी था, जिसमें बोल्सोनारो को 49.1 फीसदी वोट मिले तो वहीं लूला डी सिल्वा ने 50.9 फीसदी वोट हासिल किया। लूला तीसरी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने हैं।
Google Oneindia News

ब्राजील में रविवार को लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा ने राष्ट्रपति पद के लिए एक बेहद करीबी मुकाबले में अपने विरोधी जेयर बोल्सोनारो को हरा दिया है। यह ब्राजील में पिछले तीन दशक में हुआ सबसे करीबी चुनाव था जिसमें लूला डी सिल्वा ने 1 फीसदी वोट से जीत हासिल की। इस चुनाव में जायरे बोल्सोनारो को 49.1 फीसदी वोट मिले तो वहीं लूला डी सिल्वा ने 50.9 फीसदी वोट हासिल किया। लूला डी सिल्वा 1 जनवरी 2023 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही वे देश के 39वं राष्ट्रपति बन जाएंगे।

Recommended Video

    Lula da Silva बने Brazil के President, जानें क्या है लूला डी का राजनीतिक इतिहास | वनइंडिया हिंदी
    तीसरी बार राष्ट्रपति बनेंगे लूला डी सिल्वा

    तीसरी बार राष्ट्रपति बनेंगे लूला डी सिल्वा

    ब्राजील के वामपंथी नेता लूला डी सिल्वा ने तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है। इससे पहले वे 2003 से 2010 तक देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं। 77 वर्षीय लूला डी सिल्वा को 2018 में भ्रष्टाचार के मामले के आरोपों के चलते जेल भेज दिया गया था जिसकी वजह से वह जुनाव नहीं लड़ पाए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें 2019 में रिहा किया गया।

    बेहद गरीबी में बीता लूला डी सिल्वा का बचपन

    बेहद गरीबी में बीता लूला डी सिल्वा का बचपन

    फिलहाल द. अमेरिका के सबसे लोकप्रिय नेता में शुमार लूला डि सिल्वा के राष्ट्रपति बनने तक का सफर बेहद रोचक रहा है। लूला डी सिल्वा का जन्म 27 अक्टूबर, 1945 को ब्राजील के उत्तरपूर्वी राज्य पर्नामबुको में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। आठ बहन-भाई में लूला अपने माता-पिता की सातवीं संतान हैं। उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता। 14 साल की छोटी सी उम्र में लूला ने एक जूता बनाने वाले के यहां जूता चमकाने का काम किया। कुछ समय तक उन्होंने मूंगफली भी बेचा। जाहिर है परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी जिस कारण लूला अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।

    लूला डी सिल्वा ने 1980 में शुरू की राजनीति

    लूला डी सिल्वा ने 1980 में शुरू की राजनीति

    लूला डी सिल्वा ने 1964 से 1985 तक ब्राजील पर शासन करने वाली सत्तारूढ़ सैन्य तानाशाही के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। हालांकि लूला के राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1980 से शुरू हुई। इसी साल लूला ने वामपंथी वर्कर्स पार्टी की स्थापना करते हुए राजनीति की दुनिया में एंट्री ली। हालांकि राजनीति इतनी आसान कहां थी। पहली बार लूला ने 1982 में गर्वनर चुनाव में भाग लिया लेकिन उन्हें बुरी तरह हार नसीब हुई।

    फिदेल कास्त्रो की फटकार ने बदला मन

    फिदेल कास्त्रो की फटकार ने बदला मन

    इस हार ने लूला का दिल तोड़ दिया। वे बेहद निराश हो गए। उन्होंने राजनीति छोड़ने का मन बना लिया और फिर कभी यहां न लौटने का फैसला किया। वह सबकुछ छोड़छाड़ कर क्यूबा की राजधानी हवाना चले गए। ठीक इसी वक्त दुनिया के सबसे चर्चित वामपंथी नेता फिदेल कास्त्रो का दिया हौसला उनके काम आया। क्यूबा में फिदेल क्रास्त्रो ने लूला को उनके फैसले को लेकर बुरी तरह फटकार लगाई। फिदेल ने कहा- सुनो लूला... आपको राजनीति छोड़ने का अधिकार नहीं है। आपको मजदूर वर्ग के साथ ऐसा करने का हक नहीं है। राजनीति में वापस जाओ।

    जब तक जीत नहीं मिली, नहीं मानी हार

    जब तक जीत नहीं मिली, नहीं मानी हार

    फिदेल कास्त्रो की सलाह को उन्होंने दिल से लगा लिया। इस घटना के चार साल बाद 1989 में लूला डी सिल्वा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें असफलता हाथ लगी। इसके चार साल बाद 1994 में उन्होंने इस पद के लिए फिर से दावेदारी ठोकी लेकिन फिर से असफलता हाथ लगी। चार साल बाद 1998 में वह फिर से राष्ट्रपति पद के लिए खडे थे लेकिन इस बार भी वह हार गए। गर्वनर चुनाव में हार के बाद लगातार 3 बार राष्ट्रपति पद का चुनाव हारने वाले लूला डी सिल्वा ने आखिर तक हार नहीं मानी। चार साल बाद साल 2002 में पहली बार वह अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहे।

    घर में पेशाब कर आते थे शराबी

    घर में पेशाब कर आते थे शराबी

    लूला डी सिल्वा की बायोग्राफी लिखने वाले मोरिस लिखते हैं कि लूला जब साओ पाउलो के मुख्य मार्ग पॉलिस्ता पर अपनी जीत के बाद भीड़ को संबोधित कर रहे थे तो उसकी आंखों में खुशी और विश्वास दोनों के आंसू थे। मोरिस की बायोग्राफी के मुताबिक लूला का परिवार पैसे की तंगी का सामना कर रहा था। वह एक साधारण घर भी किराए पर नहीं ले सकते थे। पैसे की तंगी के कारण लूला का परिवार शराबखाने की पीछे एक कमरे में रहा करता था। बार में शराब पीने वाले लोग रात में नशे में उनके घर पर ही पेशाब कर जाते थे। जब बारिश होती थी तो चूहे और मेंढक गली से बहते हुए उनके घर तक आ जाते थे। दिनभर इन्हें साफ करना पड़ता था।

    फुटबॉल के दीवाने थे लूला

    फुटबॉल के दीवाने थे लूला

    लूला के जीवनी लेखर मोरिस के मुताबिक जवानी में लूला की दिलचस्पी राजनीति में नहीं बल्कि फुटबॉल में थी। लूला डी सिल्वा एक फैक्ट्री में कर्मचारी का काम करता और घर चलाता। भले ही फैक्ट्री में कम वेतन मिलता था लेकिन उसे उससे कोई खास परेशानी नहीं थी लेकिन एक दिन लूला के भाई को सुरक्षा बलों ने अगवा कर लिया और खूब प्रताड़ित किया। यह साल 1975 था। यही वह वक्त था जब लूला ने इस जबरिया शासन से लोहा लेने की कसम खायी। लूला श्रमिक आंदोलन का हिस्सा बन चुका था। लूला के नेतृत्व में ब्राजील में कई ऐतिहासिक हड़तालें हुईं। लूला डी सिल्वा ब्राजील के सबसे प्रसिद्ध संघ नेता के रूप में पहचाने जाने लगे। इसके बाद साल 1980 में लूला ने वर्कर्स पार्टी की नींव रखी। इसी पार्टी ने आज मजबूत दक्षिणपंथी नेता जायर बोलसोनारो को हरा दिया है।

    बेवफा प्रेमियों और पतियों से रूसी महिलाएं ले रहीं बदला, यूक्रेन युद्ध में भेजने के लिए सेना को दे रही एड्रेसबेवफा प्रेमियों और पतियों से रूसी महिलाएं ले रहीं बदला, यूक्रेन युद्ध में भेजने के लिए सेना को दे रही एड्रेस

    Comments
    English summary
    Lula da Silva has been elected the next president of Brazil
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X