‘जब अमेरिका नहीं बना था भागीदार, तब भारत के साथ रूस खड़ा था’, पहली बार अमेरिकी अधिकारी ने माना
गुरुवार को एएनआई के साथ एक विशेष इंटरव्यू में एंटनी ब्लिंकन के शीर्ष सलाहकार डेरेक चॉलेट ने कहा कि, अमेरिका भारत का समर्थन करने के लिए तैयार है
वॉशिंगटन, अप्रैल 22: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ही भारत पर रूस की आलोचना करने को लेकर भारी दवाब बनाने की कोशिश की गई है, वहीं भारत ने बार बार यह कहने की कोशिश की है, कि भारत और रूस के संबंध पिछले कई दशकों से रहे हैं और अब अमेरिका के टॉप अधिकारियों ने भी मानना शुरू कर दिया है, कि भारत और रूस के लंबे वक्त से रक्षा संबंध रहे हैं।
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अमेरिकी टॉप अधिकारी का बयान
भारत और रूस के बीच उस वक्त से मजबूत संबंध रहे हैं, जब अमेरिका पाकिस्तान को भारत का अहम दुश्मन बनाने की कोशिश में लगा था और चीन के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा था। रूस ना सिर्फ भारत का करीबी दोस्त था, बल्कि भारत को इसी अमेरिका से बचा भी रहा था और अब अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस बात को मानना शुरू कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के एक शीर्ष सलाहकार ने कहा है कि, ‘वाशिंगटन पूरी तरह से नई दिल्ली के मास्को के साथ लंबे समय से संबंधों को पूरी तरह से समझता है'।

भारत का समर्थन करने के लिए तैयार
गुरुवार को एएनआई के साथ एक विशेष इंटरव्यू में एंटनी ब्लिंकन के शीर्ष सलाहकार डेरेक चॉलेट ने कहा कि, अमेरिका भारत का समर्थन करने के लिए तैयार है और अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी में जबरदस्त संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि, ‘हम समझते हैं कि भारत के रूस के साथ कई वर्षों से लंबे समय से रक्षा संबंध रहे हैं और इसकी प्रमुख वजहों में एक वजह ये भी था, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका एक समय भारत का भागीदार बनने के लिए उपलब्ध नहीं था। लेकिन, यह दशकों पहले की बात है और आज हम एक बहुत अलग वास्तविकता का सामना कर रहे हैं'। उन्होंने कहा कि, ‘पिछले 10 वर्षों में यूएस-इंडिया डिफेंस पार्टनरशिप में नाटकीय रूप से बदलाव आया है। हम दोनों देशों के संबंधों में काफी संभावनाएं और अवसर देखते हैं'। उन्होंने कहा कि, ‘सचिव (एंटनी) ब्लिंकन और रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन की भारत से 2+2 वार्ता में दोनों देशों के बीच के रिश्ते के और स्पष्ट करने में मदद मिली है'।

भारत-अमेरिकी रणनीतिक साझेदार
अमेरिकी विदेशी मंत्री एंटनी ब्लिंकन के प्रमुख सलाहकार ने भारतीय न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि, भारत संयुक्त राज्य का एक रणनीतिक साझेदार है। चॉलेट ने कहा कि, ‘हम स्वाभाविक सहयोगी हैं और इस साझेदारी में जबरदस्त क्षमता है। यह पहले से ही इस क्षेत्र में और दुनिया भर के देशों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है और हमें लगता है, वास्तव में...हमारे पास अब सिर्फ ऊपर जाने के ही मौके हैं'। उन्होंने यह भी कहा कि, अमेरिका भारत के साथ करीबी संपर्क में है। ब्लिंकन के शीर्ष सलाहकार ने कहा, "हम रूस के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को पूरी तरह से समझते हैं।"

कम कीमत पर हथियार देगा अमेरिका?
रूसी हथियार खरीदने की प्रमुख वजहों में एक वजह ये भी है, कि रूस ने हमेशा से भारत को कम कीमत पर हथियार दिए हैं, लेकिन अब प्रतिबंधों की वजह से रूस के लिए भारत को कम कीमत पर हथियार देना काफी मुश्किल हो जाएगा, वहीं, भारत पर रूसी हथियार नहीं खरीदने को लेकर भी भारी दवाब बनाया जा रहा है। वहीं, कई जरूरी उपकरणों की कमी की वजह से रूस में कई हथियारों का उत्पादन भी रूक गया है और जब अमेरिकी अधिकारी से पूछा गया, कि क्या अमेरिका इस अवसर का फायदा उठाने की कोशिश करेगा? तो अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि, ‘यह भारत को लुभाने के बारे में बहुत कुछ नहीं है। हम देखते हैं कि यह साझेदारी व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही है। और यह कुछ ऐसा है, जिसे दोनों पक्ष चाहते हैं और हमारे बीच के रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं और यह (रिश्ता) रातोंरात नहीं हो सकता है। इस बदलाव को करने में काफी समय लगेगा। और हम उस जगह पर पहुंचना चाहते हैं, जहां से हम भारतीय सहयोगियों का समर्थन करें'।

अमेरिका बनाम रूस बनाम भारत
पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत देते हुए कहा था, कि वॉशिंगटन को नहीं लगता है कि, भारत के लिए रूसी हथियार खरीदना नई दिल्ली के हित में है। एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि, ‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना जारी रखते हैं कि वे समझें ... हमारा मानना है कि रूसी उपकरणों में निवेश जारी रखना (भारत के) सर्वोत्तम हित में नहीं है'। ऑस्टिन ने वार्षिक रक्षा बजट पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को बताया था कि, ‘आगे बढ़ने के लिए हमारी आवश्यकता यह है कि वे (भारत) उन उपकरणों के प्रकारों को कम करें, जिनमें वे निवेश (रूसी हथियार) कर रहे हैं'। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी तब आई थी, जब भारत ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार कर दिया था। भारतीय सेना कई रूसी निर्मित हथियारों का उपयोग करती है, जिसमें टैंक, आर्टिलरी गन और मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। नई दिल्ली ने रूस के एस-400 वायु रक्षा प्रणाली को खरीदने के लिए सौदों पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका के विरोधियों के माध्यम से अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे में है।












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