बड़ी संख्या में बंदूक उठा रही हैं अश्वेत महिलाएं

वाशिंगटन, 01 सितंबर। वैलरी रुपर्ट ने बांह ऊपर उठाई तो वह हल्की हल्की कांप रही थी. कांपती बाजू में बंदूक थामकर निशाना लगाना मुश्किल होता है. 67 साल की रुपर्ट, जो अब दादी बन चुकी हैं, सामने निशाने पर बनाए गए डकैत को ध्यान से देख रही थीं. उन्होंने एकाग्र होकर ट्रिगर दबा दिया. उनकी गोली की आवाज गूंजी लेकिन बाकी वैसी ही आवाजों के साथ.

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बाद में रुपर्ट बोलीं, "शुरू में मैं थोड़ी नर्वस थी लेकिन दो-एक बार गोली चला लेने के बाद मुझे मजा आने लगा."

हिंसा का असर

रुपर्ट उन करीब एक हजार अश्वेत महिलाओं में हैं, जो डेट्रॉयट में मुफ्त में दी जा रही बंदूक चलाने की ट्रेनिंग का हिस्सा हैं. बंदूक के समर्थक और उद्योग जगत के जानकारों के मुताबिक अश्वेत महिलाओं में अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक उठाने की इच्छा तेजी से बढ़ रही है.

इस चलन के पीछे है अपराधों से डर, खासकर ऐसे हिंसक अपराधों में जिनमें बंदूकों का इस्तेमाल होता है. लेकिन एक नई चीज भी हुई है जो महिलाओं को उत्साहित कर रही है. एक पुलिसकर्मी द्वारा मिनेपोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद पिछले 15 महीने में अश्वेतों पर होने वाली हिंसा के खिलाफ गुस्से का सार्वजनिक प्रदर्शन बढ़ा है.

इसके अलावा कोविड संबंधी पाबंदियों और 2020 के राष्ट्रपति चुनावों को लेकर गुस्सा भी ज्यादा सार्वजनिक तौर पर नजर आया है. इस गुस्से का असर अलग-अलग तरह से देखा भी गया. जैसे कि मिशिगन में गवर्नर का अपहरण और वॉशिंगटन में बंदूकधारियों का कैपिटोल बिल्डिंग पर चढ़ जाना.

डर की तस्वीर

श्वेत पुरुषों के खतरनाक हथियार लिए कैपिटोल पर घूमते दिखने का वह दृश्य रुपर्ट जैसी महिलाओं के जहन पर अंकित हो गया है. रुपर्ट बताती हैं, "उन बंदूकों के साथ वे लोग कैपिटोल तक पहुंच गए. आपको तैयार रहना होगा."

नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के मुताबिक अमेरिका में 2020 में लगभग 85 लाख लोगों ने पहली बार बंदूक खरीदी. हथियार उद्योग के इस संगठन के मुताबिक अश्वेत पुरुषों और महिलाओं द्वारा हथियार खरीदने की संख्या में बीते साल के पिछले छह महीनों में 58 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई.

देखिएः अश्वेतों की बस्ती का कायाकल्प

ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर और जॉन्स हॉपकिन्स सेंटर फॉर गन वायलेंस प्रिवेंशन ऐंड पॉलिसी के निदेशक डेनियल वेबस्टर कहते हैं कि लोग ज्यादा बंदूकें तब खरीदते हैं जब सरकार और पुलिस पर उनका भरोसा कम हो जाता है.

प्रोफेसर वेबस्टर कहते हैं, "हमने श्वेत राष्ट्रवादियों की हिंसा में ऐसी ही वृद्धि देखी है. पुलिस में भरोसे की कमी और नफरत फैलाने वाले संगठनों के कारण बहुत सारे अश्वेत लोग हथियार खरीद रहे हैं."

अब भी कम हैं अश्वेत बंदूकधारी

वैसे, अमेरिका में हथियार रखने वाले लोगों में अश्वेतों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है. कनेक्टिकट स्थित नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के मुताबिक देश में जितने लोगों के पास बंदूकें हैं, उनमें से 56 प्रतिशत श्वेत पुरुष हैं. अश्वेत पुरुषों की संख्या 9.3 प्रतिशत है जबकि अश्वेत महिलाओं की संख्या 5.4 प्रतिशत. बंदूक रखने वालों में 16 प्रतिशत श्वेत महिलाएं हैं. फाउंडेशन की पब्लिक अफेयर्स डाइरेक्टर मार्क ओलिविया के अनुसार 2020 में अश्वेतों द्वारा बंदूकें खरीदने के चलन में बड़ा बदलाव आया है.

तस्वीरों मेंः रंगभेद का दुनियाभर में विरोध

और इसी का परिणाम है कि अब शूटिंग रेंज में अश्वेत महिलाएं दिखाई देने लगी हैं. लगभग दो दशक से निशानेबाजी कर रहीं श्वेत महिला बेथ अल्काजार कहती हैं कि शूटिंग रेज पर अश्वेत महिलाओं का होना एक दुर्लभ घटना है. अलाबामा में शूटिंग सिखाने वालीं अल्काजार कहती हैं, "सच कहूं तो, रेंज पर अश्वेत महिला की एक से ज्यादा तस्वीर मेरे जहन में नहीं उभरती. पिछले पांच साल में मेरी गतिविधि बढ़ी है और जब भी मैं रेंज पर जाती हूं, हर बार पहले से ज्यादा अश्वेत महिलाएं नजर आती हैं."

डेट्रॉयट में शूटिंग इंस्ट्रक्टर लैवेट ऐडम्स कहती हैं कि अधिकतर अश्वेत महिलाओं के लिए बूंदक चलाना सीखना अपनी देखभाल करने से जुड़ा है. अश्वेत महिला ऐडम्स बताती हैं, "महिलाओं के खिलाफ अपराध कोई नई बात नहीं है. महिलाएं खुद की रक्षा कर रही हैं, यह नई बात है."

रिपोर्टः वीके/सीके (एपी)

Source: DW

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