Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

अफ्रीका में हेलीकॉप्टर से छोड़े जाएंगे अरबों मच्छर, मलेरिया के खात्मे के लिए बिल गेट्स कर रहे फंडिंग

लगभग 10 साल पहले अफ्रीकी देश जिबूती मलेरिया को खत्म करने में लगभग सफल हो चुका था। देश के नेताओं को उम्मीद थी कि बीमारी से छुटकारा पाने से उन्हें नए निवेश, विकास और पर्यटन को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

फिर अचानक मलेरिया वापस लौट आया। जिबूती में साल 2012 में मलेरिया के मामले केवल 27 थे। साल 2020 में ये बढ़कर 73,000 से अधिक हो गए। महज 10 लाख की आबादी वाले इस अफ्रीकी देश में यह एक भयंकर आंकड़ा था।

Malaria control programme Djibouti

इसकी वजह एक अत्यधिक आक्रामक मच्छर का अचानक बढ़ जाना था जो दक्षिण एशिया और अरब प्रायद्वीप से अफ्रीका में ट्रांसफर हो गया। यह मच्छर जिसका नाम एनोफिलिस स्टीफेन्सी है अब उप-सहारा अफ्रीका में मलेरिया उन्मूलन के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बनकर उभरा है।

ये एनोफिलिस स्टेफेन्सी मच्छर इथियोपिया, सूडान, सोमालिया, केन्या और सुदूर पश्चिम अफ्रीका के नाइजीरिया और घाना में पाए गए हैं। एक अध्ययन के अनुसार, यदि इस मच्छर को अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो महाद्वीप पर अतिरिक्त 126 मिलियन लोगों पर मलेरिया का खतरा बना रहेगा।

एनोफिलिस स्टेफेन्सी मच्छर क्यों अधिक खतरनाक हैं?

एनोफिलिस स्टेफेन्सी मच्छर की प्रकृति बाकी मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की तुलना में अलग रही है। अफ्रीका के बाकी मलेरिया मच्छर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में प्रजनन करते हैं, एन. स्टेफेंसी शहरी परिवेश में पनपती है।

उप-सहारा अफ्रीका में शहरी आबादी करीब 40 प्रतिशत है, जिससे इस मच्छर के लिए उपजाऊ आवास तैयार हो रहा है। जहां बाकी मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का रोकथाम कीटनाशकों द्वारा संभव है, स्टेफेंसी ने कई कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लिया है।

इसके अलावा इस मच्छर की सबसे बुरी बात ये है कि वे शाम को सोने से पहले काटते हैं, अन्य मच्छरों की तरह आधी रात में नहीं, ऐसे में सुरक्षा के तौर पर मच्छरदानी कम प्रभावी हो जाती है।

मच्छरों और उनसे होने वाली बीमारियों के खिलाफ लड़ाई हमेशा से चूहे-बिल्ली का खेल रहा है। मनुष्य खुद को मच्छरों से बचाने के लिए नए उपाय विकसित करते हैं - जैसे कि मच्छरदानी, कीटनाशक और उपचार। वहीं, मच्छर बार-बार इन्हें चुनौती देते रहते है।

आपको बता दें कि मच्छरों में अनुकूलन करने की अविश्वसनीय क्षमता होती है, जो उन्हें अंततः नवीनतम नियंत्रण विधियों से बचने या प्रतिरोध विकसित करने की अनुमति देती है। फिर मनुष्य मच्छरों को मात देने के लिए और अधिक नए आविष्कार करता है जिस पर मच्छर प्रतिक्रिया करते हैं और इसी तरह ये क्रम चलता रहता है।

ऐसे में एक नई कंपनी आई है जो इस खेल का रूख बदल देना चाहती है। ऑक्सीटेक नामक कंपनी का लक्ष्य चूहे-बिल्ली के खेल को बदलकर चूहे-चूहे के बीच लाना है। यानि कि इस मामले में मच्छर का मुकामला इंसान नहीं, मच्छर ही करेंगे।

ब्रिटेन की बायोटेक कंपनी ऑक्सीटेक अन्य मच्छरों से लड़ने के लिए मच्छरों का उपयोग करने में माहिर है। ऑक्सीटेक ने एक 'सुपर मच्छर' तैयार किया है, जो बीमारी फैलाने वाले मच्छरों को टक्कर दे सकता है। इनके जरिए दुनिया से मलेरिया खत्म किया जा सकता है। आपको बता दें कि बिल गेट्स की तरफ से ऑक्सीटेक को फंडिंग मिलती है।

अपनी आनुवंशिक तकनीक के साथ, ऑक्सीटेक ने ब्राजील में डेंगू बुखार फैलाने वाले मच्छर, एडीज एजिप्टी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पहले से ही मच्छर विकसित कर लिया है। अब ऑक्सीटेक ने अफ्रीकी सरकारों को एन स्टेफेंसी को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए उसी तकनीक का उपयोग करने की योजना बनाई है।

ऑक्सीटेक ने जिन मच्छरों को तैयार किया है, वो सभी नर हैं। मच्छरों की खासियत है कि इनमें एक खास तरह का जीन मौजूद है, जो मादा मच्छरों को ज्यादा दिनों तक जिंदा रखने से रोकता है। लेकिन जब सुपर नर मच्छर मादा मच्छरों के साथ संबंध बनाते हैं, तो जीन उनमें ट्रांसफर कर देते हैं, इससे मादा मच्छरों की मौत हो जाती है।

ऐसे में सभी नर संतानें, जो काटती नहीं हैं, जीवित रहेंगी और अन्य जंगली मादाओं के साथ संभोग करेंगी। अब ऑक्सिटेक जैसी आनुवंशिक तकनीक स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठाती है। क्या ये सुरक्षित है? स्थायी पर्यावरणीय प्रभाव क्या हैं? यहां यह जानना महत्वपूर्ण है।

क्योंकि यह जीन ट्रांसफर सिर्फ संभोग के माध्यम से होता है, ऐसे में ऑक्सीटेक नर मच्छरों में मौजूद जीन केवल माना को लक्षित करता है। इसका अन्य कीड़ों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और इसे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में स्थापित नहीं किया जा सकता है।

आनुवंशिक रूप से संशोधित मच्छरों के संभावित खतरे का मूल्यांकन करने के बाद, 2016 में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन और 2022 में ईपीए ने पुष्टि की है कि ऑक्सीटेक मच्छर मनुष्यों या पर्यावरण के लिए खतरा पैदा नहीं करते हैं। दुनिया भर में एक अरब से अधिक ऑक्सीटेक मच्छर छोड़े गए हैं, जिनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा है।

अगर ब्राजील की बात की जाए तो ऑक्सीटेक एडीज एजिप्टी मच्छर डेंगू बुखार के प्रसार को कम करने में इतने सफल रहे हैं कि वहां पर इसकी खूब मांग है। घर के मालिक अपने पिछवाड़े में मच्छरों को पालने के लिए एक किट भी खरीद सकते हैं।

हालांकि अभी तक जिबूती में कोई ऑक्सीटेक मच्छर नहीं छोड़ा गया है। लेकिन जिबूती सरकार को उम्मीद है कि वह अगले साल जिबूती की राजधानी में ऑक्सीटेक मच्छरों की पहली खेप रिलीज करेगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+