भारत के खिलाफ बाइडेन का प्लान-B है पाकिस्तान, अमेरिका की चेतावनी का कैसे मुंहतोड़ जवाब देंगे मोदी?
अभी भी अमेरिका लगातार भारत को अपना रणनीतिक पार्टनर और क्वाड का एक अहम सदस्य बता रहा है, लेकिन मॉस्को और नई दिल्ली के बीच के सैन्य संबंध से अमेरिका असहज भी है।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, अक्टूबर 03: पिछले कई सालों से नई दिल्ली का समर्थन करने वाले अमेरिका ने अब पाकिस्तान के साथ जबरदस्त संतुलन बनाना शुरू कर दिया है। खासकर पिछले एक महीने में अमेरिका ने जिस तरह से पाकिस्तान के लिए रेड कार्पेट बिछाए हैं, वो भारत के सामने कई सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, भारत को साधने के लिए अमेरिका का प्लान-बी पाकिस्तान है और बाइडेन प्रशासन भारत और पाकिस्तान के बीच नये तरह का फुटबॉल खेल रहा है, लिहाजा एक्सपर्ट्स का कहना है कि, मोदी सरकार को भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। आईये जानते हैं, कि कैसे बाइडेन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ अपना प्लान-बी बनाया है।

बाइडेन का प्लान-बी है पाकिस्तान
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच के संबंध पिछले कुछ सालों में काफी खराब हो गये थे, खासकर इमरान खान के शासन के दौरान अमेरिका-पाकिस्तान संबंध न्यूनतम स्तर तक पहुंच चुका था। पिछले कई सालों से अमेरिका में इस बात की चर्चा की जा रही थी, कि अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन करने वाला पाकिस्तान चीन के खेमे में भी खड़ा है, लिहाजा वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद से दूरी बनानी शुरू कर दी थी और पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की दी जाने वाली तमाम आर्थिक और सैन्य मदद पर रोक लगा दी थी। अमेरिका के अंदर एक धारणा बनने लगी थी, कि लोकतांत्रिक भारत निरंकुश चीन के खिलाफ है और इसने पाकिस्तान को अमेरिकी कैंप से बाहर निकाल दिया था। लेकिन, जियो पॉलिटिक्स में तेजी से बदलाव आया है और डबल गेम खेलने में एक्सपर्ट अमेरिका ने अपनी स्ट्रैटजी में फिर से जबरदस्त बदलाव किया है और पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिक्रिया अचानक बदल गई है और एक्सपर्ट्स का मानना है कि, दक्षिण एशिया में अमेरिकी स्थिति का भविष्य बदल रहा है, क्योंकि वाशिंगटन ने परमाणु-सशस्त्र प्रतिद्वंद्वियों भारत और पाकिस्तान के साथ फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया है, जैसे कि वो दशकों से करता आ रहा था।

अमेरिका का दोस्त, रूस का बेहतरीन दोस्त
शनिवार को भारत ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान करने से इनकार कर दिया, जिसमें रूस के यूक्रेनी क्षेत्र के अवैध कब्जे की निंदा की गई थी। यह पहली बार नहीं था, जब भारत ने अमेरिका का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। युद्ध की शुरुआत के बाद से ही यूक्रेन में रूसी आक्रमण के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गये हर प्रस्ताव से भारत ने दूरी बनाकर रखी। भारत पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने भारत के इन कदमों को इस तरह से लिया, कि "हम जो करेंगे वो सही है, और वो हम अपने हिसाब से करेंगे।" लिहाजा, पश्चिम में भारत को लेकर एक निराशा फैलने लगी। हालांकि, पिछले महीने शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेश की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के सामने 'युद्ध का युग नहीं है' कहा था, जिसकी अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने तारीफ भी कि, लेकिन उसके ही कुछ दिनों बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को लेकर कई अहम फैसले कर लिए। हालांकि, मोदी सरकार लगातार शांति की अपील कर रही है, लेकिन पश्चिमी देशों का कहना है, कि अब जबकि नौबत परमाणु युद्ध तक आ पहुंची है, फिर भी भारत दोहरा रवैया अपना रहा है।

किस दिशा में अमेरिका का निराशा?
हालांकि, अभी भी अमेरिका लगातार भारत को अपना रणनीतिक पार्टनर और क्वाड का एक अहम सदस्य बता रहा है, लेकिन मॉस्को और नई दिल्ली के बीच के सैन्य संबंध से अमेरिका असहज भी है। भारत ने रिकॉर्ड मात्रा में रूसी तेल खरीदकर पुतिन को युद्ध में जीवनदान दिया है। 2021 के मुकाबले इस साल भारत का रूस से तेल आयात 30 गुना तक बढ़ चुका है और भारत ने पिछले साल के मुकाबले सिर्फ इस साल रूस से चौगुना कोयले का आयात किया है। वहीं, भारत अभी भी मास्को का सबसे बड़े हथियार ग्राहक बना हुआ है, और अमेरिकी प्रतिबंधों को ट्रिगर करने के जोखिम के बावजूद सोफिस्टिकेटेड रूसी हथियार खरीदना जारी रखा हुआ है।

अमेरिका कैसे कर रहा PAK का इस्तेमाल
अमेरिका के पाकिस्तान प्लान को देखकर यही लग रहा है, कि बाइडेन प्रशासन ने भारत को अपने तरीके से जवाब देने का इरादा कर लिया है और अफगानिस्तान में तालिबान के लिए पाकिस्तान के समर्थन के कारण 2018 में सभी सैन्य सहायता को निलंबित करने के बाद, अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले महीने पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर का एफ-16 विमान के मरम्मत के लिए पैकेज जारी कर दिया। एफ-16 विमान का इस्तेमाल पाकिस्तान इससे पहले साल 2019 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में कर चुका है और इस बार भी भारतीय विदेश मंत्री ने साफ तौर पर कहा है, कि 'पाकिस्तान एफ-16 का इस्तेमाल किसके खिलाफ करेग? हमें मूर्ख नहीं बनाएं।' हालांक, अमेरिकी विदेश विभाग ने यह कहकर संतुलन बनाने की कोशिश की, कि अमेरिका के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों अलग अलग रणनीतिक महत्व रखते हैं। लिहाजा, अमेरिका ने प्लान बी के तहत ही पाकिस्तान को एफ-16 पैकेज दिया है और उसके बाद बाढ़ राहत पैकेज भी पाकिस्तान को दिया गया है।

अमेरिका के दौरे पर जनरल बाजवा
पिछले महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की थी और अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां वो अमेरिकी रक्षा मंत्री से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं, पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि, अमेरिका ने एक बार फिर से पाकिस्तान के साथ रिश्तों में संतुलन बनाना शुरू कर दिया है। जीजीरो से बात करते हुए पाकिस्तान इनिशिएटिव के निदेशक उजैर यूनिस कहते हैं कि, "अमेरिका आखिरकार यह मान रहा है कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बारे में नई दिल्ली से पूरी तरह से घोषणाओं के बावजूद, भारत की प्राथमिकताएंम सस्ते रूसी तेल और रूसी हथियारों से आगे नहीं है।" उन्होंने कहा कि, अमेरिका आखिरकार ये महसूस कर रहा है, कि भारत का बहुत जल्द रूसी तेल और हथियारों से पीछा नहीं छूटने वाला है, लिहाजा वो अब पाकिस्तान से रिश्ते संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ गया है।












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