बाइडेन और पाकिस्तान की खतरनाक जुगलबंदी, क्या धोखा खाने से पहले हो जाना चाहिए भारत को सतर्क?
ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि, अमेरिकी डॉलर्स से आतंकवादी संगठनों का निर्माण करते करते खुद पाकिस्तान आतंकवाद का प्रमुख अड्डा बन गया है और पाकिस्तान में UN द्वारा मोस्ट वांटेड ठहराए गये दर्जनों आतंकवादी विचरण करते हैं।
नई दिल्ली, सितंबर 17: संयुक्त राज्य अमेरिका शायद ही कभी अपनी गलतियों से सीखता है, और महान अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक हैंस मोर्गेंथौ के चर्चित कथन "रणनीतिक संकीर्णता" से पीड़ित है, जिससें उन्होंने कहा था, कि हर एक अमेरिकी राष्ट्रपति को लगता है, कि दुनिया अमेरिका के बताए जाने वाले रास्ते की प्रतीक्षा कर रहा है और जब अमेरिका से संकेत मिलेगा, तभी दुनिया उस रास्ते पर कदम बढ़ाएगी। लिहाजा, हर अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी इसी 'गलत' धारणा के साथ अपनी नीतियां तैयार करते हैं। जैसे मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जिन्होंने पाकिस्तान के साथ खतरनाक आलिंगन करना शुरू कर दिया है और जियो पॉलिटिक्स के जानकर ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक, पाकिस्तानको लेकर अमेरिका फिर से वही गलतियां करने जा रहा है, जो पिछले राष्ट्रपतियों ने किया था। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है, कि धोखा खाने से पहले ही भारत को सतर्क रहना चाहिए।

पाकिस्तान की फिर से खतरनाक मदद
ब्रह्मा चेलानी ने प्रोजेक्ट सिंडिकेट के लिए लिखे गये अपने एक लेख में इस बात का जिक्र करते हुए कहा है कि, जो बाइडेन भी पाकिस्तान के साथ प्यार की पिंगे पढ़ने में व्यस्त हैं, जबकि उनसे पहले के सभी अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने पाकिस्तान की दुष्ट इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस एजेंसी (आईएसआई) के साथ अमेरिका की लंबी साझेदारी ने पाकिस्तान को इस काबिल बना दिया, कि वो अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ एक कम तीव्रता वाले युद्ध और पड़ोसी देशों में सशस्त्र जिहादियों की तैनाती कर वहां आतंकवाद को संस्थागत बना सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा है कि, पाकिस्तान ने हमेशा एक शासन स्थापित करके अफगानिस्तान को उपनिवेश बनाने की कोशिश की है, जिसे वो अपने तरह से नियंत्रित करना चाहता है। इसलिए आईएसआई ने 1990 के दशक की शुरुआत में तालिबान का निर्माण किया। फिर आईएसआई द्वारा अफगानिस्तान में अमेरिका की अपमानजनक हार के बाद तालिबान के नियंत्रण में वापस आने के बाद, पाकिस्तान ने अपनी इच्छा पूरी कर ली है।

आतंकियों के लिए जन्नत बना पाकिस्तान
ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि, अमेरिकी डॉलर्स से आतंकवादी संगठनों का निर्माण करते करते खुद पाकिस्तान आतंकवाद का प्रमुख अड्डा बन गया है और पाकिस्तान में यूनाइटेड नेशंस द्वारा मोस्ट वांटेड ठहराए गये दर्जनों आतंकवादी स्वेच्छा पूर्वक विचरण करते हैं और कई आतंकियों को तो हाल के दिनों तक सरकारी सुरक्षा उपलब्ध करवाई गई थी। अमेरिका ने अल-कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन - अमेरिकी इतिहास में सबसे खराब आतंकवादी हमले के पीछे का मास्टरमाइंड, पाकिस्तान सैन्य अकादमी के बगल में पाया। वहीं, 9/11 के साजिशकर्ता - खालिद शेख मोहम्मद, अल-कायदा के तीसरे कमांडर को भी पाकिस्तान में ही पकड़ा गया था और उसके अलावा भी हाफिज सईद, मौलाना मसूद अजहब, मोहम्मद सलाहुद्दीन जैसे आतंकवादी पाकिस्तान में ही रहते हैं, फिर भी, आतंकवादी संबंधों के बावजूद, पाकिस्तान की राजनीतिक रूप से शक्तिशाली सेना, जिसमें उसकी आईएसआई भी शामिल है, हमेशा से बच निकलने में कामयाब रही है।

बाइडेन का 'दोगला वचन'
9/11 हमलों की हाल की 21वीं बरसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी और उन्हें रोकने का वचन दिया था और कहा था, कि 'जहां भी वो मौजूद हैं, हम उन्हें वहां खोज लेंगे।' जबकि, इसी अमेरिका को ट्विन टावर पर हुए हमले के बाद ओसामा बिन लादेन को खोजने और मारने में 10 सालों से ज्यादा वक्त लगा, जबकि वो पाकिस्तानी सेना के हेडक्वार्टर के बगल में ही रहता था। लेकिन, यह सब देखने के बाद भी जो बाइडेन ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को बदल दिया और पाकिस्तान को फिर से मदद देनी शुरू कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकियों का मददगार देश बताकर उसे दी जाने वाली तमाम सहायताएं खत्म कर दी थीं, लेकिन जो बाइडेन ने उन मददों को फिर से शुरू कर दिया है और यह देखने के बाद भी शुरू किया है, कि पाकिस्तान अभी भी एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में है और उसने आतंकवाद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

गलत नीति या डबल गेम?
जबकि, ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक, पाकिस्तान की खराब आर्थिक हालात का फायदा अमेरिका काफी अच्छे से उठा सकता था और उसे आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बदले और आतंकवादी समूहों से रिश्ता तोड़ने के बदले उसे आर्थिक सहायता की पेशकश कर सकता था। लेकिन, अमेरिका ने ऐसा कुछ नहीं किया और उल्टे पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन दिलाने का रास्ता भी साफ कर दिया। अमेरिकी दखल के बाद ही आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर का राहत पैकेज देने का ऐलान किया है, जिसके बूते पाकिस्तान अपनी खराब आर्थिक हालातों से कुछ महीनों के लिए पीछे छुड़ा सकता है। सिर्फ आईएमएफ से लोन दिलाना ही नहीं है, बल्कि अमेरका और चीन का समर्थन हासिल कर पाकिस्तान एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट से भी बाहर आने क करीब है, जो आतंकियों के वित्तपोषण पर नजर रखने वाली संस्था है। यानि, बाइडेन प्रशासन पाकिस्तान को डबल फायदा देने वाला है। जबकि, हकीकत ये है, कि साल 2018 के बाद से पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट से बाहर आने के लिए कोई काम नहीं किया है और उसके खिलाफ जितने सबूत हैं, उसके लिए उसे ब्लैक लिस्ट में रखा जाना चाहिए। लेकिन, अमेरिका ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उसे अफगानिस्तान में पाकिस्तान की मदद चाहिए थी।

पाकिस्तान को एफ-16 की मदद
भारत के साथ अमेरिका के करीबी रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचाने के जोखिम के बावजूद अमेरिका ने इस महीने पाकिस्तान को अपने एफ-16 फाइटर जेट्स बेड़े को आधुनिक बनाने और अपडेट करने के लिए 450 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की है और जाहिर तौर पर बाइडेन की ये घोषणा पाकिस्तान को गले लगाना है। दशकों से, अमेरिका ने पाकिस्तान को जहरीली दांतों से लैस किया है और बाद में वही काम चीन ने करना शुरू किया और पाकिस्तान को हथियारों से लैस कर उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर रहा है। अमेरिका ने सबसे पहले 1980 के दशक में एफ-16 फाइटर जेट्स पाकिस्तान को दिए थे और वो इनाम था, क्योंकि सोवियत संघ को अफगानिस्तान से भगाने में पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया था। लेकिन, पाकिस्तान ने इन हथियारों का इस्तेमाल भारत के ही खिलाफ किया है और जब फरवरी 2019 में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार झड़प हुई थी, तो पाकिस्तान ने एफ-16 को उतारा था, जिसे अब अमेरिका अपग्रेड करेगा। तो क्या बाइडेन प्रशासन भारत के खिलाफ पाकिस्तान को मजबूत नहीं कर रहा है?

एफ-16 से आतंकवाद का मुकाबला?
अमेरिका ने इस सौदे को उचित ठहराते हुए कहा कि, पाकिस्तान के एफ-16 को अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस करने का मकसद आतंकवाद का मुकाबला करना है। लेकिन, अमेरिका की ये दलील समझ से इसलिए बाहर है, क्योंकि भला फाइटर जेट से कब और कैसे आतंकवाद का मुकाबला किया गया है, खासकर जब आतंकवादी अपने ही देश में हों। वहीं,आज तक पाकिस्तान ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई मे एफ-16 को नहीं शामिल किया है। वहीं, अमेरिका ने बिना भारतीय अधिकारियों से बात किए पाकिस्तान के साथ ये डील की है, लिहाजा भारतीय अधिकारियों के मन में अमेरिका को लेकर संदेह और भी गहरा होगा, जो भारत और अमेरिका के रिश्ते के लिए सही नहीं है। इसके साथ ही बाइडेन प्रशासन ने आज तक भारत और चीन सीमा पर चल रहे विवाद के बारे में कुछ नहीं कहा है और बाइडेन के विदेश विभाग ने दोनों देशों से इस तनाव का शांतिपूर्ण समधान निकालने की ही अपील की है, यानि अमेरिका ने भारत और चीन विवाद में तटस्थ रहना चुना है, लेतिन ब्रह्रा चेलानी का मानना है, कि चीन के ग्राहक पाकिस्तान के एफ-16 विमान को अत्याधुनिक बनाकर अमेरिका ने भारत के साथ संबंधों को खराब करने का विकल्प चुना है। (ISI प्रमुख)

पाकिस्तान के सहारे भारत से गेम
बाइडेन प्रशासन ने जिस तरह से पाकिस्तान के साथ गलबाहियां शुरू की हैं, जाहिर तौर पर उसने उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था, कि अफगानिस्तान में तालिबान की मदद करने के लिए अमेरिका पाकिस्तान को दंडित कर सकता है। पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने या फिर आतंकवाद के लिए उसे उत्तरदायी ठहराना तो दूर, अमेरिका ने पाकिस्तान को नाटो का सहयोगी तक बता दिया और अमेरिका अभी तक 17 देशों को ये स्टेटस दे चुका है और जाहिर है, उसमें भारत नहीं है। ब्रह्मा चेलानी का कहना है, कि अमेरिका के इस नजरिए से आश्चर्य में नहीं आना चाहिए, क्योंकि जब तालिबान ने पाकिस्तान की मदद से अमेरिकी सैनिकों के सिर कलम किए थे, उस वक्त भी अमेरिका ने कुछ नहीं किया था, इसके बजाय, अमेरिका ने पाकिस्तान को इस क्षेत्र में अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए एक मोहरा बनाकर रखा हुआ है। अपने अफगान उपद्रव के बाद अमेरिका की कमजोर स्थिति ने आईएसआई पर अमेरिका की निर्भरता को ही बढ़ा दिया है, जो तालिबान तक बाइडेन प्रशासन की पहुंच को आसान बनाता है।












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