PM मोदी की यात्रा से पहले भारत को किलर ड्रोन बेचना चाहता है अमेरिका, बाइडेन प्रशासन बना रहा दबाव?
India-US Drone Deal: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजकीय यात्रा से पहले अमेरिका ने भारत को किलर ड्रोन खरीदने का बड़ा ऑफर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है, कि मोदी सरकार ड्रोन डील को पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले फाइनल कर ले। न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से परिचित दो लोगों ने इसकी पुष्टि की है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि नरेन्द्र मोदी की यात्रा से पहले बाइडेन प्रशासन चाहता है, कि नई दिल्ली लाल फीताशाही को दरकिनार करते हुए दर्जनों अमेरिका निर्मित ड्रोन खरीदने के लिए सौदा फाइनल कर ले। अमेरिका चाहता है, कि भारत इस ड्रोन डील को जल्द से जल्द फाइनल कर ले।

भारत ने काफी वक्त से संयुक्त राज्य अमेरिका से बड़े सशस्त्र ड्रोन खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। लेकिन, नौकरशाही बाधाओं ने SeaGuardian ड्रोन सौदे में बाधा उत्पन्न की है, लिहाजा काफी लंबे वक्त से भारत और अमेरिका के बीच ड्रोन खरीदने को लेकर ये सौदा अटका पड़ा है। वहीं, अब जब पीएम मोदी अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं, तो ड्रोन डील में शामिल अमेरिकी वार्ताकार चाह रहे हैं, कि भारत इस डील को 22 जून से पहले फाइनल कर ले।
क्या भारत ड्रोन डील फाइनल करेगा?
इस डील पर नजर रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा तय है और अमेरिकी विदेश विभाग के साथ साथ पेंटागन और व्हाइट हाउस चाहता है, कि भारत MQ-9B सीगार्डियन ड्रोन खरीदने के लिए सौदा फाइनल करे।
इस डील पर नजर रखने वाले दो सूत्रों ने कहा है, कि बाइडेन प्रशासन चाहता है, कि भारत इस डील पर जल्द से जल्द फैसला ले। आपको बता दें, कि MQ-9B सीगार्डियन ड्रोन को अमेरिका की हथियार कंपनी जनरल एटॉमिक्स ने तैयार किया है और भारत 30 ड्रोन खरीदने के लिए अमेरिका से बात कर रहा है।
सूत्रों ने कहा, कि पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान पीएम मोदी और जो बाइडेन के बीच सैनिकों के लिए वाहन के साथ साथ कुछ और अन्य हथियारों के भारत में उत्पादन को लेकर भी बात हो सकती है, जिसे बनाने के लिए अमेरिका, भारत को टेक्नोलॉजी दे सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस, विदेश विभाग और पेंटागन के प्रवक्ताओं ने इस वार्ता पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ गहरे होते संबंधों को अपनी नीति का आधार बनाया है, इस साल दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच एडवांस मिलिट्री टेक्नोलॉजी को लेकर सहयोग होने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
MQ-9 प्रिडिएटर ड्रोन डील क्यों फंसा है?
पीएम मोदी के अमेरिका के दौरे को लेकर न्यूज9लाइव की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत और अमेरिका के बीच में कई सैन्य समझौते हो सकते हैं, जिसके तहत भारत में हथियारों के निर्माण को लेकर घोषणाएं हो सकती हैं। भारत में जेट इंजन के निर्माण को लेकर पहले ही बात फाइनल हो चुकी है और अब पीएम मोदी के दौरे के दौरान उसकी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।
वहीं, भारत अमेरिका को 18 MQ-9 प्रिडिएटर ड्रोन खरीदने का ऑर्डर दे सकता है और इस डील की कीमत 1.8 अरब डॉलर होगी। वहीं, एक रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि फिलहाल भारत अपनी नौसेना के लिए दो MQ-9 प्रिडिएटर ड्रोन, लीज पर लिया हुआ है और अगर इंडियन नेवी को ये ड्रोन पसंद आता है, फिर सरकार इस ड्रोन को खरीदने पर विचार करेगी। इस डील पर करीब 800 करोड़ का खर्च आना है।
दरअसल, MQ-9 प्रिडिएटर ड्रोन को भारत सिर्फ खरीदना नहीं, बल्कि भारत में बनान भी चाहता है और इस सौदे के फंसने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यही है। भारत चाहता है, कि वो इस ड्रोन के पार्ट्स का निर्माण भारत में करे और इसके लिए भारत को टेक्नोलॉजी दी जाए, लेकिन अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं है। इसीलिए, भारत ने 30 यूनिट की जगह इसका ऑर्डर 18 यूनिट का कर दिया है और उसे भी खरीदा जाए या नहीं, उसपर विचार इंडियन नेवी से फिडबैक मिलने के बाद लिया जाएगा।

MQ-9 प्रिडिएटर ड्रोन को खासतौर पर समुद्री लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया है और भारत छोड़कर क्वाड के सभी देश इस ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। इस ड्रोन के जरिए ना सिर्फ समुद्र में दुश्मनों की जासूसी की जा सकती है, बल्कि हमला भी किया जा सकता है।
ये ड्रोन सैटेलाइट से ऑपरेट किया जाता है और ये लगातार 35 घंटों तक 45 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने की काबिलियत रखता है। इसके साथ ही, इसमें रडार और अत्याधुनिक सेंसर्स लगे हुए हैं। ये ड्रोन अपने साथ मिसाइल और बारूद को लेकर उड़ान भरता है, लिहाजा ये किसी भी वक्त दुश्मन के टारगेट को तबाह कर सकता है।












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