Bhutan King Arrive in India: भारत पहुंचे भूटान के किंग जिग्मे वांगचुक, जानें 3 दिनों का दौरा कितना है अहम?
भारत ने भूटान के साथ अग्रेजी विरासत को ही आगे बढ़ाया, जबकि भारत ने 8 अगस्त, 1949 को भूटान के साथ मित्रता की संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें भूटान की रक्षा की जिम्मेदारी भारत के पास है।

Bhutan King's India Visit: भूटान के प्रधानमंत्री की पिछले हफ्ते चीन को लेकर विवादित बयान के बाद भूजान के राजा जिग्मे वांगचुक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के निमंत्रण पर तीन दिवसीय यात्रा पर सोमवार को भारत पहुंचे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली एयरपोर्ट पर उनकी आगवानी की है। भूटान के राजा की आगवानी करने के बाद भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच "घनिष्ठ और अद्वितीय संबंधों" को और मजबूत करेगी।
भारत दौरे पर भूटान के राजा
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्विटर पर लिखा है, कि "भूटान के राजा, जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के भारत आगमन पर उनका स्वागत करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं। उनकी यात्रा भारत-भूटान की करीबी और अनूठी साझेदारी को और मजबूत करेगी।" भूटान नरेश के साथ भूटान के विदेश मंत्री डॉ. टांडी दोरजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी भारत आए हैं। अपनी यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित रूप से उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया है। सबसे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और वरिष्ठ अधिकारी भी भूटान नरेश से मुलाकात करेंगे। राजा जिग्मे वांगचुक की यात्रा भारत और भूटान दोनों को द्विपक्षीय सहयोग की पूरी श्रृंखला का मूल्यांकन करने का मौका देगी, क्योंकि दोनों देशों के बीच विशेष मित्रता और सहयोगी संबंध है, जो आपसी विश्वास पर टिका हुआ है। इसके साथ ही, भूटान की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी भारत के ऊपर है, लिहाजा भूटान क्षेत्र में चीन की नजर को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत होगी।

भारत-भूटान में हैं काफी अहम संबंध
भारत और भूटान के बीच काफी करीबी संबंध हैं और दोनों देशों के बीच के लोगों के बीच भी पारिवारिक रिश्ते हैं। भारत और भूटान के लोगों के बीच शादी ब्याह भी होते हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान इस रिश्ते को और मजबूत करने की कोशिश की गई, क्योंकि चीन के साथ भारत का तकरार बढ़ा है। भारत और भूटान के बीच अनूठे संबंध को अगस्त 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान की यात्रा की थी। इसके अलावा, जनवरी 2023 में भारतीय विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने भी भूटान का दौरा किया। वहीं, फरवरी 2023 में, भूटान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष वांगचुक नामग्याल के नेतृत्व में भूटान के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, भारत की राष्ट्रपति ने कहा था, कि भारत दोनों देशों के बीच बहुमुखी और अद्वितीय मित्रता को बहुत महत्व देता है। राष्ट्रपति ने कहा, कि इस साल भूटान सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) के समूह के देशों से आगे निकल जाएगा और 2034 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने की राह पर चल पड़ेगा।
स्पेशल संधि में बंधे हैं भारत और भूटान
आपको बता दें, कि भारत-भूटान संबंधों का मूल ढांचा दोनों देशों के बीच 1949 में हस्ताक्षरित मित्रता और सहयोग की संधि है, जिसे फरवरी 2007 में नवीनीकृत किया गया था। द्विपक्षीय संबंधों को दोनों देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान से आगे बढ़ाया गया है। वहीं, भूटान की विदेश नीति भी भारत ही तय करता है, जबकि 50 देशों के साथ ही भूटान के साथ राजनयिक संबंध हैं, और सिर्फ भारत, बांग्लादेश और कुवैत में ही भूटान में दूतावास हैं। भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से किसी के साथ भी औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं, जिसको लेकर चीन बौखलाया रहता है और चीन की कोशिश लगातार, किसी भी तरह से भूटान में अपना पैर पसारने की है, ताकि वो पूर्वोत्तर भारत के लिए खतरा पैदा कर सके।
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