शोध में दावा, कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार को कम करती है BCG वैक्सीन
वाशिंगटन। टीबी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली बीसीजी वैक्सीन अब कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ भी असर दिखा रही है। इसे लेकर अमेरिकन रिसर्च पेपर में दावा किया गया है। इसमें लिखा है कि बीसीजी किसी समुदाय में कम से कम पहले 30 दिन में कोरोना वायरस के संक्रमण को धीमा कर देती है। ये शोध साइंस अडवांस नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ है। जिसमें अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस ने कहा है कि जिन देशों में बीसीजी वैक्सीन को लगाना अनिवार्य है, वहां कोविड-19 आउटब्रेक के पहले 30 दिनों में संक्रमण फैलने की दर और मृत्यु दर कम दर्ज की गई है।

शोध में कहा गया है कि अगर दशकों पहले ही अमेरिका में इस वैक्सीन को अनिवार्य कर दिया गया होता, तो 29 मार्च तक केवल 468 लोगों की मौत होती। जबकि इस तारीख तक 2467 लोगों की मौत हुई है। इसमें कहा गया है कि भारत और चीन जैसे देशों के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में बीसीजी शामिल है, इसलिए यहां मृत्यु दर कम रही है। बीसीजी का टीका बच्चों को जन्म के बाद 15 दिनों के भीतर लगाया जाता है, जो इम्युनिटी को मजबूत करता है और कई तरह के वायरस से रक्षा करता है। वहीं जब करीब 8 महीने पहले कोविड-19 फैलना शुरू हुआ था, उसके बाद से ही बीसीजी वैक्सीन को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
अमेरिका में हुए इस शोध में पहले 30 दिनों के भीतर 135 देशों के कोविड-19 के बढ़ते मामलों और 134 देशों में होने वाली मृत्यु का विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ता का कहना है कि बीसीजी वैक्सीन के अनिवार्य होने और कोविड-19 संक्रमण कर्व के फ्लैट होने में संबंध देखा गया है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि बीसीजी कोई मैजिक बुलेट नहीं है। इस मामले में डॉक्टर अनंत भान का कहना है कि बीसीजी वैक्सीन का कोविड-19 से बचाव करना वैज्ञानिक नहीं लगता है। उन्होंने कहा, 'ये एक कयास ही लगता है क्योंकि भारत और ब्राजील में भारी संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं, जबकि यहां बीसीजी टीके लगाए जाते हैं।'
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