बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कैसी होगी, क्या फिर से होंगे चुनाव या सेना की कठपुतली बनेंगी खालिदा जिया? जानिए
Bangladesh Interim Government Shape Up: बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकार उज ज़मान ने सोमवार को शेख हसीना की सरकार का पतन होने के बाद ऐलान किया था, कि देश में एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा और उसके लिए राष्ट्रपति से चर्चा के बाद कोई फैसला लिया जाएगा।
लेकिन यहां एक बात ध्यान देने वाली है, कि जब उन्होंने कहा कि देश की मुख्य राजनीतिक पार्टियों से चर्चा हुई है, तो उन्होंने प्रतिबंधित राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी का भी नाम लिया। साथ ही उन्होंने कहा, कि उन्होंने देश की सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों से मौजूदा हालात पर चर्चा की है, जो सच नहीं है।

उदाहरण के लिए, बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) से संपर्क नहीं किया गया।
इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के मंच (आरक्षण के खिलाफ छात्रों का आंदोलन) के कॉर्डिनेटर्स से भी संपर्क नहीं किया। उन्होंने कहा, कि प्रोफेसर आसिफ नजरुल ने छात्रों को सूचित करने की ज़िम्मेदारी ली थी। सेना प्रमुख की ये अस्पष्ट टिप्पणियां हैं। उन्होंने कहा, कि कल (आज मंगलवार को) चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। लेकिन, जब तक कोटा सुधार आंदोलन की मांगें पूरी तरह से लागू नहीं होतीं, तब तक प्रदर्शनकारियों को सतर्क रहना चाहिए, ये छात्र नेताओं का कहना है, तो फिर अंतरिम सरकार का गठन किस आधार पर होगा?
एक हकीकत ये भी है, कि मौजूदा आंदोलन में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वह अभूतपूर्व है। बांग्लादेश में कई लोगों का कहना है, कि ऐसा उत्साह तो 1969 के जन-विद्रोह में भी नहीं था, जिसका नेतृत्व संगठित नेतृत्व कर रहा था।
प्रोफेसर आसिफ नजरुल ने कहा, कि "कोटा सुधार आंदोलन का स्वरूप वैसा नहीं है, लेकिन मैंने अब तक इसके नेतृत्व में कोई गलती नहीं देखी है। बल्कि, आंदोलन को पहले से ज्यादा जन समर्थन मिला है और ऐसा लगता है, कि इसमें कोई कमी नहीं आई है। हम अपने अधिकारों की स्थापना के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार बहुत ही साधारण छात्रों के दृढ़ संकल्प को देख रहे हैं।"
प्रोफेसर आसिफ नजरुल के मुताबिक, "आवामी लीग सरकार ने जनता का समर्थन खो दिया है। सत्ता में बने रहने के लिए उन्होंने क्रूर बल का प्रयोग किया। हमने पार्टी के महासचिव की छात्र लीग के बारे में टिप्पणी सुनी और देखा कि कैसे हथियारबंद सत्तारूढ़ पार्टी के गुंडों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। इससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ गया। फिर (पूर्व) प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणियों से जले पर नमक छिड़क दिया।"
उन्होंने आगे कहा, कि "फिर राज्य प्रायोजित हिंसा में छह से सात लोग मारे गए। इससे भी प्रदर्शनकारियों में डर नहीं लगा। फिर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू हो गई। वह भी विरोध को दबा नहीं सकी, बल्कि छात्रों की संख्या दोगुनी हो गई। 4 अगस्त को करीब 100 लोग मारे गए। हमने आजादी के बाद के बांग्लादेश में किसी भी आंदोलन के दौरान निहत्थे लोगों की इतनी मौतें नहीं देखी हैं।"
दूसरी तरफ, बेगम खालिदा जिया को जेल से रिहा कर दिया गया है और शेख हसीना के बेटे ने कहा है, कि उनकी मां अब वापस बांग्लादेश नहीं लौटेंगी, तो फिर क्या अंतरिम सरकार के गठन में अवामी लीग के नेताओं को जगह मिलेगी? ये एक बड़ा सवाल है।
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने सोमवार को देश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना के इस्तीफे के बाद देश चलाने के लिए एक अंतरिम सरकार बनाने की इजाजत दे दी है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर से देश भर में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक धर्मों के कई घरों और पूजा स्थलों को आग लगा दी गई है। तो क्या हिंदुओं के खिलाफ हिंसा रूकेगी?
लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिम सरकार का गठन कैसे होगा, इसको लेकर अभी भी आम सहमति नहीं बन पाई है और सवाल ये भी बने हुए हैं, कि अंतिम सरकार का गठन हो भी जाए, तो देश में नये सिरे से आम चुनाव कब होंगे? ये कई सवाल हैं, जिनसे बांग्लादेश की जनता को दो-चार होना है।












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