इंटरपोल की मदद से शेख हसीना की वापसी चाहता है बांग्लादेश, भारत से पंगा लेने के मूड में मोहम्मद यूनुस?

Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस शायद भारत से लड़ाई के मूड में आ गये हैं और बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया जा सकता है।

अंतरिम सरकार के विधि सलाहकार आसिफ नजरूल ने आज कहा है, कि सरकार जुलाई और अगस्त में छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई 'हत्याओं और नरसंहार' में कथित रूप से शामिल भगोड़ों को गिरफ्तार करने और देश वापस लाने के लिए इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने का अनुरोध करेगी।

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सलाहकार आसिफ नजरूल ने आज सुबह अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में मामले की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद कहा, "यह कदम जल्द ही उठाया जाएगा।" न्यायाधिकरण, बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय परिसर में पुराने उच्च न्यायालय भवन में स्थित है। उन्होंने कहा, "हम ईमानदारी से काम करेंगे और उन्हें, जहां कहीं भी वे छिपे हों, वहां से वापस लाने को प्राथमिकता देंगे।"

आपको बता दें, कि जुलाई-अगस्त में हुए जन-विद्रोह के दौरान कम से कम 753 लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए थे।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी के कई लोगों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार की 60 से ज्यादा शिकायतें आईसीटी जांच एजेंसी और अभियोजन टीम के पास अक्टूबर के मध्य तक दर्ज की गई हैं।

आपको बता दें, कि भीषण प्रदर्शन के बाद शेख हसीना भागकर भारत आ गईं थीं और उसके बाद से भारत में ही रह रही हैं। मोदी सरकार ने शेख हसीना को फिलहाल शरण दे रखा है और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इसको लेकर स्थिति साफ नहीं हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की तरफ से कई बार मौखिक तौर पर भारत से शेख हसीना को वापस सौंपने की मांग की गई है, लेकिन हमारी जानकारी के मुताबिक, अभी तक आधिकारिक तौर पर बांग्लादेश की सरकार की तरफ से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग नहीं की गई है।

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भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि

भारत और बांग्लादेश ने 2013 में एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे 2016 में संशोधित किया गया था. ताकि दोनों देशों के बीच भगोड़ों के आदान-प्रदान को आसान और तेज बनाया जा सके। लेकिन, अभी तक प्रत्यर्पण का अनुरोध भारत सरकार को नहीं मिला है।

यह संधि कई भारतीय भगोड़ों, खास तौर पर पूर्वोत्तर के उग्रवादी समूहों से जुड़े लोगों के बांग्लादेश में छिपे होने और वहां से अपनी गतिविधियां चलाने को लेकर अस्तित्व में आई थी। इसका मकसद, बांग्लादेश में छिपे ऐसे लोगों की तत्काल भारत में वापसी सुनिश्चित करनी थी और बांग्लादेश को ऐसे लोग पनाहकार ना बनाएं, उसे भी सुनिश्चित करना था।

इसके अलावा, बांग्लादेश को भी जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) जैसे संगठनों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिनके कार्यकर्ता भारत के पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में छिपे पाए गए थे।

प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश को ऐसे व्यक्तियों को प्रत्यर्पित करना चाहिए "जिनके खिलाफ कार्यवाही की गई है... या जिन पर आरोप लगाया गया है, या जो प्रत्यर्पण योग्य अपराध करने के लिए दोषी पाए गए हैं, या फिर अनुरोध करने वाले देश की अदालत की तरफ से उसे वांटेड घोषित किया गया है।"

संधि के मुताबिक, प्रत्यर्पण योग्य अपराध वह है, जिसके लिए कम से कम एक वर्ष की सजा हो सकती है। इसमें वित्तीय अपराध भी शामिल हैं। महत्वपूर्ण बात यह है, कि किसी अपराध को प्रत्यर्पण योग्य बनाने के लिए, दोहरी आपराधिकता का सिद्धांत लागू होना चाहिए, जिसका अर्थ है, कि वो अपराध दोनों देशों में दंडनीय होना चाहिए।

लेकिन, जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये नामुमकिन है, कि भारत सरकार शेख हसीना को किसी भी हाल में बांग्लादेश को सौंपे। लिहाजा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार भारत से पंगा लेने के मूड में है और इंटरपोल नोटिस अगर जारी होता है, तो दोनों देशों के बीच का विवाद और बढ़ेगा।

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