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बांग्लादेश में यूनुस सरकार का बड़ा एक्शन, शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर लगाया प्रतिबंध, क्या है पूरा मामला

Bangladesh Politics: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इसमें पार्टी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर होने वाली सारी गतिविधियां भी शामिल हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शनिवार, 10 मई को अंतरिम सरकार की बैठक बुलाई गई थी। एडवाइजरी काउंसिल की विशेष बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस मीटिंग की अध्यक्षता अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कर रहे थे।

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Bangladesh में ICT Act में संशोधन को मंजूरी

बैठक में इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्राइब्यूनल एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी गई। यह भी निर्णय लिया गया कि इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्राइब्यूनल एक्ट (ICT Act) में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद बांग्लादेश में किसी भी राजनीतिक दल, उसके समर्थक या सहयोगी संगठनों को सजा दी जा सके। इस संशोधन के बाद अब अवामी लीग और उससे जुड़े संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत कार्रवाई संभव होगी।

प्रेस विंग द्वारा जारी बयान में कहा गया,"एडवाइज़री काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अवामी लीग की सभी गतिविधियां-ऑनलाइन और ऑफलाइन-तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित रहेंगी, जब तक कि ICT एक्ट के तहत चल रहे मुकदमे की कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती।"

बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि यह निर्णय देश की सुरक्षा, संप्रभुता और जुलाई आंदोलन के नेताओं व गवाहों की सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। बैठक में यह भी तय किया गया कि जुलाई 2024 में हुई घोषणाओं को अगले 30 दिनों के भीतर पूरी तरह लागू किया जाएगा। लीगल एडवाइज़र आसिफ़ नज़रुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की जानकारी दी और बताया कि अवामी लीग पर प्रतिबंध को लेकर सर्कुलर अगले कार्यदिवस में जारी कर दिया जाएगा।

Bangladesh Politics: जनता और छात्रों के दबाव में लिया गया फैसला

बीते कुछ दिनों में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) और अन्य संगठनों ने अवामी लीग को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर प्रतिबंधित करने की मांग उठाई थी। एनसीपी के दक्षिणी क्षेत्र के आयोजक हसनत अब्दुल्ला ने इसक विरोध की शुरुआत की थी। इनके नेतृत्व में गुरुवार रात से ही अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के आवास के सामने धरना जारी था। इसके बाद स्टूडेंट्स यूनियन, इस्लामी छात्र शिबिर, यूनाइटेड पीपुल्स बांग्लादेश (UPB) जैसे संगठन भी इस आंदोलन में शामिल हो गए।

शनिवार दोपहर शाहबाग चौराहे पर बड़ी जनसभा का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए और देर रात तक अंतरिम सरकार के फैसले पर जश्न मनाते रहे। एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने फेसबुक पर एक पोस्ट में चुनाव आयोग से अवामी लीग का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अपील की। अंतरिम सरकार के सलाहकार सजीब भुइयां ने भी अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर कहा कि यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो रही है और इसके लिए ICT एक्ट में सभी संशोधन किए जा चुके हैं।

Sheikh Hasina Awami League के 15 साल के शासन का अंत

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में हुए जन आंदोलन के कारण अवामी लीग का 15 साल पुराना शासन समाप्त हो गया था। उसके बाद से शेख हसीना ने भारत में शरण ले रखी है। नई अंतरिम सरकार कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भारत से कर चुकी है। 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय ने अवामी लीग के छात्र संगठन बांग्लादेश छात्र लीग पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था।

मंत्रालय ने इसे आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 के तहत प्रतिबंधित घोषित किया था। इस संगठन पर हत्या, यातना, बलात्कार, छात्रावासों में सीट ट्रेडिंग और यौन उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगे हैं। नोटिफिकेशन के अनुसार, "15 जुलाई से शुरू हुए छात्र आंदोलनों के दौरान छात्र लीग के कार्यकर्ताओं ने निहत्थे छात्रों और आम जनता पर हमले किए, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई।"

अवामी लीग के अन्य सहयोगी संगठनों पर भी कार्रवाई हुई है। अंतरिम सरकार के सलाहकार सजीब भुइयां ने घोषणा की कि अवामी लीग के सहयोगी संगठन जैसे युवा लीग और स्वेच्छाचारी लीग पर भी प्रतिबंध की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

Bangladesh Politics: इतिहास में पहली बार पार्टी पर आतंकवाद कानून के तहत कार्रवाई

1949 में स्थापित अवामी लीग ने पहले पूर्वी पाकिस्तान और बाद में 1971 के मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उसी पार्टी पर आतंकवाद कानून के तहत कार्रवाई हुई है, जो बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

इस फैसले के बाद अब बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा को लेकर तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। क्या बांग्लादेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरा है या यह कदम राष्ट्र की सुरक्षा और शांति के लिए जरूरी था-यह आने वाला समय बताएगा।

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