छोटे से देश बांग्लादेश ने भी दी श्रीलंका को बड़ी राहत, बड़ी घोषणा, चीन बोला- और लोन देने को तैयार
नकदी की तंगी से जूझ रहा श्रीलंका एक गहरे आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है और ऐसे नाजुक समय में बांग्लादेश ने श्रीलंका को बड़ी राहत दी है।
ढाका/कोलंबो, मई 09: भीषण आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका की भारत लगातार मदद कर रहा है और अब भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश ने भी श्रीलंका को बहुत बड़ी राहत देने की घोषणा कर दी। लेकिन, जो श्रीलंका लगातार चीन से कर्ज लेता रहा, जिस श्रीलंका ने चीन के लिए भारत जैसे देश को दरकिनार कर दिया, उस चीन ने मुसीबत में फंसे श्रीलंका 'मरने' के लिए छोड़ दिया। यहां तक की, चीन इस वक्त भी श्रीलंका को और लोन देने की ही बात कर रहा है, जबकि बांग्लादेश ने बड़ा दिल दिखाया है, जबकि चीन ने श्रीलंका को और लोन देने की पेशकश की है।

बांग्लादेश ने दी बड़ी राहत
नकदी की तंगी से जूझ रहा श्रीलंका एक गहरे आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है और ऐसे नाजुक समय में बांग्लादेश ने करेंसी स्वैप डील के तहत द्वीप राष्ट्र श्रीलंका को 200 मिलियन अमरीकी डालर के ऋण की अवधि को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। बांग्लादेश बैंक के निदेशकों ने रविवार को हुई बैठक में श्रीलंका को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक के प्रवक्ता सेराजुल इस्लाम ने कहा कि, ऋण की शर्तों को अपरिवर्तित रखते हुए श्रीलंका को कर्ज चुकाने के लिए समय सीमा का विस्तार कर दिया गया है। आपको बता दें कि, श्रीलंका वो पहला देश है, जिसे बांग्लादेश ने मई 2021 में एक समझौते के चतहत कर्ज दिया था और श्रीलंका को वो कर्ज तीन महीने के भीतर चुकाना था, लेकिन फिर श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया है, ऐसे में बांग्लादेश ने कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ा दी है।

पिछले हफ्ते भेजी थी मानवीय सहायता
बांग्लादेश ने पिछले गुरुवार को श्रीलंका को आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति भेजी थी क्योंकि यह द्वीप देश स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। स्टेट गेस्ट हाउस पद्मा में आयोजित एक टोकन हैंडओवर समारोह में बांग्लादेशी विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और स्वास्थ्य मंत्री जाहिद मालेक ने बांग्लादेश में श्रीलंका के उच्चायुक्त सुदर्शन डीएस सेनेविरत्ने को दवाओं के बॉक्स सौंपे। मोमेन ने दवा की आपूर्ति को बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच एकजुटता और दोस्ती की अभिव्यक्ति के रूप में वर्णित किया, ऐसे समय में जब दोनों देश 50 साल के राजनयिक संबंधों का जश्न मना रहे हैं। इस बीच, सेनेविरत्ने ने कहा कि श्रीलंका बांग्लादेश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को महत्व देता है और इसे और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

संकट में फंसे श्रीलंका की मदद
एसेंशियल ड्रग्स कंपनी लिमिटेड, बांग्लादेश में एक राज्य के स्वामित्व वाली फार्मास्यूटिकल्स कंपनी, और बांग्लादेश एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्रीज ने श्रीलंका को उपहार के रूप में 100 मिलियन टका की दवाओं का योगदान दिया है। संकटग्रस्त श्रीलंका ने पांच सप्ताह में दूसरी बार विदेशी कर्ज के विरोध और भयावह हड़ताल के बाद शुक्रवार को आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है। श्रीलंका तीव्र भोजन और बिजली की कमी से जूझ रहा है, जिससे देश को अपने पड़ोसियों से मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। COVID-19 महामारी के दौरान पर्यटन पर रोक के कारण विदेशी मुद्रा की कमी को मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। देश पर्याप्त ईंधन और गैस नहीं खरीद पा रहा है, जबकि लोगों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है।

दक्षिण एशिया में चीन के कर्ज का फंदा
आपको बता दें कि, दक्षिण एशिया में चीन का कर्ज 4.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 40 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। पाकिस्तान की जीडीपी में चीन का कर्ज 10 प्रतिशत से ज्यादा है और श्रीलंका की स्थिति भी पाकिस्तान से अलग नहीं है। श्रीलंका ने चीन से अरबों डॉलर का कर्ज ले रखा है और जब इस साल जनवरी में श्रीलंका के राष्ट्रपति ने चीन से कर्ज में राहत देने की गुहार लगाई थी, तो चीन ने साफ इनकार कर दिया था। वहीं, भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए अपना खजाना भी खोल दिया है और भारत लगातार श्रीलंका में खाद्य सामग्रियों के साथ साथ तेल की भी सप्लाई कर रहा है। इसके साथ ही भारत की तरफ से श्रीलंका को एक अरब डॉलर का क्रेडिट लाइन और डेढ़ अरब डॉलर की मदद भी की गई है।

चीन के जाल में फंसा श्रीलंका
आपको बता दें कि, श्रीलंका की विकराल स्थिति का दोष पूरी तरह से राजपक्षे इनकॉर्पोरेटेड के दरवाजे पर है, जिसने बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर चीन से काफी ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लिया और देश को गंभीर आर्थिक तनाव में ला खड़ा किया है। आज की स्थिति ये है, कि श्रीलंका में आपातकाल लगा दिया गया है और जनता के पास राजपक्षे परिवार के शासन की स्थिति का विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लिहाजा, देश में भारी अराजकता की स्थिति है और श्रीलंका के फिर से गृहयुद्ध में फंसने की आशंका है।












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