Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bangladesh: मुस्लिम कट्टरपंथियों की कठपुतली बने मोहम्मद यूनुस, भारत को क्यों खतरनाक संकेत दे रहा बांग्लादेश?

Bangladesh News: बांग्लादेश में इस महीने की शुरुआत में जिस तरह से शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ, उसको लेकर पहले ही शक था कि इसमें पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी मुसलमानों का हाथ है। बीते दो-तीन दिनों में बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने जिस तरह के फैसले लिए हैं, उससे वह शक यकीन में बदल रहा है।

पहली बात तो ये है कि शेख हसीना की आवामी लीग सरकार के सत्ता से हटे एक महीना होने को है। लेकिन, बांग्लादेश में हालात सामान्य नहीं हुए हैं। वहां अपराधियों और उग्रवादी तत्वों का अब भी बोलबाला है। ढाका शहर के एक झील से जिस तरह से संदिग्ध अवस्था में युवा महिला टीवी पत्रकार का शव मिला है, वह मौजूदा हालत की एक बानगी भर है।

bangladesh news

अभिव्यक्ति की आजादी पर एक और क्रूर हमला- साजीब वाजेद
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गाजी टीवी में एडिटर के तौर पर कार्यरत रहनुमा सारा का शव ढाका शहर के हातिर झील से बरामद हुआ है। शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद का कहना है कि यह मौत देश में अभिव्यक्ति की आजादी पर एक और 'क्रूर हमला' है। उनके मुताबिक गाजी टीवी एक सेक्युलर टीवी न्यूज चैनल है, जिसके मालिक और पूर्व मंत्री गुलाम दस्तागिर गाजी को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था।

जमात-ए-इस्लामी और इस्लामी छात्र शिविर से प्रतिबंध हटा
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ छात्रों के जो हिंसक प्रदर्शन हुए थे, उसको लेकर पहले से ही रिपोर्ट थी कि उसमें प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी और उसके बैन किए गए इस्लामी छात्र शिविर जैसे कट्टरपंथी संगठन का हाथ है। लेकिन, बुधवार को मोहम्मद यूनुस की सरकार ने यह कहते हुए दोनों संगठनों से ही प्रतिबंध हटा लिया है कि ये आतंकी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं।

जमात-ए-इस्लामी को सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी थी राहत
आवामी लीग सरकार ने 1 अगस्त को हालात बेकाबू होने के बाद आतंकवाद-निरोधी कानून के तहत यह प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन, बांग्लादेशी हाई कोर्ट ने 1 अगस्त, 2013 को ही जमात के रजिस्ट्रेशन को अमान्य कर दिया था। बाद में 7 दिसंबर, 2018 को चुनाव आयोग ने भी इसे रद्द कर दिया। 19 नवंबर, 2023 को बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने भी जमात की अपील खारिज कर दी थी।

कट्टरपंथी उग्रवादी नेताओं को रिहा किया जा रहा है
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की ओर जमात पर औपचारिक प्रतिबंध तो अब हटाया है, लेकिन वह कथित तौर पर पहले से ही इस मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन के इशारे पर काम कर रहे हैं।

इसके कहने पर यूनुस सरकार ने कट्टरपंथी उग्रवादी नेताओं की हिरासत भी खत्म कर दी है। जिन उग्रवादियों को हिरासत से मुक्त किया गया है, उनमें मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के चीफ जैशिमुद्दीन रहमानी भी शामिल है। इसे सोमवार को ही काशिमपुर हाई सिक्योरिटी जेल से रिहा किया गया है।

आईएसआई के गुर्गों से भी सहानुभूति!
जब अंतरिम सरकार का गठन भी नहीं हुआ था, तभी से जमात का ऐसा दबदबा बन गया था कि उसके कहने पर कथित रूप से कुख्यात ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी और वकील अहमद बिन कासेम को आजाद कर दिया गया था। इनके बारे में दावा किया जाता है कि ये बांग्लादेश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करते हैं।

आजमी जमात के पूर्व सरगना गुलाम आजम का बेटा है, जिसने 1971 के बांग्ला मुक्ति अभियान में पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। आजमी का पाकिस्तान प्रेम तब उजागर हुआ था, जब एक बार उसने यह सवाल उठा दिया था कि क्या पाकिस्तानी सेना पर 1971 की जंग के लिए नरसंहार का आरोप लगाया जा सकता है।

भारत के प्रति भी दुश्मनी जाहिर कर चुके हैं जमात के नेता
आजमी के पिता पर बांग्लादेश में युद्ध अपराध का भी मुकदमा चल चुका है। उस शख्स ने बांग्लादेश की मुक्ति अभियान का पूरजोर किया था। उसपर पाकिस्तानी सेना के साथ तालमेल करके जंग में शामिल होने के भी आरोप लगे हैं। सबसे चुभने वाली बात ये है कि आजम ने एक बार बांग्लादेश मुक्ति अभियान को भारत की साजिश करार दिया था।

निहित स्वार्थ के लिए कानूनी प्रावधानों का मजाक बना रही है यूनुस सरकार!
बांग्लादेश के एक विश्लेषक ने ईटी से बातचीत में कहा है, 'अंतरिम सरकार सड़क (उपद्रवियों) के दबाव में काम कर रही है, जिसे कानूनी प्रावधानों के प्रति जरा भी सम्मान नहीं है, जबकि यह पूर्ववर्ती सरकार पर यही आरोप लगा रही है। दिलचस्प तो ये है कि मोहम्मद यूनुस खुद भी ऐसे ही तरीकों से अदालती मुकदमों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।'

इसे भी पढ़ें- बांग्लादेश: पूर्व स्पीकर शर्मीन चौधरी और पूर्व मंत्री टीपू मुंशी हत्या के मामले में गिरफ्तार, क्या है मामला?

भारत को खतरनाक संकेत दे रहा बांग्लादेश?
अगर इस तरह से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून और संविधान को दरकिनार करके देश-विरोधी ताकतों के दबाव और इशारे पर काम कर रही है; और जिसमें इसके मुख्य सलाहकार का निहित स्वार्थ भी शामिल हो गया है तो यह बहुत ही खतरनाक संकेत है।

भारत इस हकीकत से मुंह नहीं मोड़ सकता कि बांग्लादेश में अगर कानून का शासन होता है तो उसके प्रभाव से यह भी प्रभावित हो सकता है, खासकर तब जब इसमें बैकडोर से पाकिस्तान की एंट्री हो गई लगती है!

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+