जमात-ए-इस्लामी को क्यों कहा जा रहा है बांग्लादेश संकट का मास्टरमाइंड? पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
Jamaat e Islami Bangladesh: बांग्लादेश में जो हिंसा हो रही है, उसके पीछे 'इस्लामी छात्र शिविर' का नाम सामने आ रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ढाका यूनिवर्सिटी में शेख हसीना के खिलाफ छात्रों की गोलबंदी में इस संगठन के रोल पर खुफिया एजेंसियां भी उंगली उठा चुकी हैं। दरअसल, यह जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की ही छात्र इकाई है।
इस्लामी छात्र शिविर (ICS) एक कट्टर मुस्लिम छात्र संगठन है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान समर्थित जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई होने की वजह से इस्लामी छात्र शिविर ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के इशारे पर शेख हसीना को गद्दी छोड़ने और बांग्लादेश से भागने पर मजबूर कर दिया।

बांग्लादेश संकट के पीछे जमात जिम्मेदार!
सोमवार को शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश से निकल भागने के लिए बांग्लादेश की सेना ने महज 45 मिनट का वक्त दिया था। यह इतना कम समय था कि शेख हसीना बांग्लादेश की जनता के लिए प्रधानमंत्री के तौर पर अपना अंतिम संदेश भी रिकॉर्ड नहीं कर सकीं। बांग्लादेश से जान बचाकर भागने का उनके पास यही एकमात्र विकल्प रह गया था।
इस्लामी छात्र शिविर के कैडरों को यूनिवर्सिटी में करवाया गया दाखिला
अब जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उसके हिसाब से पाकिस्तान समर्थित जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश में अवामी लीग की शेख हसीना सरकार को हटाने की साजिश कुछ साल पहले से ही रचनी शुरू कर दी थी। सूत्रों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में ही इस्लामी छात्र शिविर के कई कैडरों को बांग्लादेश के अलग-अलग यूनिवर्सिटी में दाखिला करवाया गया था।
आंदोलन में रहा है इस्लामी छात्र शिविर का दबदबा
इस्लामी छात्र शिविर के इन्हीं कैडरों ने यूनिवर्सिटी के सामान्य छात्रों का ब्रेनवॉश करना भी शुरू कर दिया था। यही वजह है कि शेख हसीना सरकार की ओर से सरकारी नौकरियों में जो विवादित आरक्षण की घोषणा की गई थी, उसके विरोध में सिर्फ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले ही सड़कों पर उतरे नजर आए।
जमात ने शिविर के माध्यम से विश्वविद्यालयों पर कर रखा है कब्जा
इस्लामी छात्र शिविर के माध्यम से जमात ने जिन विश्वविद्यालयों को अपना पनाहगार बनाया था, उसमें ढाका यूनिवर्सिटी, चिटगांव यूनिवर्सिटी, जहांगीर यूनिवर्सिटी, सिलहट यूनिवर्सिटी और राजशाही यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इतने कम वर्षों में शिविर का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि पिछले तीन वर्षों में यूनिवर्सिटी के चुनावों में उन्हीं छात्र संगठनों को सफलता मिली, जिन्हें जमात के छात्र संगठन ने समर्थन दिया था।
छात्र शिविर के माध्यम से आईएसआई ने कर लिया आंदोलन पर कब्जा!
सूत्रों का कहना है आज स्थिति ऐसी हो चुकी है कि इस्लामी छात्र शिविर (ICS) का सीधे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध जुड़ चुके हैं और वह इसके कैडर को पाकिस्तान भी ले जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक आईएसआई और आईसीएस के ताल्लुकात आज इतने गहरे हो चुके हैं कि छात्रों के नाम पर चले आंदोलन में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के स्लीपर सेल भी स्टूडेंट के फर्जी डीपी लगाकर सोशल मीडिया के माध्यम को हिंसा को भड़काने का काम कर रहे हैं।
जानकारी है कि अब इस्लामी छात्र शिविर पर आईएसआई का शिकंजा इस कदर कस चुका है कि वह उससे निकल नहीं पा रही और इसी वजह से यह आंदोलन इतना हिंसक हो गया है।
शेख हसीना ने भी किया था आंदोलन के पीछे आईएसआई के हाथ होने की ओर इशारा
शेख हसीना भी यह दावा कर चुकी हैं कि जमात-ए-इस्लामी और इसकी छात्र इकाई आंदोलन पर कब्जा कर चुकी हैं और हिंसा को भड़काने में लगी हुई हैं। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने भी टीओआई को दिए साक्षात्कार में इस बात की ओर इशारा किया है।
उनका कहना है, 'बांग्लादेश में छात्र 1971 से ही आगे रहे हैं, हमेशा से एक देशभक्त के रूप में। ये प्रदर्शनकारी अलग थे, जमात, बीएनपी (खालिदा जिया की पार्टी), छात्र लीग और अन्य की शाखाएं जो शेख हसीना की ओर से अनजाने में 'रजाकार' शब्द के इस्तेमाल के बाद सड़कों पर उतर आए। उन्होंने (हसीना) कभी भी छात्रों के लिए इसका (रजाकार) इस्तेमाल नहीं किया था।'
कौन हैं रजाकार ?
फारसी शब्द 'रजाकार' का अर्थ होता है वॉलंटियर। बांग्लादेश सरकार पाकिस्तानी सेना से सहानुभूति रखने वाली ताकतों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करती है। इसमें जमात ए इस्लामी के नेता भी शामिल हैं।












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