Exclusive: Bangladesh में मॉब लिंचिंग में मरे Dipu के घर पहुंचा Oneindia, भाई ने बताया- असल में क्या हुआ था?
Bangladesh Lynching Dipu Chandra Das Murder Case Oneindia Exclusive: 2025 के अंतिम दिनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसा की घटनाएं फिर से सुर्खियों में हैं। मैमनसिंह के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को आग लगा दी। शुरुआत में धार्मिक अपमान (ब्लास्फेमी) के आरोप लगे, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि असल वजह गारमेंट फैक्ट्री में प्रमोशन और सहकर्मियों से विवाद था। फैक्ट्री के अंदर दीपू को पहले पीटा गया, फिर बाहर निकालकर भीड़ के हवाले कर दिया।
इस क्रूर घटना ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। भारत में VHP और बजरंग दल के प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश ने दिल्ली-सिलीगुड़ी में वीजा सेवाएं निलंबित कर दीं। इस बीच, Oneindia Hindi की टीम दीपू के घर पहुंची और उनके भाई से एक्सक्लूसिव बातचीत की। दर्द और गुस्से से भरी आवाज में दीपू के भाई पूरी घटना का चौंकाने वाला पक्ष बताया। आइए, 10 सवाल-जवाब में जानें क्या बताया...

सवाल: असल में दीपू के साथ क्या हुआ था?
मृतक दीपू का भाई : हमें पता ही नहीं चला कि क्या हुआ। जो हुआ, उसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मेरा भाई गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था, सुपरवाइजर बन गया था। रविवार (14 दिसंबर 2025) को घर से निकला और यह घटना हो गई। अगर किसी से दुश्मनी होती तो हमें बताता। अगर खतरा पता होता तो, फैक्ट्री जाता ही नहीं। मैं विश्वास नहीं करता कि मेरा भाई इस्लाम के बारे में कुछ गलत कह सकता था। वह ज्यादा बात नहीं करता था।
सवाल: उसे कैसे मारा गया?
मृतक दीपू का भाई : कंपनी के अंदर बंद करके पहले बहुत पीटा गया। मारने के बाद 3 किलोमीटर तक घसीटा गया, पेड़ से लटकाया और फिर जिंदा जला दिया गया। लोगों का दाह संस्कार मरने के बाद होता है, मेरे भाई का पहले ही कर दिया गया। जानवरों के साथ भी ऐसा नहीं होता।
सवाल: वहां कितने लोग थे?
मृतक दीपू का भाई : हजारों लोग थे। उन्होंने दीपू को बेरहमी से मार डाला।
सवाल: इस घटना के बाद परिवार वहां सुरक्षित है?
मृतक दीपू का भाई : हां, अभी हम सुरक्षित हैं, लेकिन सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे।
सवाल: बांग्लादेश सरकार आपकी मदद कर रही है?
मृतक दीपू का भाई : नहीं, सरकार साथ नहीं दे रही है।
सवाल: आपको वहां किस तरह की परेशानी हो रही है?
मृतक दीपू का भाई : परेशानी बहुत है। पूरा घर मेरे भाई की कमाई से चलता था। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसी पर थी। अब हम मुश्किल में हैं। भाई चला गया, कभी वापस नहीं आएगा। सोशल मीडिया पर लोग बहुत तरह की बातें कर रहे हैं।
सवाल: मीडिया में जो बातें आ रही हैं, क्या वे सच हैं? फैक्ट्री में झगड़ा हुआ था?
मृतक दीपू का भाई : मीडिया बहुत कुछ कह रहा है, हमारे पास शब्द नहीं। अगर झगड़ा होता तो वह हमें बताता। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। हम बस अपने भाई के लिए इंसाफ चाहते हैं। हत्यारों को फांसी की सजा चाहिए।
सवाल: परिवार में कौन-कौन है?
मृतक दीपू का भाई : माता-पिता, छोटा भाई, दो भाई, एक बहन और दीपू का छोटा बच्चा।
सवाल: क्या आप भारत से कोई मदद चाहते हैं?
मृतक दीपू का भाई : मैं बस इतना कहूंगा कि मेरे भाई की हत्या का इंसाफ हो।
सवाल: बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति क्या है? पहले भी ऐसा हुआ?
मृतक दीपू का भाई : बांग्लादेश में कई जगहों पर ऐसा हुआ है, लेकिन मेरे भाई के साथ यह पहली बार था।
यह इंटरव्यू परिवार के दर्द और बेबसी को बयां करता है। दीपू के भाई ने साफ कहा कि ब्लास्फेमी के आरोप झूठे हैं। असल वजह फैक्ट्री में प्रमोशन को लेकर विवाद था। जांच में 12 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन परिवार को सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही। अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद युनूस ने घटना की निंदा की, लेकिन अल्पसंख्यकों में डर बना हुआ है। क्या दोषियों को सजा मिलेगी? आपका विचार क्या है? कमेंट्स में बताएं!












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