मालदीव की तरह चीन की गोदी में नहीं खेलेंगे... लक्षद्वीप विवाद में कूदा बांग्लादेश, भारत से कहा- चिंता ना करें

Bangladesh on India-Maldives Conflict: बांग्लादेश में पिछले हफ्ते संपन्न चुनाव में सत्ताधारी अवामी लीग ने एकतरफा जीत हासिल की है और इसके साथ ही शेख हसीना के पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। अपनी चुनावी जीत के बाद, शेख हसीना ने भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों को याद किया और भारत को "एक भरोसेमंद दोस्त" होने का श्रेय दिया।

लेकिन, पिछले पांच दिनों से भारत और मालदीव के बीच भी विवाद चल रहा है और मालदीव के मंत्रियों की भारत और भारतीय प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल ने दोनों देशों के संबंध को कटु बना दिया है।

जिसमें अब बांग्लादेश भी कूद पड़ा है।

, Bangladesh wont succumb to the Chinese, india

इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. एके अब्दुल मोमन ने कहा है, कि बांग्लादेश चीन के आगे ऐसे नहीं टूटेगा, जैसे मालदीव टूट गया है।

बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. एके अब्दुल मोमन ने इंटरव्यू में इस सवाल पर, कि भारत और मालदीव के बीच टकराव की स्थिति है, मालदीव के तीन मंत्री पीएम मोदी के बारे में अपमानजनक बयान दे रहे हैं। उस पर आपके विचार क्या हैं, उन्होंने कहा, कि "हमारे समाज में हमारे अपने मूल्य निर्धारण में, हम आम तौर पर दूसरों का सम्मान करते हैं, और आप जानते हैं, कोई भी काल्पनिक या आकर्षक टिप्पणी करने से पहले, हम नेताओं से अपेक्षा करते हैं। इसलिए हमारा मानना है कि हमें गरिमा और पद का सम्मान करना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, कि "हमारी आजादी के लिए भारत ने अपना खून बहाया है और भारत, हमेशा से हमारा सबसे बड़ा मददगार रहा है, इसीलिए हमारे भारत के साथ कभी भी रिश्ते खराब नहीं होंगे।"

जब उनसे पूछा गया, कि "क्षेत्र में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है, चाहे वह मालदीव हो या बांग्लादेश। आप इसे कैसे देखते हैं?'

तो उन्होंने कहा, कि "यह गलत धारणा है। बांग्लादेश में चीन का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं है। चीन एक डेवलपमेंटल पार्टनर है और वे हमारी कुछ परियोजनाओं में हमारी मदद कर रहे हैं, या तो एक ठेकेदार के रूप में या एक विशेषज्ञ के रूप में। लेकिन अगर आप देखें, कि हमें चीन से कितना पैसा मिला है, तो यह जीडीपी के 1 फीसदी से भी कम है। तो, यह कुछ भी नहीं है।"

उन्होंने आगे कहा, कि "प्रोपेगेंडा चलाया जाता है, कि बांग्लादेश भी चीन का कर्जदार होता जा रहा है। एक देश दूसरे देश के कर्ज में डूबा हो सकता है, यदि उसकी विदेशी उधारी 55 प्रतिशत से ज्यादा हो। हमारी कुल उधारी सिर्फ 13.6 फीसदी है। भारत में अगर ऐसा डर हो, तो वो वास्तविक नहीं है। चीन एक मित्र और विकास भागीदार है। हम कोई भी सहायता या फंड प्राप्त करने में बहुत विवेकपूर्ण हैं। इसलिए लोगों को यह डर नहीं होना चाहिए, कि बांग्लादेश चीनियों के आगे झुक जाएगा।"

वहीं, इस सवाल पर, कि बांग्लादेश में फिर से शेख हसीना की सरकार बनी है, तो फिर भारत-बांग्लादेश के संबंध का विस्तार किस तरह से होगा, उन्होंने कहा, कि "हमारा रिश्ता पहले से ही बहुत मजबूत है। यह सिर्फ आज की बात नहीं है, क्योंकि हमारे जन्म के समय, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत ही सबसे बड़ा मददगार था। उन्होंने आज़ादी के लिए हमारी तरह खून बहाया। तो हमारे पास एक ऐतिहासिक कारण है। और फिर, हाल के वर्षों में, हमारी प्रधान मंत्री शेख हसीना और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हमने बहुत अच्छा तालमेल और संबंध विकसित किया है। पीएम मोदी ने इसे स्वर्णिम अध्याय बताया है, और हम इस पर आगे बढ़ना चाहते हैं।"

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा, कि "हमने एक रणनीतिक साझेदारी विकसित की है, इसलिए हम भारत और बांग्लादेश और अन्य सभी पड़ोसियों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ेंगे।"

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