Bangladesh 2004 Grenade Attack Case: खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बरी, जानें क्यों पलटा कोर्ट का रूख?
Bangladesh 2004 Grenade Attack Case: बांग्लादेश में 2004 के ग्रेनेड हमले के मामले में उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे तारिक रहमान और 48 अन्य लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया गया था। लेकिन, अब अदालत ने उनके खिलाफ सभी आरोपों को पलटते हुए उन्हें बरी कर दिया है।
यह हमला 2004 में हुआ था, जब शेख हसीना के समर्थकों द्वारा आयोजित एक रैली पर ग्रेनेड फेंके गए थे। इस हमले में 24 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और लगभग 300 लोग घायल हो गए थे। 2018 में तारिक रहमान समेत कई लोगों को इस हमले का दोषी ठहराया गया था।

तारिक रहमान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि 19 अन्य को मौत की सजा दी गई थी। लेकिन रहमान उस समय से ही लंदन में निर्वासन में रह रहे हैं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं।
क्यों पलटा अदालत ने फैसला?
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि 2018 का फैसला अवैध और राजनीति से प्रेरित था। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद सभी 49 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि परीक्षण में कई कानूनी खामियां थीं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और तनाव
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। शेख हसीना और खालिदा ज़िया लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी रही हैं, और दोनों की पार्टियां बांग्लादेश की राजनीति में हावी हैं।
आगे क्या होगा?
इस फैसले के खिलाफ अटॉर्नी जनरल सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। वहीं, रहमान और उनकी पार्टी बीएनपी जल्द चुनाव कराने की मांग कर रही है।
जनता की राय और सरकार का रुख
शेख हसीना की पार्टी ने अदालत के फैसले की आलोचना की है, जबकि खालिदा ज़िया की पार्टी ने इसे न्याय की जीत बताया है। देश में राजनीतिक अस्थिरता के चलते स्थिति और जटिल हो सकती है।
2004 के ग्रेनेड हमले में क्या हुआ था?
यह हमला शेख हसीना की रैली पर हुआ था, जिसमें 24 से ज्यादा लोग मारे गए और 300 घायल हुए थे।
तारिक रहमान कौन हैं?
तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे और बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं।
क्या यह फैसला अंतिम है?
नहीं, अटॉर्नी जनरल इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं।












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