सत्ता बदलते ही फिर चीन की गोदी में आया ऑस्ट्रेलिया? वामपंथी रूझान वाले एंथनी अल्बानीज दे रहे संकेत
सिंगापुर, 12 जूनः ऑस्ट्रेलिया में वामपंथी झुकाव रखनी वाली पार्टी की जीत का प्रभाव अब दिखने लगा है। लंबे समय तक दोनों देशों के बीच चले कड़वाहट के दौर के बाद एक बार फिर से दोनों देशों के नेता मिले हैं। सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग सुरक्षा शिखर सम्मेलन के मौके पर ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस और चीन के रक्षा मंत्री वेई फेनघे के बीच एक घंटे से भी अधिक समय तक बातचीत हुई। दोनों देशों के नेताओं के बीच यह बातचीत लगभग 3 सालों बाद हुई है। इस वार्ता को तनावपूर्ण संबंधों की अवधि के बाद एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

3 सालों बाद हुई बातचीत
ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री मार्लेस ने कहा कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर था, जिसमें मैंने ऑस्ट्रेलिया के लिए चिंता के कई मुद्दे उठाए। हालांकि इस बैठक के बाद चीनी सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की। बीते महीने ऑस्ट्रेलिया में लगभग 1 दशक बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। लिबरल पार्टी के नेता रहे स्कॉट मॉरिसन की हार हुई और लेबर पार्टी के एंथनी अल्बानीज देश के प्रधानमंत्री बने। ऑस्ट्रेलिया में सत्ता परिवर्तन से चीन को खुश होने मौका मिल गया। जीत के बाद ही चीन के सरकारी प्रोपेगैंडा अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एंथनी की जमकर तारीफ की थी। इसके साथ ही चीन का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बयानबाजी का टोन भी धीमा पड़ा है।

चीन के साथ अच्छे रिश्ते के पक्ष में पीएम
गौरतलब है कि नए प्रधानमंत्री बने एंथनी अल्बानीज ने चुनाव के दौरान खुलकर चीन के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि घरेलू राजनीतिक फायदे के लिए भड़काऊ बयान नहीं दिए जाने चाहिए। इसके बाद एंथनी अल्बानीस ने चीनी-मलेशियाई मूल की पेन्नी वोंग को विदेश मंत्री बनाया। पेन्नी वोंग की चीन से नजदीकी जगजाहिर है। वह फर्राटेदार चीनी भाषा बोलती हैं। विदेश मंत्री बनते ही पेन्नी ने संकेत दिया कि चीन के साथ रिश्तों को संतुलित किया जाएगा जो मॉरिसन के कार्यकाल में बहुत खराब हो गए थे।

चीनी मूल की ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री
चुनाव में चीनी मूल के ऑस्ट्रेलियाई वोटरों को रिझाने के लिए वोंग ने चीनी भाषा के प्रसार पर ज्यादा पैसा खर्च करने का वादा किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि ऑस्ट्रेलिया को दुनिया की महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्द्धा में नहीं पड़ना चाहिए। वोंग ने कहा था कि अमेरिका हमारा अभिन्न सहयोगी जरूर है, मगर हमें अन्य देशों के साथ भागीदारों और रिश्तों को मजबूत करना होगा।

कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रशंसक हैं एंथनी
एंथनी अल्बानीस चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लंबे समय से प्रशंसक रहे हैं। यही नहीं लेबर पार्टी पर अरबपति हुआंग शिंआंगमो से 1 लाख डॉलर चंदा लेने के भी आरोप लग चुका है। ऑस्ट्रेलिया की एक अखबार की रिपोर्ट में चीनी जासूसों पर आरोप लगे थे कि उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की ताकि लेबर पार्टी के सांसद जीत सकें। अब एंथनी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के एक महीने से भी कम समय बाद चीन से रिश्ते सुधारने का प्रयास यह दर्शाता है कि ऑस्ट्रेलिया में अमेरिका और भारत को कहीं न कहीं दरकिनार कर चीन के पाले में जाने की कोशिश कर रहा है।

कोरोना के लिए चीन को ठहराया जिम्मेदार
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच संबंध तब अधिक खराब हो गए थे जब कोरोना के लिए इस एशियाई देश को जिम्मेदार माना गया था। ऑस्ट्रेलिया विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोरोना के फैलने में चीनी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। चीन इस मांग पर इतना नाराज हो गया कि उसने ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी दी कि वह एक झटके में देश की अर्थव्यवस्था की चूलें हिला देगा। चीन की यह धमकी अतिश्योक्ति नहीं थी क्योंकि चीन ऑस्ट्रेलिया के लगभग एक तिहाई निर्यात का स्रोत है। इसके बाद चीन ने पिछले महीनों में ऑस्ट्रेलिया से आयात किए जाने वाले जौ पर 80 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया।

चीन ने लिया बदला
चीन इतने पर ही नहीं रूक चीन चीन ने ऑस्ट्रेलिया के बीफ और पोर्क पर भी बड़ी रुकावटें खड़ी कर दी। इसके साथ ही एक ऑस्ट्रेलियन नागरिक को मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में फांसी दे दी गयी। इन अप्रत्याशित हमलों से ऑस्ट्रेलिया तिलमिला गया और उसने जवाबी कार्रवाई में कई कदम उठाए। ऑस्ट्रेलिया ने व्यापार और निवेश के लिए चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने और दूसरे देशों से व्यापार संबंध मजबूत करने की कोशिशें शुरू कर दिया।

भारत के साथ कैसा रहेगा रिश्ता?
विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के साथ एंथनी अल्बानीज की नजदीकी के बावजूद ऑस्ट्रेलिया अमेरिका का सहयोगी बना रहेगा लेकिन क्वॉड और सैन्य गठबंधन ऑकस को लेकर वह ऑस्ट्रेलिया की नीतियों में चीन के समर्थन में नरमी ला आ सकती है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया और भारत के रिश्तों को लेकर भी दुनिया की नजरें बनी हुई है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ भारत की नजदीकी जगजाहिर थी लेकिन एंथनी भी भारत के साथ वही रिश्ता बना सकेंगे इस पर कोई यकीन नहीं कर पा रहा है।
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