Explained: ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, क्या है कानून, क्यों हो रही आलोचनाएं?
Explained: ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार (28 नवंबर) को 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी है और ऐसा करने वाला वो दुनिया का पहला देश बन गया है।
ऑनलाइन सुरक्षा संशोधन (सोशल मीडिया न्यूनतम आयु) विधेयक 2024 सोशल मीडिया कंपनियों पर जवाबदेही तय करता है, कि वो अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों की पहुंच को रोके। इसमें कहा गया है, कि अगर कंपनियां ऐसा करने में नाकाम रहती हैं, तो उन पर 32 मिलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यानि, ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है और इसके साथ ही इस फैसले के लिए सरकार की आलोचना भी शुरू हो गई है। इस रिपोर्ट में हम समझने की कोशिश करते हैं, कि आखिर सरकार के इस फैसले की आलोचना क्यों की जा रही है और ये कानून कितना कारगर होगा?
ऑस्ट्रेलिया में बनाया गया कानून क्या कहता है?
विधेयक में कहा गया है, "कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के लिए उम्र को लेकर प्रतिबंध हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म के प्रोवाइडर को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, कि तय किए गये उम्र से कम उम्र के बच्चे उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएं।"
सीनेट और प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बाद, यह विधेयक एक साल के भीतर लागू हो जाएगा।
उम्र का वेरिफिकेशन करने के लिए एक टेस्ट चल रहा है। संचार मंत्री मिशेल रोलैंड ने कहा, "अगले 12 महीनों में, हम इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके, कि न्यूनतम आयु प्रभावी रूप से लागू हो, जो वर्तमान में चल रहे आयु आश्वासन प्रौद्योगिकी परीक्षण (Age Assurance Technology Trial) के निष्कर्षों से सूचित है।"
इस तरह के बिल के बारे में सबसे बड़ी चिंता, यूजर की उम्र के वेरिफिकेशन को लेकर होती है। वर्तमान में, इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर अकाउंट बनाने के लिए यूजर को अपनी जन्मतिथि बताने और आयु मानदंड पूरा करने की जरूरत होती है। लेकिन, कंपनियां यह जांच नहीं करती हैं, कि यह जानकारी सही है या नहीं।
कुछ देशों में, सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र के प्रमाण के रूप में सरकारी पहचान पत्र की आवश्यकता होती है, लेकिन कंपनियों को दिए जाने वाले संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को लेकर गंभीर गोपनीयता संबंधी चिंताएं जताई गई हैं।
प्रधान मंत्री एंथनी अल्बानीज ने एक बयान में कहा है, कि "बिल यह भी स्पष्ट करता है, कि किसी भी ऑस्ट्रेलियाई को सोशल मीडिया पर उम्र वेरिफिकेशन के लिए सरकारी पहचान पत्र (डिजिटल आईडी सहित) का उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ताओं को उचित विकल्प प्रदान करने चाहिए।"
उम्र वेरिफिकेशन का क्या हो सकता है तरीका?
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के पास उम्र का पता लगाने के लिए चेहरे के आधार पर उम्र का पता लगाने वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसमें काफी गलतियां हो सकती हैं। और सबसे बड़ी परेशानी ये है, कि इसके जरिए नाबालिगों का डेटा भी जमा किया जा सकता है।
विधेयक में यह भी कहा गया है, कि यदि कोई सोशल मीडिया इकाई व्यक्तिगत जानकारी रखती है, जिसे आयु-प्रतिबंधित उपयोगकर्ताओं को खाता रखने से रोकने के लिए एकत्र किया गया है, तो उसे "उस जानकारी को उस उद्देश्य के लिए उपयोग करने या प्रकट करने के बाद नष्ट कर देना चाहिए, जिसके लिए इसे जमा किया गया था"।
ऐसा न करने पर कानून के तहत गोपनीयता का उल्लंघन माना जाएगा।
ऑनलाइन गेमिंग और शिक्षा और स्वास्थ्य सहायता से जुड़े ऐप (जैसे Google क्लासरूम और YouTube) जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाएगी।
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का फैसला क्यों लिया गया?
सरकार का तर्क है, ये बिल बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव की बात करता है। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा है, कि यह उपाय "युवा ऑस्ट्रेलियाई लोगों को उनके विकास के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान अधिक सुरक्षा प्रदान करेगा।"
हाल ही में इसी तरह के तर्क कई और जगहों पर भी दिए गए हैं, क्योंकि सोशल मीडिया आधुनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जोनाथन हैडट ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली 2024 की किताब 'द एंग्ज़ियस जेनरेशन' में कहा है, कि स्मार्टफोन और इंटरनेट ने बचपन के "खेल" बदल दिया है। उन्होंने कहा, "हम 200 मिलियन वर्षों से खेल-आधारित बचपन जी रहे हैं, क्योंकि हम स्तनधारी हैं और सभी स्तनधारी खेलते हैं। हमने अपने दिमाग को इसी तरह से बनाया है। लेकिन, 1990 के दशक में यह बंद हो गया और 2010 तक पूरी तरह बंद हो गया। यह फीका पड़ गया और इसकी जगह अचानक ही फोन-आधारित बचपन ने ले ली...।"
उन्होंने लिखा है, कि "अगर आप युवावस्था में फ्रंट-फेसिंग कैमरा वाले स्मार्टफोन और इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं और दिन में पांच घंटे सोशल मीडिया और नौ घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं, तो आपको चिंता और डिप्रेशन होने का बहुत ज्यादा खतरा है।"
हैडट ने फोन से दूर रहने और सख्त आयु सीमा निर्धारित करने का तर्क दिया है।
हालांकि, एकतरफा तस्वीर पेश करने के लिए उनके विचारों की आलोचना भी की गई है। मनोविज्ञान की प्रोफेसर कैंडिस ओडर्स ने नेचर के लिए एक लेख में लिखा है, कि कैसे सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव के बारे में डेटा कई तरह के निष्कर्ष दिखाता है। कई स्टडी किशोरों पर सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभावों की ओर इशारा करते हैं।
उन्होंने लिखा है, कि ""टेलीफोन, रॉक 'एन' रोल, कॉमिक बुक्स और रोमांस उपन्यास, इन सभी ने भी घबराहट पैदा की। एक अभिभावक के रूप में, मैं सहानुभूति रखता हूं। दुनिया भर में तीन में से एक इंटरनेट यूजर एक बच्चा है, और खासकर कई सामग्री वो ऐसा चुनते हैं, जो वैध चिंताएं पैदा करते हैं। फिर भी, एक डिजिटल दुनिया का डर दिखाकर इसका विरोध नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, हमें डेटा का उपयोग उन बहुत अलग अनुभवों को समझने के लिए करना चाहिए, जो विविध पृष्ठभूमि के युवा ऑनलाइन कर रहे हैं।"
ऑस्ट्रेलियाई कानून की आलोचना क्यों की गई है?
आलोचकों में से एक बड़ी टेक कंपनियां हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने कहा, कि "हम उस प्रक्रिया से चिंतित हैं, जिसमें कानून को जल्दबाजी में पारित किया गया, जबकि सबूतों पर ठीक से विचार नहीं किया गया, इंडस्ट्री पहले से ही उम्र के हिसाब से अनुभव सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है, और युवा लोगों की आवाजों के जरिए उम्र का पता लगाता है।"
डिजिटल इंडस्ट्री ग्रुप की मैनेजिंग डायरेक्टर सुनीता बोस, जिसके सदस्य ज्यादातर सोशल मीडिया कंपनियां हैं, उन्होंने रॉयटर्स को बताया, "समुदाय और प्लेटफॉर्म इस बारे में अंधेरे में हैं, कि उनसे वास्तव में क्या उम्मीद की जा रही है।"
कई एक्सपर्ट्स का और कहना है, कि प्रतिबंध लगाने का उतना असर नहीं हो सकता है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के कई तरीके हो सकते हैं और कई तरीकों से कम उम्र के लोग ऐसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर सकते हैं, ऐसे में जागरूकता फैलाना ही सबसे अच्छा तरीका हो सकता है।












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