ISIS पहले जीत लेता है महिलाओं का दिल, फिर पूरा शहर

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यह शांति भले ही एक साजिश का हिस्सा हो, पर वहां के वाशिंदों को एक खास अंतर नजर आया है। खासकर वो परिवार जो या तो वहां से वक्त रहते भाग नहीं पाए या फिर वापस लौट आए कह रहे हैं कि अब ISIS अपनी हुकूमत का सिक्का जमाने के लिए महिलाओं के ड्रेस कोड, उनके बाहर निकलने जैसी गतिविधियों पर नर्मी बरत रहे हैं। भले ही यह नर्मी इसलिए हो कि उन्हें देश की सेना बेदखल ना कर सके।
खबरें तो यह भी हैं कि अब वहां पर जो आम बैरीकेटिंग हैं, उन्हें हटा दिया गया है व ISIS गुट अब अपनी नई योजना के तहत महिलाओं को इज्ज़त बख्श रहा है व किसी कम से कम मोसूल शहर व नए कब्जे वाले शहरों में किसी भी तरह के महिला अपराध की खबरें नहीं आ रही हैं। तो क्या ये सुन्नी कट्टरपंथी वास्तव में बदल गए हैं? या आईएसआईएस सिर्फ़ लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है जिससे उसे वहाँ से निकालना या फिर अलग-थलग करना मुश्किल हो जाए।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ कुर्द राजनेता ने बताया, "अल-ज़रक़ावी के तहत इराक में पुराने अल-कायदा के विपरीत ये लोग बगदाद के अत्याचारी शिया शासन के खिलाफ लोगों के संरक्षक के रूप में सामने आ रहे हैं " उन्होंने बताया, "वो हालात से काफी बेहतर ढंग से निपट रहे हैं और ये बात उन्हें अधिक खतरनाक बना देती है। क़बायलियों को उनके खिलाफ करना काफी कठिन होगा।"आईएसआईएस ने जब सीरिया में रक़्क़ा की प्रांतीय राजधानी पर नियंत्रण किया था तो वहाँ भी पहले वे काफ़ी उदारवादी दिखाई दिए थे मगर बाद में उन्होंने दूसरे धड़ों को वहाँ से खदेड़ दिया।












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