AstraZeneca vaccine:दूसरी डोज में 10 महीने का अंतर ज्यादा प्रभावी, ऑक्सफोर्ड की स्टडी
लंदन, 28 जून: एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दो डोज में 10 महीने तक अंतर बढ़ाने से इसके और ज्यादा प्रभावी होने की संभावना है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने सोमवार को इसपर एक शोध प्रकाशित की है। यही नहीं शोध में पाया गया है कि इस वैक्सीन की तीसरी डोज इंसान की शरीर की एंटीबॉडी के स्तर को और ज्यादा बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर इस शोध से यह जानकारी मिली है कि दो डोज के बीच अंतर बढ़ने से रक्षात्मक एंटीबॉडी का स्तर बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि दूसरी डोज के 6 महीने बाद जब तीसरी डोज बूस्टर के तौर पर दी गई तो कोरोना वायरस के वैरिएंट के खिलाफ ज्यादा शक्तिशाली रेस्पॉन्स पाया गया।

दुनिया के कई देशों के लिए अच्छी खबर
ऑक्सफोर्ड की यह स्टडी दुनियाभर के कई देशों को अपनी वैक्सीन की योजना तैयार करने में मददगार साबित हो सकती है, जो इसकी किल्लत झेल रहे हैं। मौजूदा वक्त में ज्यादातर देशों ने दो डोज के बीच में 4 से 12 हफ्तों का अंतर रखा है। बता दें कि भारत में एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से बनती है और इस समय पहली और दूसरी डोज के बीच में 12 से 16 हफ्तों का गैप रखा जा रहा है। ऑक्सफोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक इस शोध से दुनिया को वायरस के खिलाफ वैक्सीन अभियान में मदद मिलेगी। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल के लीड इंवेस्टिगेटर एंड्र्यू पोलार्ड ने सोमवार को कहा, 'यह डेटा दिखाता है कि हम एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन की एक और खुराक देकर रेस्पॉन्स को बढ़ा सकते हैं और यह सच में महत्वपूर्ण है। दो डोज से इम्यूनिटी की अवधि और वैरिएंट के खिलाफ रक्षा को लेकर और रिसर्च से यह तय करने में मदद मिलेगी कि क्या सही में बूस्टर डोज की जरूरत है।'
स्टडी में क्या पता चला
स्टडी में पाया गया कि पहली डोज के बाद शरीर में एंटीबॉडी कुछ हद तक एक साल के बाद तक बची रही। वैसे, 28 दिन बाद उनका जो लेवल चरम पर था और 180 दिन बाद वह आधा था। जबकि, दूसरी डोज के बाद एंटीबॉडी का लेवल एक महीने बाद 4 से 18 गुना तक बढ़ गया। इस स्टडी में शामिल सभी वॉलेंटियर 18 से 55 साल की उम्र के थे।












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