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Asif Ali Zardari: पाकिस्तान के अगले राष्ट्रपति बनेंगे जरदारी, क्यों कहा जाता है देश का सबसे बदनाम राजनेता?

पाकिस्तान में ये तय हो गया है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) मिलकर सरकार चलाएंगी। 8 फरवरी को हुए चुनाव के बाद दोनों दलों में ज्यादा सीटें पीएमएलएन को मिली हैं। नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ को पीएम बनाने का भी फैसला हो गया है। वहीं, असिफ अली जरदारी पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति होंगे।

आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान के सबसे विवादास्पद राजनीतिक शख्सियतों में से एक हैं। वे पहले भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। एक वक्त था जब जरदारी पाकिस्तान में इतने बदनाम हो चुके थे कि बेनजरी भुट्टो की मौत के बाद भी 2008 में चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखा था।

Asif Ali Zardari

एक अमीर सिंधी आदिवासी नेता हकीम अली जरदारी के बेटे आसिफ अली जरदारी का जन्म 26 जुलाई, 1955 को सिंध प्रांत के नवाबशाह में हुआ था। वे कराची में पले-बढ़े। उन्होंने सेंट पैट्रिक स्कूल से पढ़ाई की। जरदारी ने शादी से पहले ही राजनीति में एंट्री ले ली थी लेकिन इसमें वे बुरी तरह से असफल रहे।

इसके बाद जरदारी राजनीति छोड़ रियल एस्टेट में काम करने लगे। साल 1987 में जरदारी का बेनजीर भुट्टो संग विवाह हुआ। इस विवाह ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। कहा जाता है कि सगाई से सिर्फ 5 दिन पहले बेनजीर-जरदारी की मुलाकात हुई थी। इतना ही नहीं बेनजीर, जरदारी से 3 साल बड़ी भी थीं।

इस शादी के एक साल से भी कम वक्त के बाद 1988 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति जियाउल हक की एक प्लेन क्रैश में मौत हो गई। चुनावों में जीत के बाद बेनजीर प्रधानमंत्री बनीं। हालांकि बेनजीर की सरकार अधिक समय तक चल नहीं पाई। 1990 में भुट्टो की सरकार गिर गई।

भ्रष्टाचार की वजह से गिरी सरकार

सरकार गिरने की एक अहम वजह जरदारी को भी माना गया। सरकार गिरने के बाद बेनजीर-जरदारी के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी गई। इसके बाद पाकिस्तान के केयरटेकर PM बने गुलाम मुस्तफा जटोई ने जरदारी पर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोप में 1990 में बेनजीर और जरदारी दोनों को जेल में डाल दिया गया।

1993 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार को बर्खास्त कर दिया, तो जरदारी जेल से बाहर आकर सीधे अंतरिम सरकार में मंत्री बने। बाद में जब पीपीपी ने 1993 का चुनाव जीता तो जरदारी अपनी पत्नी के साथ इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री आवास में चले गए, जहाँ वे अगले तीन वर्षों तक रहे।

ऐसा कहा जाता है कि जरदारी ने पत्‍नी के राजनीतिक प्रभुत्‍व का खूब फायदा उठाया। इस समय के दौरान भुट्टो-जरदारी दंपती पर ब्रिटेन के सरे में एक विशाल लक्जरी संपत्ति खरीदने के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था।

मिस्‍टर टेन परसेंट

कहा जाता है कि जरदारी किसी भी प्रोजेक्‍ट या फिर लोन की मंजूरी के लिए 10 प्रतिशत कमीशन चार्ज करते थे। यही वजह कै कि उन्हें पाकिस्‍तान में 'मिस्‍टर 10%' तक कहा जाने लगा। पाकिस्तान में सरकार से जुड़ा कोई भी काम हो, जरदारी अपने लिए 10 फीसदी कमीशन तय कर लेते थे।

बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद जब वह साल 2008 में राष्‍ट्रपति बने तो दुनिया भर की मीडिया में 'मिस्‍टर टेन परसेंट देश के नए राष्‍ट्रपति बने,' इस हेडलाइंस के साथ खूब खबरें छपीं। साल 2010 में जरदारी ब्रिटेन के दौरे पर गए थे और यहां पर उन्‍होंने तत्‍कालीन ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरुन ने मुलाकात की थी।

उनके बीच इस मुलाकात को लेकर खूब चुटकुले बने। इन चुटकुलों में से ही एक था कि कैमरुन को जरदारी से हाथ मिलाने के बाद अपनी उंगलियां जरूर गिन लेनी चाहिए। जरदारी एक व्यापारी के अपहरण को लेकर भी खूब बदनाम हुए थे।

हुआ ये था कि एक व्यापारी का उन पर उनका पैसा बकाया था। लेकिन वो पैसा उन्हें चुका नहीं रहा था। इसके बाद उस व्यापारी का अपहरण कर लिया गया और उसके पांव में रिमोट बम बांधकर उसे पैसे निकालने के लिए बैंक जाने पर मजबूर किया गया।

ये बात 1990 की है। हालांकि वे आरोप कभी साबित नहीं हुए। पीपीपी ने तब देश के शक्तिशाली खुफिया तंत्र पर बेनजीर भुट्टो की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए जरदारी को बदनाम करने का आरोप लगाया था।

विमान का हाईजैक

पहली बार जब जरदारी जेल में थे तब 25 मार्च 1991 में सिंगापुर एयरलाइन्स की एक फ्लाइट हाईजैक हो गई। विमान को छोड़ने के बदले हाईजैकर्स ने जरदारी को रिहा करने की मांग की। हालांकि, हाईजैकर्स की मांग सफल नहीं हो पाई। उन्हें सिंगापुर के कमांडोज ने मार गिराया।

मुर्तजा भुट्टो की हत्या

जरदारी पर ये भी आरोप लगता है कि साल 1996 में उन्होंने बेनजीर के भाई मुर्तजा भुट्टो का मर्डर करवाया था। मुर्तजा को दिन दहाड़े सड़क पर गोली मारी दी गई थी। मुर्तजा भुट्टो की हत्या के आरोप में वो गिरफ्तार भी हुए थे।

जरदारी को भ्रष्टाचार से लेकर हत्या तक के आरोप में 1997 से 2004 तक जेल में रखा गया। उन्हें नवंबर 2004 में जमानत दे दी गई। जरदारी अपनी पत्नी के पूरे राजनीतिक जीवन में उनके साथ मजबूती से खड़े रहे, लेकिन उनकी बदनाम छवि एक बोझ बनी रही। खुद बेनजीर को भी लगता रहा कि उनकी पति की छवि से उनको नुकसान पहुंचा है।

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