फुटबॉलर मेसी के देश में आर्थिक संकट से तबाही, आधी से ज्यादा आबादी गरीबी में फंसी, लोगों को खाने के लाले पड़े!
Argentina's poverty crisis: फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी के देश अर्जेंटीना में गरीबी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं और देश की आधी से ज्यादा आबादी अब गरीबी रेखा से नीचे चली गई है। आलम ये है, कि देश में भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है और सरकार अपने वादे को पूरा करने में नाकाम साबित नजर आ रही है।
दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक संकट उसके राष्ट्रपति जेवियर माइली के पहले छह महीनों में और भी गहरा गए हैं, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के नाम पर देश को जो शॉक थेरेपी दिया गया, उसके परिणाम अब खतरनाक साबित हो रहे हैं।

अर्जेंटीना की INDEC सांख्यिकी एजेंसी की तरफ से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 की पहली छमाही में गरीबी दर बढ़कर 52.9 प्रतिशत हो गई है, जो 2023 के अंत में 41.7 प्रतिशत से 10 प्रतिशत ज्यादा है।
अर्जेंटीना के कैसे हो गये हैं हालात खराब?
इस चौंका देने वाले आंकड़े का मतलब है कि लगभग 15.7 मिलियन अर्जेंटीनावासी अब गरीबी में जी रहे हैं, जिनमें से लगभग 20 प्रतिशत आबादी अत्यंत गरीबी में शामिल हो गये हैं। गरीबी में यह उछाल अर्जेंटीना में 2003 के बाद से सबसे ज्यादा है और यह वह दौर था, जब देश विनाशकारी आर्थिक पतन, विदेशी ऋण चूक और मुद्रा अवमूल्यन से जूझ रहा था।
अकेले 2024 के पहले छह महीनों के दौरान अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में 30 लाख की वृद्धि हुई है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता मैनुअल एडोर्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, कि "सरकार को एक विनाशकारी स्थिति विरासत में मिली है। उन्होंने हमें एक ऐसे देश बनने के कगार पर छोड़ दिया है, जहां लगभग सभी निवासी गरीब हैं।"
अर्जेंटीना के गरीबी संकट के पीछे क्या है?
राष्ट्रपति जेवियर माइली, जो खुद को "अराजकतावादी-पूंजीवादी" बताते हुए सत्ता में आए, उन्होंने बजट घाटे को खत्म करने और देश की बेलगाम मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के मकसद से कठोर नीतियां लागू की हैं।
उनकी सरकार ने सार्वजनिक खर्च में भारी कटौती की है, देश की करेंसी पेसो के वैल्यू में 54 प्रतिशत कमी कर दी है, और ऊर्जा, ईंधन और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं पर सब्सिडी कम कर दी है। परिणामस्वरूप, हजारों सार्वजनिक कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो गई और कई सार्वजनिक कार्य परियोजनाएं ठप पड़ गई।
राष्ट्रपति की नीतियों को बाजारों, निवेशकों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अच्छी तरह से स्वीकार किया है, क्योंकि अर्जेंटीना के पास इनका 43 अरब डॉलर बकाया है। करीब 12 वर्षों में पहली बार, अर्जेंटीना ने जनवरी 2024 में मासिक बजट अधिशेष की सूचना दी है, जिसमें 2025 के लिए वार्षिक GDP का 1.3 प्रतिशत अनुमानित राजकोषीय अधिशेष था।
हालांकि, ये राजकोषीय लाभ एक महत्वपूर्ण मानवीय कीमत पर आए हैं। एडोर्नी ने कहा, "गरीबी का कोई भी स्तर भयावह है। हम सब कुछ कर रहे हैं, सब कुछ, ताकि यह स्थिति बदल जाए।"
इन दावों के बावजूद, अर्थशास्त्री और सामाजिक ऑब्जर्वर्स चेतावनी दे रहे हैं, कि इन नीतियों के अल्पकालिक प्रभाव ने देश को मंदी की ओर धकेल दिया है, जिससे आम नागरिकों की खरीदने की शक्ति काफी कम हो गई है।

माइली के कार्यकाल में अर्जेंटीना की मुद्रास्फीति दर कैसी चल रही है?
दक्षिणपंथी राष्ट्रपति की आर्थिक रणनीति का एक मुख्य स्तंभ अर्जेंटीना की भयावह मुद्रास्फीति को कम करना रहा है। दिसंबर 2023 में पदभार ग्रहण करने पर, मुद्रास्फीति मासिक 25.5 प्रतिशत पर चल रही थी, जो 2024 की शुरुआत में लगभग 300 प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर में योगदान दे रही थी।
हालांकि, हाल के महीनों में, सरकार की राजकोषीय सख्ती ने मासिक मुद्रास्फीति को लगभग 4.2 प्रतिशत तक कम कर दिया है, और 2024 के अंत तक 122.9 प्रतिशत का लक्ष्य रखा है। इस कमी के बावजूद, अर्जेंटीना अभी भी दुनिया में सबसे अधिक मुद्रास्फीति दर वाले देशों में शुमार है, जो वर्तमान में सालाना 230 प्रतिशत से ज्यादा है।
एडोर्नी ने कहा, "गरीबी से लड़ने से पहले हमें मुद्रास्फीति को हराना होगा।" सरकार का तर्क है, कि मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाना आर्थिक विकास को गति देने की कुंजी है, जो अंततः बढ़ती गरीबी की प्रवृत्ति को उलट देगा।
फिर भी, मुद्रास्फीति कई अर्जेंटीनावासियों के लिए तत्काल चिंता का विषय नहीं रह गई है, क्योंकि लोगों में अब नौकरी खोने और जरूरी सामान खरीदने के लिए पैसों की कमी से जूझ रहे हैं। लोगों की जेब में पैसे नहीं हैं, जो वो जरूरत की सामानों की भी खरीददारी कर सके।
आर्थिक संकट पर एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
हालांकि, राष्ट्रपति माइली की नीतियां अर्जेंटीना के कुछ व्यापक आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने में सफल रहीं, लेकिन उनके फैसलों ने देश में खतरनाक अशांति को जन्म दे दिया है। 2024 के दौरान, हजारों नागरिक विरोध में सड़कों पर उतरे आए हैं, विशेष रूप से कल्याणकारी कार्यक्रमों में कटौती, सार्वजनिक कर्मचारियों की छंटनी और सूप किचन जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए समर्थन में कमी का विरोध करते हुए, लोगों में भारी गुस्सा है।
ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री सैंटियागो कॉय ने एएफपी को बताया, कि "एक ऐसे समाधान की जरूरत है, जो विकास और वितरण के बीच संतुलन बनाए। तभी हम बढ़ती गरीबी की इस प्रवृत्ति को उलट सकते हैं।"
अर्जेंटीना के कैथोलिक विश्वविद्यालय की वेधशाला ने बताया, कि 2024 की पहली तिमाही में गरीबी दर 55.5 प्रतिशत के शिखर पर पहुंच गई थी, जो दूसरी तिमाही में थोड़ा सुधरकर 49.4 प्रतिशत हो गई। रॉयटर्स ने वेधशाला के निदेशक अगस्टिन साल्विया के हवाले से बताया है, कि "यदि आप पूरी कहानी देखें, तो यह पहली तिमाही में गिरावट को दर्शाता है। तब से यह स्थिति कम होने लगी है।"
लिहाजा, माइली की लोकप्रियता में कमी के संकेत मिलने लगे हैं। सितंबर 2024 में हुए सर्वेक्षणों से पता चला है, कि जनता के समर्थन में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है, और कई अर्जेंटीनावासी उनके सुधार की गति से निराश हो रहे हैं।
क्या अर्जेंटीना के लिए भविष्य में कोई समाधान है?
आने वाले महीने अर्जेंटीना के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होने वाले हैं। राष्ट्रपति माइली का प्रशासन राजकोषीय अनुशासन के अपने मार्ग पर प्रतिबद्ध है, लेकिन मुद्रास्फीति को संबोधित करने और समाज के सबसे गरीब वर्गों को राहत प्रदान करने के बीच संतुलन बनाना नाजुक है।
जबकि माइली की सरकार ने सब्सिडी में कटौती और सरकारी कार्यक्रमों को छोटा करने सहित आगे के सुधारों का वादा किया है, जनता और अर्जेंटीना कांग्रेस दोनों के भीतर विरोध महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करता है।
एडोर्नी ने कहा, "गरीबी से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका सबसे पहले मुद्रास्फीति से लड़ना है।" हालांकि अर्थशास्त्री चेतावनी देते हैं, कि मुद्रास्फीति में निरंतर कमी अर्जेंटीना के अधिकांश लोगों के लिए आर्थिक सुधार में तब्दील होने में समय ले सकती है। इस बीच, पेंशन, वेतन और सार्वजनिक कार्यों पर खर्च बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है, जिससे सरकार के लिए अगले कदम मुश्किलों से भरे हुए हैं।
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