एआर रहमान ने कराया कीर्तन का आयोजन! अमेरिकी सिंगर के साथ हरे कृष्णा पर झूमे... लोगों की अजीब प्रतिक्रियाएं?
AR Rahman Enjoys Hare Krishna Kirtan: संगीत जगत के सम्राट एआर रहमान, जो एक हिंदू परिवार में जन्मे थे और जिनका पहला नाम एएस दिलीप कुमार था, उन्होंने 1980 के दशक में इस्लाम अपना लिया और अपना नाम बदलकर एआर रहमान, यानि अल्लारखा रहमान कर लिया था।
लेकिन, अब सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें संगीत दिग्गज, कुछ इस्कॉन भक्तों के साथ कीर्तन में भाग लेते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एआर रहमान ने दुबई स्थित अपने घर पर हरे कृष्ण कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया था।

उनके घर पर कई भक्त मौजूद थे और अब वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें "हरे कृष्ण हरे राम" भजन गाते और विभिन्न संगीत वाद्ययंत्र बजाते हुए दिखाया गया है।
वीडियो में भारत के इस मशहूर गायक-संगीतकार को कार्यक्रम के दौरान भक्ति में डूबे हुए भी दिखाया गया है। उन्हें अपने फोन में एक वीडियो रिकॉर्ड करते हुए भी देखा गया है। इतना ही नहीं, उनके दाहिने हाथ में एक धार्मिक धागा, जिसे सनातन धर्म में कलावा कहा जाता है, वो भी बंधा हुआ नजर आ रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो सामने आने के तुरंत बाद, कुछ यूजर्स ने भजन में भाग लेने के लिए उनकी सराहना की। हालांकि, उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग से नफरत भी झेलनी पड़ी है।
एक यूजर ने टिप्पणी की, कि "वह शायद इस विशेष गायक की लोकप्रियता के आधार पर किसी म्यूजिक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हों।" वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, कि "क्या अपने एंटी-हिंदू इमेज को बदलने के लिए एआर रहमान ने ऐसा किया है?" वहीं, एक अन्य यूजर ने पूछा है, कि क्या 'एआर रहमान घर वापसी कर रहे हैं?'
वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की है, कि "भोले-भाले दर्शकों को आकर्षित करने के लिए बस एक चाल... ऐसे काम आजकल पूरा बॉलीवुड कर रहा है।"
ये वीडियो कहां का है और किस मकसद से बनाया गया है, इसकी पुष्टि हम नहीं कर रहे हैं।
लेकिन, इससे पहले अपने एक इंटरव्यू में, एआर रहमान ने इस बारे में खुलकर बात की थी, कि किस वजह से उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कथित तौर पर कहा था, कि "एक सूफी संत थे, जो मरने से पहले अंतिम दिनों में उनके पिता का इलाज कर रहा थे। बाद में हम उनसे 7-8 साल बाद मिले और तभी हमने इस आध्यात्मिक मार्ग को अपनाया, जिससे हमें शांति मिली।"
उन्होंने कहा था, कि "मेरी मां एक धार्मिक हिंदू थीं। उनका हमेशा से ही आध्यात्मिक रुझान रहा था। हबीबुल्लाह रोड स्थित, जिस घर में हम बड़े हुए थे, उसकी दीवारों पर हिंदू धार्मिक तस्वीरें थीं। वहां मदर मैरी की यीशु को गोद में लिए हुए एक तस्वीर और एक तस्वीर भी थी। मक्का और मदीना के चित्र भी वहां बने हुए थे।"












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