महसा अमीनी की मौत के 40वें दिन फिर 'सुलग' उठा ईरान, प्रदर्शनकारियों ने लगाए तानाशाह 'मुर्दाबाद' के नारे
महसा अमीनी के मौत के चालीसवें दिन सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने शोक मनाने के लिए ईरान के उत्तर-पश्चिम में स्थित अमीनी के गृहनगर साकेज में उनकी कब्र पर उमड़ पड़े।
हिजाब (Hijab) पहनने से इनकार करने पर ईरान (Iran Anti Hijab Protest) की मोरैलिटी पुलिस के हाथों 16 सितंबर को मारी गई 22 साल की कुर्दिश युवती महसा अमीनी (Mahsa Amini) की मौत के बाद से ईरान सुलग उठा है। महसा की मौत के चालीसवें दिन ईरानी लोग फिर से सड़कों पर उतर आए। वहीं तेहरान में प्रदर्शनों को रोकने के लिए दंगारोधी पुलिस की तैनाती की गई । इस्लाम में मौत के चालीसवें दिन शोक मनाने की प्रथा है। इसे 'चेहेलोम' कहा जाता है और ईरान मे शिया मुसलमानों के लिए यह धार्मिक महत्व रखता है। ईरान के उत्तर-पश्चिम में स्थित अमीनी के गृहनगर साकेज में सैकड़ों लोग महसा की कब्र पर उमड़ पड़े।

महसा की मौत के 40वें दिन सुलग उठा ईरान
महसा अमीनी के मौत के चालीसवें दिन सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने शोक मनाने के लिए ईरान के उत्तर-पश्चिम में स्थित अमीनी के गृहनगर साकेज में उनकी कब्र पर उमड़ पड़े। इस मौके पर देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई के नाम पर तानाशाह मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। प्रदर्शन के क्रम में ईरानी सुरक्षा बल और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पे भी हुईं। बता दें कि, हिजाब को ठीक ढंग से नहीं पहनने के आरोप में महसा अमीनी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस दौरान वहां की मोरैलिटी पुलिस ने महसा के साथ मारपीट की जिसके कारण उनकी कस्टडी में मौत हो गई।

ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन
महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद ईरान में हिजाब के खिलाफ महिलाओं ने एक नई क्रांति का आगाज कर दिया। ईरानी महिलाओं के सपोर्ट में पुरुष भी आ गए। इतना ही नहीं अमेरिका समेत कई पश्चिम देशों ने भी ईरानी महिलाओं के इस मुहिम में उनका साथ देने का वादा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तो साफ कह दिया है कि वे ईरान की बहादुर महिलाओं का साथ देंगे। वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा ने भी ईरान में हिजाब के खिलाफ जारी प्रदर्शन में महिलाओं का साथ देने की बात कही है।

ईरान प्रदर्शन की आग में सुलग रहा
22 साल की कुर्द महिला की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद से ईरान प्रदर्शन की आग में सुलग का दहक उठा है। देश में तानाशाह शासन और महिलाओं के लिए ड्रेस कोड से संबंधित काले कानून को खत्म करने की मांग की जा रही है। वे देश से हिजाब प्रथा को समाप्त करने की बात कर रहे हैं।

सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई को हटाने की मांग
ईरानी महिलाएं सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। महिलाओं के इस प्रदर्शन से खामनेई का तख्त डोलने लगा है। उनको लगने लगा है कि किसी भी वक्त उनकी कुर्सी को खिसका दिया जाएगा। इसलिए वहां की सरकार प्रदर्शनकारियों पर बल का प्रयोग कर रही है। अब तक कई सारे प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।

महसा की मौत के बाद सरकार विरोधी आंदोलन
वहीं, अमीनी की हत्या ने ईरान में इस दशक के सबसे बड़े सरकार विरोधी आंदोलन को जन्म दिया है। सरकारी मीडिया ने घोषणा की, ईरान के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में सभी स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालय बंद रहेंगे।वहीं, अमेरिका ने इस प्रदर्शन को लेकर ईरान और रूस पर तंज कसा है।

अमेरिका का तंज
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि हम चिंतित हैं कि रूस ईरान को महसा अमिनी के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शन दबाने के लिए सलाह दे सकता है क्योंकि मॉस्के के पास खुले प्रदर्शनों को दबाने का व्यापक अनुभव है। साथ ही कहा कि ईरान को हमारा संदेश स्पष्ट है, लोगों को मारना बंद करो और यूक्रेन के लोगों को मारने वाले रूस को हथियार भेजना बंद करो।












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