'दूसरी दुनिया' मिलने के बाद अब अंटार्कटिका में एक और रहस्यमयी घटना, आसमान हुआ गुलाबी
नई दिल्ली: अंटार्कटिका पृथ्वी की सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक है, जहां पर इंसानों की बस्ती तो नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक वहां पर बेस बनाकर रिसर्च करते रहते हैं। अभी जून के पहले हफ्ते में पता चला था कि वहां पर बर्फ की परत के नीचे एक दूसरी दुनिया है, अब इस घटना के डेढ़ महीने बाद वहां पर एक और रहस्यमयी घटना घटी है।

बर्फ से पूरा ढका
अंटार्कटिका साल के 12 महीने बर्फ से ढका रहता है। वहां पर चारों ओर सफेद बर्फ ही दिखाई देती है। अगर मौसम साफ रहा तो नीला आसमान भी नजर आता है, लेकिन हाल ही में वहां पर एक रहस्यमयी घटना घटी। जिसे देखकर रिसर्चर भी हैरान रह गए। किसी को कुछ नहीं समझ आ रहा था कि ये कैसे हो रहा, हालांकि बाद में मौसम वैज्ञानिकों ने इस घटना के पीछे की वजह बताई।

आसमान हुआ गुलाबी
'गॉर्जियन' की रिपोर्ट के मुताबिक कि हाल ही में अंटार्कटिका में आसमान गुलाबी रंग का हो गया। देखने में वो एकदम खून की तरह लाल लग रहा था। वहां पर न्यूजीलैंड के साइंस टेक्नीशियन स्टुअर्ट शॉ मौजूद थे। उन्होंने तुरंत अपना कैमरा ऑन किया और उसकी कई तस्वीरें लीं। बाद में उन्होंने उसे इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया, जो काफी वायरल हुईं।

लोगों ने कही ये बात
इन तस्वीरों को देखकर लोग अजीब तरह की बातें करने लगे। एक शख्स ने लिखा कि अंटार्कटिका में ये सब क्या हो रहा है। अभी तक दूसरी दुनिया की तस्वीरें और वीडियो आ रहे थे। अब आसमान ही गुलाबी हो गया। ये सब कोई अनहोनी की ओर इशारा तो नहीं कर रहा। एक अन्य यूजर ने लिखा कि ये कितना खूबसूरत है। काश मैं भी वहां पर होता। एक शख्स ने कहा कि अगर वो उस वक्त वहां होता, तो डर के मारे उसकी हालत खराब हो जाती।

ये है असली वजह
वैसे ये फोटो सच है, वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की वजह भी बताई है। उन्होंने कहा कि जब भी ज्वालामुखी विस्फोट होता है, तो सल्फेट पार्टिकल्स, समुद्री नमक और वॉटर वेपर से बने एयरोसोल हवा में घूमते हैं। जब इनसे सूरज की रोशनी टकराती है, तो ये आसमान में गुलाबी, बैंगनी और नीले रंग की रोशनी फैलाते हैं। इसी वजह से अंटार्कटिका में ये घटना हुई है। ये बहुत ही दुर्लभ घटना मानी जाती है।

क्या है 'दूसरी दुनिया' की कहानी?
कुछ वक्त पहले न्यूजीलैंड की एक यूनिवर्सिटी के कुछ रिसर्चर अंटार्कटिका में बर्फ के नीचे बह रही नदियों की खोज कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने करीब 500 मीटर नीचे तक ड्रिल किया, जिस पर उन्हें एक नए अंडरवाटर इको-सिस्टम का पता चला। वैसे तो ये खोज गलती से हुई, लेकिन इसमें कई चौंकाने वाली बातें पता चली हैं। उसके नीचे एक दूसरी दुनिया थी, जिसमें कई छोटे-छोटे जीव मिले हैं।












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